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तीन स्वतंत्रता सेनानियों और दो शहीदों का गांव ढाणी फौगाट मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसा
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श्मशान घाट की ओर जाने वाला कच्चा रास्ता।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। तीन स्वतंत्रता सेनानियों और दो शहीदों के गांव ढाणी फौगाट में आज भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के अलावा 1965 के युद्ध में गांव के वीर जांबाज अपना लोहा मनवा चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी गांव की कई समस्याओं का समाधान होने का अभी इंतजार है। गांव में सबसे अधिक परेशानी कच्चे रास्तों और दूषित पानी की निकासी न होने की है। ग्रामीण बिजली निगम की आपूर्ति से भी संतुष्ट नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और सरकार को स्वतंत्रता सेनानियों और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों के गांवों में मूलभूत सुविधाओं की ओर ध्यान देना चाहिए।
ढाणी फौगाट जिला मुख्यालय से तीन किलोमीटर की दूरी है। गांव की आबादी करीब साढ़े सात हजार है। गांव निवासी भूरे सिंह, दीनाराम और रामसिंह स्वतंत्रता संग्राम में आजाद हिंद फौज के सिपाही थे। इन तीनों ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई। गांव के मौजिज लोगों ने बताया कि गांव निवासी रिसाल सिंह और जयसिंह ने पाकिस्तान के साथ 1965 में हुई लड़ाई में सर्वोच्च बलिदान दिया था। स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को कहना है कि उनके परिवार के किसी सदस्य को सरकार की ओर से नौकरी नहीं दी गई और न के बराबर आर्थिक सहायता ही उन्हें मिली है। गांव की साक्षरता दर भी ठीक है और दसवीं व बारहवीं तक के दो स्कूल गांव में हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव की गलियों से न तो दूषित पानी की निकासी की व्यवस्था की गई है और न ही गांव के कुछ मुख्य रास्तों का अब तक निर्माण हुआ है। आलम यह है कि श्मशान घाट की तरफ जाने वाले रास्ते में अक्सर जलभराव रहता है और अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को यहीं से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि चकबंदी कार्य न होने के कारण यह समस्या बनी हुई है। बिन चकबंदी कार्य के ग्राम पंचायत इन कच्चे रास्तों को पक्का नहीं करवा पा रही।
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शेड्यूल के अनुसार नहीं मिल रही बिजली आपूर्ति
ग्रामीणों ने बताया कि सरकार ने गांवों के लिए 16 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल बना रखा है, लेकिन उनके गांव में शेड्यूल के अनुसार आपूर्ति नहीं हो रही। ग्रामीणों का कहना है कि 24 घंटे में उन्हें बमुश्किल से आठ से नौ घंटे बिजली मिल पा रही है, जो अपर्याप्त है। उन्होंने बिजली आपूर्ति गांवों के शेड्यूल के अनुसार करने की मांग की है।
प्रशासन और सरकार के समक्ष मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने की मांग ग्राम पंचायत ने कई बार उठाई है। चकबंदी कार्य पूरा न होना गांव की सबसे बड़ी समस्या है। जल्द ही विभिन्न समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है।
मंदीप फौगाट, पूर्व सरपंच, ढाणी फौगाट
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ढाणी फौगाट जिला मुख्यालय से तीन किलोमीटर की दूरी है। गांव की आबादी करीब साढ़े सात हजार है। गांव निवासी भूरे सिंह, दीनाराम और रामसिंह स्वतंत्रता संग्राम में आजाद हिंद फौज के सिपाही थे। इन तीनों ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई। गांव के मौजिज लोगों ने बताया कि गांव निवासी रिसाल सिंह और जयसिंह ने पाकिस्तान के साथ 1965 में हुई लड़ाई में सर्वोच्च बलिदान दिया था। स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को कहना है कि उनके परिवार के किसी सदस्य को सरकार की ओर से नौकरी नहीं दी गई और न के बराबर आर्थिक सहायता ही उन्हें मिली है। गांव की साक्षरता दर भी ठीक है और दसवीं व बारहवीं तक के दो स्कूल गांव में हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि गांव की गलियों से न तो दूषित पानी की निकासी की व्यवस्था की गई है और न ही गांव के कुछ मुख्य रास्तों का अब तक निर्माण हुआ है। आलम यह है कि श्मशान घाट की तरफ जाने वाले रास्ते में अक्सर जलभराव रहता है और अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को यहीं से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि चकबंदी कार्य न होने के कारण यह समस्या बनी हुई है। बिन चकबंदी कार्य के ग्राम पंचायत इन कच्चे रास्तों को पक्का नहीं करवा पा रही।
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शेड्यूल के अनुसार नहीं मिल रही बिजली आपूर्ति
ग्रामीणों ने बताया कि सरकार ने गांवों के लिए 16 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल बना रखा है, लेकिन उनके गांव में शेड्यूल के अनुसार आपूर्ति नहीं हो रही। ग्रामीणों का कहना है कि 24 घंटे में उन्हें बमुश्किल से आठ से नौ घंटे बिजली मिल पा रही है, जो अपर्याप्त है। उन्होंने बिजली आपूर्ति गांवों के शेड्यूल के अनुसार करने की मांग की है।
प्रशासन और सरकार के समक्ष मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने की मांग ग्राम पंचायत ने कई बार उठाई है। चकबंदी कार्य पूरा न होना गांव की सबसे बड़ी समस्या है। जल्द ही विभिन्न समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है।
मंदीप फौगाट, पूर्व सरपंच, ढाणी फौगाट

ढाणी फौगाट में लगा गौरव पट्ट।- फोटो : CharkhiDadri