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Charkhi Dadri News: पत्थर का रेट 10 रुपये बढ़ाने पर बनी सहमति, हड़ताल खत्म होने से क्रशर जोन में काम शुरू
Thu, 11 May 2023 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 11 May 2023 11:34 PM IST
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क्रशर जोन में लगी डंपरों की कतार।
चरखी दादरी। पत्थर के रेट बढ़ाने के विरोध में की गई हड़ताल को क्रशर एसोसिएशन ने वापस ले लिया है। इससे पहले कंपनी और एसोसिएशन के बीच पत्थर का रेट 10 रुपये बढ़ाने पर सहमति बनी। वार्ता सिरे चढ़ने के बाद वीरवार से जिले के 9 क्रशर जोन में 343 क्रशर का संचालन फिर से शुरू हो गया। इससे पहले 5 दिन तक काम ठप रहने से क्रशर जोन का 26.25 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।
बता दें कि कंपनियों ने पत्थरों की कीमतों में 20 रुपये से 23 रुपये प्रति टन इजाफा कर दिया था। इसके विरोध में क्रशर एसोसिएशन ने सात मई से हड़ताल शुरू कर दी थी। नौ मई को क्रशर एसोसिएशन ने बैठक कर कंपनियों को रविवार तक रेट वापस नहीं लेने पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी थी। बुधवार शाम खेड़ी बत्तर क्रशर जोन में कंपनी एवं क्रशर एसोसिएशन की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पत्थरों की कीमत पर 20 से 23 रुपये प्रति टन की बजाय 10 रुपये प्रति टन बढ़ाए जाने पर सहमति बन गई। इसके बाद क्रशर एसोसिएशन ने अपनी हड़ताल वापस ले ली। वीरवार से क्रशर जोन का काम दोबारा पटरी पर लौट आया है।
- अब ये रहेंगे रेट
एसोसिएशन के अनुसार जिले के क्रशर जोन से दो तरह के पत्थर निकलते हैं। एक पत्थर की कीमत 171 रुपये प्रति टन और दूसरा पत्थर की कीमत 202 रुपये प्रति टन है। अब कंपनी ने इन दोनों पर 10-10 रुपये प्रति टन के हिसाब से बढ़ाए हैं। अब पत्थरों की कीमत 181 रुपये और 212 रुपये प्रति टन होगी। पत्थरों की कीमत में बढ़ोतरी होने से भवन निर्माण सामग्री के रेट भी बढ़ेंगे।
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- क्रशरों से निकलती हैं प्रतिदिन पांच हजार गाड़ियां
जिले के अंदर 9 क्रशर जोन हैं। इन जोनों में लगभग 343 क्रशर लगे हुए हैं। इन क्रशरों से प्रतिदिन पांच हजार गाड़ियां भवन निर्माण सामग्री लेकर निकलती हैं। एक गाड़ी में औसत 30 टन माल भरा जाता है। इस प्रकार पांच हजार गाड़ियों में प्रतिदिन डेढ़ लाख टन माल दूसरे जिलों और प्रदेशों में जाता है। क्रशर संचालक एक टन के 350 रुपये चार्ज करते हैं। ऐसे में क्रशर जोन पर प्रतिदिन 5.25 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। पांच दिन के अंदर 26.25 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
सरकार को 1.31 करोड़ रुपये के राजस्व का हुआ नुकसान
क्रशर जोन से सरकार को पांच प्रतिशत जीएसटी के रूप में दिया जाता है। इन जोन से प्रतिदिन 26.25 लाख रुपये का टैक्स सरकार को जाता है। पांच दिन कारोबार नहीं होने से सरकार को एक करोड़ 31 लाख 25 हजार रुपये राजस्व का नुकसान हो गया।
पत्थरों के रेट पर सहमति बनने के बाद क्रशर संचालकों ने हड़ताल वापस ले ली है। वीरवार से जिले के सभी क्रशरों पर काम शुरू हो गया।
-नवीन, प्रधान, खेड़ी बत्तर जोन
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बता दें कि कंपनियों ने पत्थरों की कीमतों में 20 रुपये से 23 रुपये प्रति टन इजाफा कर दिया था। इसके विरोध में क्रशर एसोसिएशन ने सात मई से हड़ताल शुरू कर दी थी। नौ मई को क्रशर एसोसिएशन ने बैठक कर कंपनियों को रविवार तक रेट वापस नहीं लेने पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी थी। बुधवार शाम खेड़ी बत्तर क्रशर जोन में कंपनी एवं क्रशर एसोसिएशन की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पत्थरों की कीमत पर 20 से 23 रुपये प्रति टन की बजाय 10 रुपये प्रति टन बढ़ाए जाने पर सहमति बन गई। इसके बाद क्रशर एसोसिएशन ने अपनी हड़ताल वापस ले ली। वीरवार से क्रशर जोन का काम दोबारा पटरी पर लौट आया है।
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- अब ये रहेंगे रेट
एसोसिएशन के अनुसार जिले के क्रशर जोन से दो तरह के पत्थर निकलते हैं। एक पत्थर की कीमत 171 रुपये प्रति टन और दूसरा पत्थर की कीमत 202 रुपये प्रति टन है। अब कंपनी ने इन दोनों पर 10-10 रुपये प्रति टन के हिसाब से बढ़ाए हैं। अब पत्थरों की कीमत 181 रुपये और 212 रुपये प्रति टन होगी। पत्थरों की कीमत में बढ़ोतरी होने से भवन निर्माण सामग्री के रेट भी बढ़ेंगे।
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- क्रशरों से निकलती हैं प्रतिदिन पांच हजार गाड़ियां
जिले के अंदर 9 क्रशर जोन हैं। इन जोनों में लगभग 343 क्रशर लगे हुए हैं। इन क्रशरों से प्रतिदिन पांच हजार गाड़ियां भवन निर्माण सामग्री लेकर निकलती हैं। एक गाड़ी में औसत 30 टन माल भरा जाता है। इस प्रकार पांच हजार गाड़ियों में प्रतिदिन डेढ़ लाख टन माल दूसरे जिलों और प्रदेशों में जाता है। क्रशर संचालक एक टन के 350 रुपये चार्ज करते हैं। ऐसे में क्रशर जोन पर प्रतिदिन 5.25 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। पांच दिन के अंदर 26.25 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
सरकार को 1.31 करोड़ रुपये के राजस्व का हुआ नुकसान
क्रशर जोन से सरकार को पांच प्रतिशत जीएसटी के रूप में दिया जाता है। इन जोन से प्रतिदिन 26.25 लाख रुपये का टैक्स सरकार को जाता है। पांच दिन कारोबार नहीं होने से सरकार को एक करोड़ 31 लाख 25 हजार रुपये राजस्व का नुकसान हो गया।
पत्थरों के रेट पर सहमति बनने के बाद क्रशर संचालकों ने हड़ताल वापस ले ली है। वीरवार से जिले के सभी क्रशरों पर काम शुरू हो गया।
-नवीन, प्रधान, खेड़ी बत्तर जोन