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सैनिकों, पूर्व सैनिकों व उनके परिजनों के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू कर रहा रक्षा मंत्रालय : तंवर
Mon, 05 Jan 2026 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 05 Jan 2026 11:41 PM IST
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कैंटीन का निरीक्षण करते सैनिक कैंटीन के वाइस चेयरमैन एके सिंह व निदेशक आरपीएम पंघाल।
- फोटो : 1
बाढड़ा। ईएसएम सैनिक कैंटीन को सोमवार को कस्बे के ढिगावा मंडी रोड स्थित कार्यालय में स्थानांतरित किया गया है। सैनिक कैंटीन प्रबंधक लेफ्टिनेंट मनोज तंवर, कैंटीन के वाइस चेयरमैन एके सिंह व डायरेक्टर आरपीएम पंघाल ने नए कैंटीन भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में शिरकत की। इस अवसर पर तीन युद्ध लड़ने वाले कप्तान लक्ष्मीनारायण ने शुभारंभ किया। अधिकारियों ने भूतपूर्व सैनिकों व उनके परिजनों की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही समाधान का भरोसा दिया। लेफ्टिनेंट मनोज तंवर ने कहा कि रक्षा मंत्रालय सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों व उनके परिजनों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं लागू कर रहा है, जिससे अब उनको घर के समीप ही सभी तरह की सुविधाएं मिल रही हैं। भारतीय सेना विश्व की सबसे मजबूत व आत्मनिर्भर सेना है। गर्व की बात है कि इस क्षेत्र के हर घर से कोई न कोई जवान सेना में भर्ती होकर देश सेवा में जुटा है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव की सीमा पर बने बहादुरी व बलिदान स्तंभ के रूप में हमारे जवानों की प्रतिमा इस बात की गवाह हैं कि तीन युद्धों के साथ ही अन्य ऑपरेशन में भी यहां के जवानों ने दुश्मन को मात तो दी ही बल्कि समय आने पर सर्वोच्च बलिदान देते हुए इतिहास रचने का काम किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भारतीय सेना भी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रही है।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक कर्नल रघबीर सिंह छिल्लर, कर्नल नरेंद्र श्योराण जेवली, राजेश श्योराण, कप्तान दुलीचंद बेरला, कप्तान भीम सिंह द्वारका, सूबे सिंह, रामकिशन चहड़ आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव की सीमा पर बने बहादुरी व बलिदान स्तंभ के रूप में हमारे जवानों की प्रतिमा इस बात की गवाह हैं कि तीन युद्धों के साथ ही अन्य ऑपरेशन में भी यहां के जवानों ने दुश्मन को मात तो दी ही बल्कि समय आने पर सर्वोच्च बलिदान देते हुए इतिहास रचने का काम किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भारतीय सेना भी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रही है।
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कार्यक्रम में पूर्व विधायक कर्नल रघबीर सिंह छिल्लर, कर्नल नरेंद्र श्योराण जेवली, राजेश श्योराण, कप्तान दुलीचंद बेरला, कप्तान भीम सिंह द्वारका, सूबे सिंह, रामकिशन चहड़ आदि मौजूद रहे।
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