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Charkhi Dadri News: डायलिसिस पर केंद्र ....बिजली के झटके से मशीनें बीमार
Thu, 24 Oct 2024 10:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 24 Oct 2024 10:39 PM IST
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मातृ-शिशु अस्पताल के डायलिसिस केंद्र में भर्ती मरीज। संवाद
मातृ-शिशु अस्पताल के डायलिसिस केंद्र में रखीं 8 में से 5 मशीनें ही ठीक, अस्पताल का बिजली लोड कम होने से खराब हो गईं तीन मशीनें
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। शहर में स्थित मातृ-शिशु अस्पताल (एमसीएच) के डायलिसिस केंद्र की स्थिति नाजुक है। पिछले दो माह में तीन डायलिसिस मशीनें खराब हो गई हैं। इन मशीनों के खराब होने का कारण बिजली कनेक्शन का लोड कम और खपत अधिक होना बताया जा रहा है। आठ में से सिर्फ पांच मशीनों के ही काम करने के कारण कई मरीजों को डायलिसिस के लिए पीजीआई रोहतक रेफर करना पड़ रहा है। इससे मरीज और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार ने भले ही प्रदेशभर में जिलास्तर पर डायलिसिस की सुविधा नि:शुल्क देने की घोषणा अब की हो, मगर दादरी शहर के मातृ-शिशु अस्पताल में यह सेवा पहले से मरीजों को मिल रही है। करीब दो साल पहले यहां के डायलिसिस केंद्र में 8 मशीनें लगाई गई थीं, जिनमें से तीन फिलहाल बंद है। ऐसे में डायलिसिस ओपीडी प्रभावित हो रही है। लंबा इंतजार करने पर भी बारी न आने पर मरीजों को पीजीआई रोहतक और निजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है। इससे उनको आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इससे परेशान मरीजों ने अधिकारियों से मातृ-शिशु अस्पताल को हॉटलाइन से जुड़वाने या फिर केंद्र का बिजली लोड खपत के अनुरूप बढ़वाने की मांग की है।
- प्रति मरीज 4 घंटे का लगता है समय
डायलिसिस मैनेजर ने बताया कि एक मरीज की डायलिसिस करने के लिए करीब चार घंटे तक विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। अगर बीच में बत्ती गुल हो जाए तो पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ती है। ऐसे में स्पष्ट है कि मशीनों की कमी के चलते मरीज दिक्कतें झेलने को विवश हैं।
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- 6 से 7 लाख रुपये है एक मशीन की कीमत
डायलिसिस केंद्र के लिए मशीनें खरीदने पर विभाग ने करीब 50 लाख का बजट खर्च किया है। यहां आठ मशीनें हैं और एक की कीमत 6 से 7 लाख रुपये के बीच है। तीन मशीनें खराब हो चुकी हैं। यह बाद में पता चलेगा कि मशीनें ठीक होने लायक हैं या नहीं। फिलहाल, बिजली समस्या के चलते मरीजों को डायलिसिस के लिए रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ रहा है।
- होना चाहिए 150 किलोवाट, फिलहाल है 20 किलोवाट लोड का कनेक्शन
एमसीएच में फिलहाल 20 किलोवाट लोड का बिजली कनेक्शन है। यही कारण है कि लोड बढ़ने पर यहां कई मशीनें संचालित नहीं हो पा रही हैं। यहां का कनेक्शन सरदार झाडू सिंह चौक पर लगे बिजली ट्रांसफाॅर्मर से जोड़ा गया है। दो मंजिले भवन में डेंगू लैब व जच्चा-बच्चा केंद्र भी है। माम मशीनें चलाने के लिए कम से कम 150 किलोवॉट का बिजली कनेक्शन होना चाहिए।
वर्सन :
मातृ-शिशु अस्पताल के बिजली कनेक्शन का लोड बढ़ाकर 150 किलोवाट किया जाना है। इसके लिए निगम में करीब आठ लाख रुपये जमा करवाए जा चुके हैं। जल्द ही एमसीएच के बिजली कनेक्शन का लोड बढ़ जाएगा। इसके बाद समस्या नहीं रहेगी। खराब मशीनों को जल्द दुरुस्त करवा दिया जाएगा।
