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सिविल अस्पताल में तैनात नहीं आईसीयू स्टाफ, लक्षण नजर आते ही पीजीआई रेफर किए जा रहे कोरोना संक्रमित
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सिविल अस्पताल भवन।
- फोटो : CharkhiDadri
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कोरोना काल में नए चिकित्सक, वेंटिलेटर और एलटी मिलने से स्वास्थ्य सेवाओं में कुछ हद तक सुधार हुआ है, लेकिन स्टाफ की तैनाती न होने के चलते कुछ आवश्यक मूलभूत स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी शुरू नहीं हो पाई है। आईसीयू का स्टाफ भी इन्हीं में से एक है। आईसीयू का स्टाफ तैनात न होने के चलते कोरोना संक्रमित में लक्षण दिखने पर उन्हें रोहतक पीजीआई रेफर किया जा रहा है। वेंटिलेटर ऑपरेट करने वाले तीन विशेषज्ञ भी स्वास्थ्य विभाग के पास हैं।
जिले में जून के बाद से कोरोना का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। जिले में संक्रमितों की संख्या 260 से पार जा चुकी है। अक्तूबर और नवंबर तक केस और बढ़ने का अनुमान है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है, लेकिन स्टाफ की कमी आड़े आ रही है। अब तक जिले से चार संक्रमितों को लक्षण मिलने पर पीजीआई रेफर किया गया है। हालांकि ये चारों संक्रमित कोरोना को मात देने के बाद पीजीआई से स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। जिले में आईसीयू स्टाफ की तैनाती की कमी खल रही है।
डिप्टी सीएमओ चंचल तोमर ने बताया कि अभी तक किसी संक्रमित को वेंटिलेटर पर रखने की जरूरत नहीं पड़ी है। स्टाफ न होने के चलते लक्षण नजर आने पर ही संक्रमित को एहतियात के तौर पर पीजीआई रेफर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संक्रमितों के लिए कोविड-19 अस्पताल के अलावा सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दस वेंटिलेटर की सुविधा मुहैया है। अब तक जिले में कोरोना से एक ही मौत हुई है।
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वेंटिलेटर ऑपरेट करने वाले विशेषज्ञ की भी कमी
जिले में कोरोना काल से पहले नगारिक अस्पताल में एक भी वेंटिलेटर की सुविधा नहीं थी। गीत भवन चिकित्सालय ने संकट की घड़ी में स्वास्थ्य विभाग को एक वेंटिलेटर दिया। इसके बाद सरकार की तरफ से नौ वेंटिलेटर जिला स्वास्थ्य विभाग के पास भेजे गए। अब जिले में दस वेंटिलेटर हैं जिनमें से कोविड-19 अस्पताल में एक तो सिविल अस्पताल में नौ वेंटिलेटर हैं। इन्हें ऑपरेट करने वाले महज तीन विशेषज्ञ ही है। सूत्रों के अनुसार एक वेंटिलेटर को ऑपरेट करने के लिए एक विशेषज्ञ की जरूरत है।
विभाग ने अक्तूबर-नवंबर के लिए ये कीं तैयारी
- कोविड-19 अस्पताल में 60 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था की गई है।
- सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में 24 ऑक्सीजन बेड तैयार हैं।
- जरूरत पड़ने पर इमलोटा पीएचसी में 50 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था होगी।
- 63 ऑक्सीजन सिलिंडर का स्टॉक इस समय विभाग के पास मौजूद है।
चार हजार रेपिड टेस्ट किट मंगवाई
विभाग ने अब सैंपल लेने की प्रक्रिया तेज कर दी है और हाल ही में चार हजार रेपिड किट मंगवाई गई हैं। इससे पहले भी स्वास्थ्य विभाग के पास 5300 रेपिड टेस्ट किट पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा 422 एंटीजन टेस्ट किट भी स्वास्थ्य विभाग के पास है।
तीन एलटी मिले, सैंपल लेने में आएगी तेजी
कोरोना काल की शुरूआत में जिला स्वास्थ्य विभाग के महज छह ही एलटी थे। एलटी की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं भी बाधित हो रही थीं। हाल ही में तीन और एलटी की तैनाती स्वास्थ्य विभाग ने जिले में कर दी है। अब एलटी संख्या बढ़कर नौ हो गई है। एलटी मिलने से सैंपल लेने की प्रक्रिया तेज करने में जिला स्वास्थ्य विभाग को मदद मिलेगी।
ये है आईसीयू स्टाफ की स्थिति
पद - संख्या- तैनात
एमडी मेडिसन-1-0
मेडिकल ऑफिसर-8-4
स्टाफ नर्स-16-8
एनस्थेटिक-3-2
एमडी मेडिसन का पद खाली होने से आ सकती है समस्या
कोरोना संक्रमित अगर किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित है तो एमडी मेडिसन (मेडिसन विशेषज्ञ) ही उसे कोरोना के साथ दूसरी बीमारी से संबंधित दवा देते समय निगरानी रखता है। थोड़ी-सी अगर चूक हो जाए तो मरीज के प्राणों पर संकट बन सकता है। डॉ. गौरव ने बताया कि एमडी मेडिसन की तैनाती के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है।
डिप्टी सीएमओ चंचल तोमर से प्रबंधों पर सवाल-जवाब
सवाल: संक्रमित की तबीयत बिगड़ने पर स्वास्थ्य विभाग के पास क्या प्रबंध हैं?
जवाब: हमारे पास दस वेंटिलेंटर और 74 ऑक्सीजन सप्लाई युक्त बेड हैं।
सवाल: अब तक कितने संक्रमितों को पीजीआई रेफर किया जा चुका है?
जवाब: जिले से अब तक चार संक्रमितों को ही रेफर किया गया है।
सवाल: संक्रमितों को पीजीआई रेफर करने का कारण क्या रहा?
