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बायोगैस प्लांट से तैयार होगी कुकिंग गैस, घरों में होंगे कनेक्शन
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बायोगैस प्लांट से तैयार होगी कुकिंग गैस, घरों में होंगे कनेक्शन
चरखी दादरी। सरकार के निर्देशों पर जिला प्रशासन अचीना में जिले का पहला बायोगैस प्लांट तैयार करवा रहा है। इस पर करीब 50 लाख रुपये लागत आएगी। इस प्लांट में कुकिंग गैस तैयार की जाएगी, जिसे कनेक्शन के जरिये गरीब तबके के लोगों के घरों तक पहुंचाया जाएगा। घरों तक कुकिंग गैस पहुंचाने के लिए पाइपलाइन भी बिछाई जाएगी। बायोगैस प्लांट में गैस तैयार होने के बाद अवशेष के रुप मेें गोबर को खेतों में खाद के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। बायोगैस प्लांट को गोशाला से लिंक किया जाएगा। इस प्लांट की क्षमता 48 क्यूम गोबर की होगी। यह प्रोजेक्ट तीन माह में पूरा होने की उम्मीद है।
पशुओं के गोबर का इस समय जलाने के रुप में ही ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। खासकर गोशालाओं में गोबर के इस्तेमाल को लेकर दिक्कत बन रही है। कुछ किसान गोशालाओं से गोबर को खेतों डालने के लिए खरीद लेते हैं, लेकिन फिर भी इसका समायोजन नहीं हो पाता है। इसका ररख-रखाव व प्रबंधन करना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए जगह का भी अभाव बना रहता है। जिले भर में 10 से ज्यादा गोशालाएं हैं, जिनमें हजारों की संख्या में गोवंश की सेवा की जा रही है। गायों के लिए चारे का प्रबंध ग्रामीणों की ओर से किया जाता है। समय समय पर गोशाला समितियां चंदा भी एकत्र करती हैं। किसी मंत्री या विधायक के कोटे से भी कुछ सहायता राशि मिल जाती है।
अब सरकार ने गोशालाओं में गोबर के प्रबंधन के लिए प्रोजेक्ट किया है। जिला में एकमात्र गांव अचीना में बायोगैस प्लांट बनने जा रहा है। इस प्लांट को गांव अचीना में ही स्थिति गोशाला से लिंक किया जाएगा ताकि गोबर पर्याप्त मात्रा मेें मिलता रहे और गैस का उत्पादन होता रहे। तैयार गैस को गोशाला में ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा गांव में लोगों को कनेक्शन जारी किए जा सकेंगे। इसका इस्तेमाल कुकिंग गैस के रूप में घरों में किया जा सकेगा, लेकिन इससे पहले गोशाला की खपत की पूर्ति की जाएगी। उसके बाद बची हुई गैस को घरों में दिया जा सकेगा। इसके तहत विभाग का प्लान है कि ग्रामीणों को गोबर के बदले गैस दी जाएगी।
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- सात लाख रुपये कीमत की लगेगी बायोगैस मशीन
अचीना में बनने वाले बायोगैस प्लांट में करीब सात लाख रुपये कीमत की मशीन लगाई जाएगी। इसके जरिये गोबर से कुकिंग गैस तैयार की जाएगी। मशीन की खरीद प्रक्रिया की कवायद विभाग की ओर से शुरू की जा चुकी है और मशीन की क्षमता 400 क्यूम गोबर की होगी।
- डिप्टी सीएम दे चुके एक और जगह प्लांट लगाने के आदेश
गत 11 फरवरी को चरखी दादरी आए डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के सभागार में अधिकारियों की बैठक ली थी। इस बैठक में उन्होंने अचीना के अलावा बाढड़ा हलके किसी गांव में एक और बायोगैस प्लांट लगाने के निर्देश दिए थे। उस दौरान कादमा में जिले की सबसे बड़ी गोशाला होने की बात सामने आई थी और डिप्टी सीएम ने इस प्रोजेक्ट पर गंभीरता से विचार करने के साथ धरातल पर अमलीजामा पहनाने की कवायद जल्द शुरू करने के निर्देश दिए थे।
वर्जन::
बायोगैस प्लांट गोशाला से लिंक होगा। अतिरिक्त गैस को कुकिंग के रूप में घरों में दिया जा सकेगा। जल्द ही यहां मशीनरी लगाई जाएगी। गोशाला के गोबर का इससे सही ढंग से प्रबंधन हो सकेगा।
