{"_id":"6aa5937069628523f2054064","slug":"concern-grows-over-animals-showing-symptoms-of-lumpy-disease-a-suspected-case-has-also-been-spotted-in-the-champapuri-area-charkhi-dadri-news-c-126-1-cdr1004-160271-2026-09-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: लंपी के लक्षण वाले पशुओं से बढ़ी चिंता, चंपापुरी क्षेत्र में भी दिखा संदिग्ध पशु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: लंपी के लक्षण वाले पशुओं से बढ़ी चिंता, चंपापुरी क्षेत्र में भी दिखा संदिग्ध पशु
Sat, 12 Sep 2026 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 12 Sep 2026 11:31 PM IST
विज्ञापन
शहर के घिकाड़ा की गली में खड़ा लम्पी वायरस लक्षण वाला पशु। संवाद
चरखी दादरी। शहर की गलियों और बाजारों में लंपी वायरस जैसे लक्षण वाले पशुओं के खुलेआम घूमने से पशुपालकों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। चंपापुरी क्षेत्र में भी एक पशु में इसी तरह के लक्षण दिखाई दिए हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि कई स्थानों पर ऐसे पशु घूमते नजर आ रहे हैं जिनके शरीर पर गांठें और त्वचा संबंधी समस्या है। इसके बावजूद पशुओं को खुले में छोड़ने पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।
पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने हालांकि जिले में अभी तक लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) से संक्रमित वायरस का कोई मामला सामने आने से इन्कार किया है। विभाग के अनुसार केवल संदिग्ध लक्षण दिखाई देने से किसी पशु को लंपी संक्रमित नहीं माना जा सकता। इसके लिए पशु चिकित्सकों की जांच और आवश्यक परीक्षण के बाद ही स्थिति स्पष्ट होती है। विभाग ने बीमारी की रोकथाम के लिए जिले में बड़े स्तर पर पशुओं का टीकाकरण अभियान चलाया है।
-- -- -- -- -- -- -
टीकाकरण अभियान और लक्ष्य
अधिकारियों के अनुसार जिले में 46 हजार पशुओं को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। विभाग की टीमों ने अभियान के तहत करीब 45,600 पशुओं का टीकाकरण कर दिया है। इस तरह निर्धारित लक्ष्य का अधिकांश हिस्सा पूरा किया जा चुका है। विभाग का दावा है कि टीकाकरण के साथ-साथ पशुओं के स्वास्थ्य पर भी नजर रखी जा रही है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -
आवारा पशुओं की निगरानी चुनौती
शहर में आवारा पशुओं की संख्या 700 से अधिक है। इनकी निगरानी पशुपालन विभाग और नगर परिषद के लिए एक चुनौती बनी हुई है। बाजारों और गलियों में घूमने वाले पशुओं के संपर्क में अन्य पशु भी आते हैं। ऐसे में यदि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे अलग रखने और समय पर चिकित्सकीय जांच कराने की जरूरत है।
-- -- -- -- -
स्थानीय लोगों की मांग और विभाग की सलाह
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि चंपापुरी समेत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पशुओं की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। संदिग्ध पशुओं की पहचान कर उन्हें अन्य पशुओं से अलग रखने की व्यवस्था की जाए। इससे बीमारी को लेकर किसी भी तरह की आशंका को समय रहते दूर किया जा सकेगा। पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पशुपालकों को भी जागरूक किया जा रहा है। किसी पशु में त्वचा पर असामान्य गांठ, बुखार या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर उसे अन्य पशुओं से अलग रखकर तुरंत विभाग को सूचना देने की सलाह दी जा रही है। विभाग के अनुसार फिलहाल जिले में लंपी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
-- -- -- -- -
जिले में अभी तक लंपी लक्षण वाले पशुओं के मिलने की कोई पुष्टी नहीं हुई है। पशुओं में ऐसे लक्षण नजर आने पर पशु पालक तुरंत नजदीकी पशु अस्पताल के चिकित्सकों से उपचार करवाए।
- डॉ. जसवंत जून, उप निदेशक पशु पालन विभाग
विज्ञापन
पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने हालांकि जिले में अभी तक लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) से संक्रमित वायरस का कोई मामला सामने आने से इन्कार किया है। विभाग के अनुसार केवल संदिग्ध लक्षण दिखाई देने से किसी पशु को लंपी संक्रमित नहीं माना जा सकता। इसके लिए पशु चिकित्सकों की जांच और आवश्यक परीक्षण के बाद ही स्थिति स्पष्ट होती है। विभाग ने बीमारी की रोकथाम के लिए जिले में बड़े स्तर पर पशुओं का टीकाकरण अभियान चलाया है।
विज्ञापन
टीकाकरण अभियान और लक्ष्य
अधिकारियों के अनुसार जिले में 46 हजार पशुओं को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। विभाग की टीमों ने अभियान के तहत करीब 45,600 पशुओं का टीकाकरण कर दिया है। इस तरह निर्धारित लक्ष्य का अधिकांश हिस्सा पूरा किया जा चुका है। विभाग का दावा है कि टीकाकरण के साथ-साथ पशुओं के स्वास्थ्य पर भी नजर रखी जा रही है।
विज्ञापन
आवारा पशुओं की निगरानी चुनौती
शहर में आवारा पशुओं की संख्या 700 से अधिक है। इनकी निगरानी पशुपालन विभाग और नगर परिषद के लिए एक चुनौती बनी हुई है। बाजारों और गलियों में घूमने वाले पशुओं के संपर्क में अन्य पशु भी आते हैं। ऐसे में यदि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे अलग रखने और समय पर चिकित्सकीय जांच कराने की जरूरत है।
स्थानीय लोगों की मांग और विभाग की सलाह
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि चंपापुरी समेत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पशुओं की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। संदिग्ध पशुओं की पहचान कर उन्हें अन्य पशुओं से अलग रखने की व्यवस्था की जाए। इससे बीमारी को लेकर किसी भी तरह की आशंका को समय रहते दूर किया जा सकेगा। पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पशुपालकों को भी जागरूक किया जा रहा है। किसी पशु में त्वचा पर असामान्य गांठ, बुखार या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर उसे अन्य पशुओं से अलग रखकर तुरंत विभाग को सूचना देने की सलाह दी जा रही है। विभाग के अनुसार फिलहाल जिले में लंपी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
जिले में अभी तक लंपी लक्षण वाले पशुओं के मिलने की कोई पुष्टी नहीं हुई है। पशुओं में ऐसे लक्षण नजर आने पर पशु पालक तुरंत नजदीकी पशु अस्पताल के चिकित्सकों से उपचार करवाए।
- डॉ. जसवंत जून, उप निदेशक पशु पालन विभाग