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Charkhi Dadri News: 11 मिमी बारिश से हुई फसलों की सिंचाई, तीन करोड़ रुपये का डीजल फुंकने से बचा

Sat, 03 Feb 2024 03:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sat, 03 Feb 2024 03:43 AM IST
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Diesel worth Rs 3 crore saved from burning due to 11 mm rain
चरखी दादरी में रावलधी बाईपास के पास खेतों में लहलहाती गेहूं और सरसों की फसल। 
चरखी दादरी। जिले में पिछले दो दिन में हुई 11 मिमी बारिश से किसानों को सिंचाई के रूप में तीन करोड़ रुपये की बचत हुई है। बारिश से गेहूं और सरसों के अलावा सभी प्रकार की फसलों में फायदा पहुंचा है। जिले में 1.60 लाख एकड़ क्षेत्र में सरसों और एक लाख एकड़ में गेहूं की फसल खड़ी है। अब बारिश होने से इन फसलों का पकाव अच्छी तरह से हो सकेगा।
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जिले में 27 से 29 नवंबर के बीच नौ मिमी बारिश हुई थी, लेकिन उसके बाद बारिश नहीं हुई। पूरे जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ने की वजह से फसलों का विकास थम गया था। धूप न खिलने पर फसलों में फायदा की बजाय नुकसान का दौर शुरू हो गया था। खासकर सरसों में मामूली नुकसान होने की आशंका है।
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अब बारिश होने के बाद किसानों को आर्थिक बचत हुई है। उनकी सीधे तौर पर एक सिंचाई की बचत हो गई। इस समय गेहूं की तीसरी सिंचाई की जरूरत थी जो अब पूरी हो गई। इसी प्रकार सरसों की अंतिम सिंचाई का काम पूरा हो गया। अब सरसों का पकाव ढंग से हो सकेगा।
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कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सरसों मार्च प्रथम सप्ताह में पक जाती है ऐसे में इस बारिश से बेहद फायदा पहुंचेगा। सरसों का दाना चमकदार और मोटा बनेगा जिससे किसान को मंडी में भाव भी बेहतर मिलेगा। बारिश से सब्जी की खेती में भी फायदा पहुंचा है। जौ, मेथी की फसलों में भी लाभ हुआ है। इस प्रकार जिला में 67,000 किसानों को तीन करोड़ रुपये की बचत हुई है। बारिश नहीं होती तो बिजली और डीजल ईंधन के रूप में जलता। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश नहीं सोना बरसा है।



बारिश से किसानों को तीन करोड़ रुपये की बचत हुई है। बारिश नहीं होती तो किसान को फसलों की सिंचाई करनी पड़ती जिससे प्रति एकड़ लागत खर्च बढ़ता। बारिश से फसलों को भी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिल गए हैं अब पकाव बेहतर हो सकेगा। अब फसलों को रोगों से भी छुटकारा मिल जाएगा। अब तो सुबह-शाम ठंड व दिन में धूप खिलने पर फसलों के लिए फायदेमंद रहेगा। - डॉ. चंद्रभान श्योराण, कृषि विशेषज्ञ।
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