- कुशल कटारिया, स्वच्छता मिशन प्रभारी।
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चरखी दादरी। सरकार के निर्देशों पर जिला प्रशासन अचीना में जिले का पहला बायोगैस प्लांट तैयार करवा रहा है। इस पर करीब 50 लाख रुपये लागत आएगी। इस प्लांट में कुकिंग गैस तैयार की जाएगी, जिसे कनेक्शन के जरिये गरीब तबके के लोगों के घरों तक पहुंचाया जाएगा। घरों तक कुकिंग गैस पहुंचाने के लिए पाइपलाइन भी बिछाई जाएगी। बायोगैस प्लांट में गैस तैयार होने के बाद अवशेष के रुप मेें गोबर को खेतों में खाद के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। बायोगैस प्लांट को गोशाला से लिंक किया जाएगा। इस प्लांट की क्षमता 48 क्यूम गोबर की होगी। यह प्रोजेक्ट तीन माह में पूरा होने की उम्मीद है।
पशुओं के गोबर का इस समय जलाने के रुप में ही ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। खासकर गोशालाओं में गोबर के इस्तेमाल को लेकर दिक्कत बन रही है। कुछ किसान गोशालाओं से गोबर को खेतों डालने के लिए खरीद लेते हैं, लेकिन फिर भी इसका समायोजन नहीं हो पाता है। इसका ररख-रखाव व प्रबंधन करना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए जगह का भी अभाव बना रहता है। जिले भर में 10 से ज्यादा गोशालाएं हैं, जिनमें हजारों की संख्या में गोवंश की सेवा की जा रही है। गायों के लिए चारे का प्रबंध ग्रामीणों की ओर से किया जाता है। समय समय पर गोशाला समितियां चंदा भी एकत्र करती हैं। किसी मंत्री या विधायक के कोटे से भी कुछ सहायता राशि मिल जाती है।
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अब सरकार ने गोशालाओं में गोबर के प्रबंधन के लिए प्रोजेक्ट किया है। जिला में एकमात्र गांव अचीना में बायोगैस प्लांट बनने जा रहा है। इस प्लांट को गांव अचीना में ही स्थिति गोशाला से लिंक किया जाएगा ताकि गोबर पर्याप्त मात्रा मेें मिलता रहे और गैस का उत्पादन होता रहे। तैयार गैस को गोशाला में ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा गांव में लोगों को कनेक्शन जारी किए जा सकेंगे। इसका इस्तेमाल कुकिंग गैस के रूप में घरों में किया जा सकेगा, लेकिन इससे पहले गोशाला की खपत की पूर्ति की जाएगी। उसके बाद बची हुई गैस को घरों में दिया जा सकेगा। इसके तहत विभाग का प्लान है कि ग्रामीणों को गोबर के बदले गैस दी जाएगी।
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- सात लाख रुपये कीमत की लगेगी बायोगैस मशीन
अचीना में बनने वाले बायोगैस प्लांट में करीब सात लाख रुपये कीमत की मशीन लगाई जाएगी। इसके जरिये गोबर से कुकिंग गैस तैयार की जाएगी। मशीन की खरीद प्रक्रिया की कवायद विभाग की ओर से शुरू की जा चुकी है और मशीन की क्षमता 400 क्यूम गोबर की होगी।
- डिप्टी सीएम दे चुके एक और जगह प्लांट लगाने के आदेश
गत 11 फरवरी को चरखी दादरी आए डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के सभागार में अधिकारियों की बैठक ली थी। इस बैठक में उन्होंने अचीना के अलावा बाढड़ा हलके किसी गांव में एक और बायोगैस प्लांट लगाने के निर्देश दिए थे। उस दौरान कादमा में जिले की सबसे बड़ी गोशाला होने की बात सामने आई थी और डिप्टी सीएम ने इस प्रोजेक्ट पर गंभीरता से विचार करने के साथ धरातल पर अमलीजामा पहनाने की कवायद जल्द शुरू करने के निर्देश दिए थे।
वर्जन::
बायोगैस प्लांट गोशाला से लिंक होगा। अतिरिक्त गैस को कुकिंग के रूप में घरों में दिया जा सकेगा। जल्द ही यहां मशीनरी लगाई जाएगी। गोशाला के गोबर का इससे सही ढंग से प्रबंधन हो सकेगा।
- कुशल कटारिया, स्वच्छता मिशन प्रभारी।
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