-डॉ. राजविरेंद्र मलिक, कार्यवाहक सीएमओ
फोटो: 22
मातृ-शिशु अस्पताल के डायलिसिस केंद्र में भर्ती मरीज। संवाद
फोटो: 23
डायलिसिस केंद्र में खराब पड़ी मशीन। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। शहर में स्थित मातृ-शिशु अस्पताल (एमसीएच) के डायलिसिस केंद्र की स्थिति नाजुक है। पिछले दो माह में तीन डायलिसिस मशीनें खराब हो गई हैं। इन मशीनों के खराब होने का कारण बिजली कनेक्शन का लोड कम और खपत अधिक होना बताया जा रहा है। आठ में से सिर्फ पांच मशीनों के ही काम करने के कारण कई मरीजों को डायलिसिस के लिए पीजीआई रोहतक रेफर करना पड़ रहा है। इससे मरीज और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार ने भले ही प्रदेशभर में जिलास्तर पर डायलिसिस की सुविधा नि:शुल्क देने की घोषणा अब की हो, मगर दादरी शहर के मातृ-शिशु अस्पताल में यह सेवा पहले से मरीजों को मिल रही है। करीब दो साल पहले यहां के डायलिसिस केंद्र में 8 मशीनें लगाई गई थीं, जिनमें से तीन फिलहाल बंद है। ऐसे में डायलिसिस ओपीडी प्रभावित हो रही है। लंबा इंतजार करने पर भी बारी न आने पर मरीजों को पीजीआई रोहतक और निजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है। इससे उनको आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इससे परेशान मरीजों ने अधिकारियों से मातृ-शिशु अस्पताल को हॉटलाइन से जुड़वाने या फिर केंद्र का बिजली लोड खपत के अनुरूप बढ़वाने की मांग की है।
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- प्रति मरीज 4 घंटे का लगता है समय
डायलिसिस मैनेजर ने बताया कि एक मरीज की डायलिसिस करने के लिए करीब चार घंटे तक विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। अगर बीच में बत्ती गुल हो जाए तो पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ती है। ऐसे में स्पष्ट है कि मशीनों की कमी के चलते मरीज दिक्कतें झेलने को विवश हैं।
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- 6 से 7 लाख रुपये है एक मशीन की कीमत
डायलिसिस केंद्र के लिए मशीनें खरीदने पर विभाग ने करीब 50 लाख का बजट खर्च किया है। यहां आठ मशीनें हैं और एक की कीमत 6 से 7 लाख रुपये के बीच है। तीन मशीनें खराब हो चुकी हैं। यह बाद में पता चलेगा कि मशीनें ठीक होने लायक हैं या नहीं। फिलहाल, बिजली समस्या के चलते मरीजों को डायलिसिस के लिए रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ रहा है।
- होना चाहिए 150 किलोवाट, फिलहाल है 20 किलोवाट लोड का कनेक्शन
एमसीएच में फिलहाल 20 किलोवाट लोड का बिजली कनेक्शन है। यही कारण है कि लोड बढ़ने पर यहां कई मशीनें संचालित नहीं हो पा रही हैं। यहां का कनेक्शन सरदार झाडू सिंह चौक पर लगे बिजली ट्रांसफाॅर्मर से जोड़ा गया है। दो मंजिले भवन में डेंगू लैब व जच्चा-बच्चा केंद्र भी है। माम मशीनें चलाने के लिए कम से कम 150 किलोवॉट का बिजली कनेक्शन होना चाहिए।
वर्सन :
मातृ-शिशु अस्पताल के बिजली कनेक्शन का लोड बढ़ाकर 150 किलोवाट किया जाना है। इसके लिए निगम में करीब आठ लाख रुपये जमा करवाए जा चुके हैं। जल्द ही एमसीएच के बिजली कनेक्शन का लोड बढ़ जाएगा। इसके बाद समस्या नहीं रहेगी। खराब मशीनों को जल्द दुरुस्त करवा दिया जाएगा।
-डॉ. राजविरेंद्र मलिक, कार्यवाहक सीएमओ
फोटो: 22
मातृ-शिशु अस्पताल के डायलिसिस केंद्र में भर्ती मरीज। संवाद
फोटो: 23
डायलिसिस केंद्र में खराब पड़ी मशीन। संवाद