जवाब: लक्षण नजर आने पर एहतियात के तौर पर ही संक्रमितों को पीजीआई रेफर किया गया है।
सवाल: दवाओं और टेस्ट किट का कितना स्टॉक अभी विभाग के पास है?
जवाब: हाल ही में चार हजार रेपिड टेस्ट किट हमारे पास पहुंची हैं, जबकि 5300 पहले मंगवाई जा चुकी हैं।
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जिले में जून के बाद से कोरोना का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। जिले में संक्रमितों की संख्या 260 से पार जा चुकी है। अक्तूबर और नवंबर तक केस और बढ़ने का अनुमान है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है, लेकिन स्टाफ की कमी आड़े आ रही है। अब तक जिले से चार संक्रमितों को लक्षण मिलने पर पीजीआई रेफर किया गया है। हालांकि ये चारों संक्रमित कोरोना को मात देने के बाद पीजीआई से स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। जिले में आईसीयू स्टाफ की तैनाती की कमी खल रही है।
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डिप्टी सीएमओ चंचल तोमर ने बताया कि अभी तक किसी संक्रमित को वेंटिलेटर पर रखने की जरूरत नहीं पड़ी है। स्टाफ न होने के चलते लक्षण नजर आने पर ही संक्रमित को एहतियात के तौर पर पीजीआई रेफर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संक्रमितों के लिए कोविड-19 अस्पताल के अलावा सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दस वेंटिलेटर की सुविधा मुहैया है। अब तक जिले में कोरोना से एक ही मौत हुई है।
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वेंटिलेटर ऑपरेट करने वाले विशेषज्ञ की भी कमी
जिले में कोरोना काल से पहले नगारिक अस्पताल में एक भी वेंटिलेटर की सुविधा नहीं थी। गीत भवन चिकित्सालय ने संकट की घड़ी में स्वास्थ्य विभाग को एक वेंटिलेटर दिया। इसके बाद सरकार की तरफ से नौ वेंटिलेटर जिला स्वास्थ्य विभाग के पास भेजे गए। अब जिले में दस वेंटिलेटर हैं जिनमें से कोविड-19 अस्पताल में एक तो सिविल अस्पताल में नौ वेंटिलेटर हैं। इन्हें ऑपरेट करने वाले महज तीन विशेषज्ञ ही है। सूत्रों के अनुसार एक वेंटिलेटर को ऑपरेट करने के लिए एक विशेषज्ञ की जरूरत है।
विभाग ने अक्तूबर-नवंबर के लिए ये कीं तैयारी
- कोविड-19 अस्पताल में 60 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था की गई है।
- सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में 24 ऑक्सीजन बेड तैयार हैं।
- जरूरत पड़ने पर इमलोटा पीएचसी में 50 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था होगी।
- 63 ऑक्सीजन सिलिंडर का स्टॉक इस समय विभाग के पास मौजूद है।
चार हजार रेपिड टेस्ट किट मंगवाई
विभाग ने अब सैंपल लेने की प्रक्रिया तेज कर दी है और हाल ही में चार हजार रेपिड किट मंगवाई गई हैं। इससे पहले भी स्वास्थ्य विभाग के पास 5300 रेपिड टेस्ट किट पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा 422 एंटीजन टेस्ट किट भी स्वास्थ्य विभाग के पास है।
तीन एलटी मिले, सैंपल लेने में आएगी तेजी
कोरोना काल की शुरूआत में जिला स्वास्थ्य विभाग के महज छह ही एलटी थे। एलटी की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं भी बाधित हो रही थीं। हाल ही में तीन और एलटी की तैनाती स्वास्थ्य विभाग ने जिले में कर दी है। अब एलटी संख्या बढ़कर नौ हो गई है। एलटी मिलने से सैंपल लेने की प्रक्रिया तेज करने में जिला स्वास्थ्य विभाग को मदद मिलेगी।
ये है आईसीयू स्टाफ की स्थिति
पद - संख्या- तैनात
एमडी मेडिसन-1-0
मेडिकल ऑफिसर-8-4
स्टाफ नर्स-16-8
एनस्थेटिक-3-2
एमडी मेडिसन का पद खाली होने से आ सकती है समस्या
कोरोना संक्रमित अगर किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित है तो एमडी मेडिसन (मेडिसन विशेषज्ञ) ही उसे कोरोना के साथ दूसरी बीमारी से संबंधित दवा देते समय निगरानी रखता है। थोड़ी-सी अगर चूक हो जाए तो मरीज के प्राणों पर संकट बन सकता है। डॉ. गौरव ने बताया कि एमडी मेडिसन की तैनाती के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है।
डिप्टी सीएमओ चंचल तोमर से प्रबंधों पर सवाल-जवाब
सवाल: संक्रमित की तबीयत बिगड़ने पर स्वास्थ्य विभाग के पास क्या प्रबंध हैं?
जवाब: हमारे पास दस वेंटिलेंटर और 74 ऑक्सीजन सप्लाई युक्त बेड हैं।
सवाल: अब तक कितने संक्रमितों को पीजीआई रेफर किया जा चुका है?
जवाब: जिले से अब तक चार संक्रमितों को ही रेफर किया गया है।
सवाल: संक्रमितों को पीजीआई रेफर करने का कारण क्या रहा?
जवाब: लक्षण नजर आने पर एहतियात के तौर पर ही संक्रमितों को पीजीआई रेफर किया गया है।
सवाल: दवाओं और टेस्ट किट का कितना स्टॉक अभी विभाग के पास है?
जवाब: हाल ही में चार हजार रेपिड टेस्ट किट हमारे पास पहुंची हैं, जबकि 5300 पहले मंगवाई जा चुकी हैं।