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Charkhi Dadri News: जिले के एक कबड्डी कोच व एक पहलवान को मिल चुका है मेजर ध्यानचंद अवॉर्ड
Fri, 30 Aug 2024 05:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 30 Aug 2024 05:24 AM IST
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विकास सांगवान।
खेेल दिवस विशेष==
खिलाड़ी बोले-मेजर ध्यानचंद के समय नहीं थी आज जैसी खेल सुविधाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले के एक कोच व एक पहलवान को मेजर ध्यानचंद खेल अवाॅर्ड मिल चुका है। जिले के युवा खेल क्षेत्र में अधिक सक्रिय हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा दिखाकर क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। उनके लिए राष्ट्रीय खेल दिवस का महत्व काफी बढ़ जाता है।
जिले में कुश्ती, कबड्डी, एथलेटिक्स और वॉलीबाल अधिक पसंद किए जाने वाले खेल हैं। इन खेलों में जिले के कई युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपना प्रदर्शन कर चुके हैं। जिले में एक कबड्डी कोच व एक पहलवान को मेजर ध्यानचंद अवॉर्ड मिला हुआ है। इसमें अवाॅर्डी पहलवान सज्जन सिंह का गत वर्ष निधन हो चुका है। इनके समय में उतनी खेल सुविधाएं नहीं थीं, फिर भी अपनी मेहनत के बलबूते उन्होंने नाम कमाया और अवाॅर्ड हासिल किया।
जिले के कुछ खिलाड़ियों से उनका सफर
गांव आदमपुर में उस दौरान खेलने के लिए सीमित सुविधाएं थीं। देसी खानपान और गांव में ही तैयारी करते थे। खेल जीवन में 13 राष्ट्रीय व 10 अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं। 2013 में कोच बने और अब तक 200 खिलाड़ी तैयार कर चुका हूं। इसी कारण साल 2021 में राष्ट्रपति के हाथों मेजर ध्यानचंद अवॉर्ड मिला।
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-विकास सांगवान, कबड्डी कोच
-सड़क दुर्घटना में पैर में चोट होने के बाद खेलना शुरू किया। अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 18 पदक जीत चुका हूं। अब भी किष्कंधा गांव में खेलने के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। अपने स्तर पर तैयारी कर ये पदक हासिल किए हैं। अब आगामी स्पर्धाओं में पदक जीतने की तैयारी है।
-देवेंद्र कुमार, पैरा एथलीट
खेल की शुरुआत गांव बलाली में गुरु द्रोणाचार्य अवॉर्डी महाबीर फौगाट के पास की। अब खोरड़ा में सज्जन मंदोला के मार्गदर्शन में तैयारी कर रही हूं। मुझे खेल के लिए कोई परेशानी नहीं हुई। इसमें परिजनों का काफी सहयोग रहा। अब तक मैंने 11 राष्ट्रीय व चार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल किए हैं।
-नेहा सांगवान, अंतरराष्ट्रीय पहलवान
खेल क्षेत्र में अपने कॅरिअर की शुरुआत 17 साल पहले की थी। अब तक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक आठ पदक हासिल किए हैं। गांव आदमपुर में उस समय ज्यादा खेल सुविधाएं नहीं थीं। गांव में तैयारी शुरू की और बाद में मेहनत के अनुसार सफलता की सीढ़ी चढ़ी। अब रेलवे विभाग में कार्यरत हूं।
-नितेश सांगवान, अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी
फोटो - 13
विकास सांगवान।
फोटो - 14
नितेश सांगवान।
फोटो- 15
नेहा सांगवान।
फोटो- 16
देवेंद्र कुमार।
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खिलाड़ी बोले-मेजर ध्यानचंद के समय नहीं थी आज जैसी खेल सुविधाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले के एक कोच व एक पहलवान को मेजर ध्यानचंद खेल अवाॅर्ड मिल चुका है। जिले के युवा खेल क्षेत्र में अधिक सक्रिय हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा दिखाकर क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। उनके लिए राष्ट्रीय खेल दिवस का महत्व काफी बढ़ जाता है।
जिले में कुश्ती, कबड्डी, एथलेटिक्स और वॉलीबाल अधिक पसंद किए जाने वाले खेल हैं। इन खेलों में जिले के कई युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपना प्रदर्शन कर चुके हैं। जिले में एक कबड्डी कोच व एक पहलवान को मेजर ध्यानचंद अवॉर्ड मिला हुआ है। इसमें अवाॅर्डी पहलवान सज्जन सिंह का गत वर्ष निधन हो चुका है। इनके समय में उतनी खेल सुविधाएं नहीं थीं, फिर भी अपनी मेहनत के बलबूते उन्होंने नाम कमाया और अवाॅर्ड हासिल किया।
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जिले के कुछ खिलाड़ियों से उनका सफर
गांव आदमपुर में उस दौरान खेलने के लिए सीमित सुविधाएं थीं। देसी खानपान और गांव में ही तैयारी करते थे। खेल जीवन में 13 राष्ट्रीय व 10 अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं। 2013 में कोच बने और अब तक 200 खिलाड़ी तैयार कर चुका हूं। इसी कारण साल 2021 में राष्ट्रपति के हाथों मेजर ध्यानचंद अवॉर्ड मिला।
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-विकास सांगवान, कबड्डी कोच
-सड़क दुर्घटना में पैर में चोट होने के बाद खेलना शुरू किया। अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 18 पदक जीत चुका हूं। अब भी किष्कंधा गांव में खेलने के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। अपने स्तर पर तैयारी कर ये पदक हासिल किए हैं। अब आगामी स्पर्धाओं में पदक जीतने की तैयारी है।
-देवेंद्र कुमार, पैरा एथलीट
खेल की शुरुआत गांव बलाली में गुरु द्रोणाचार्य अवॉर्डी महाबीर फौगाट के पास की। अब खोरड़ा में सज्जन मंदोला के मार्गदर्शन में तैयारी कर रही हूं। मुझे खेल के लिए कोई परेशानी नहीं हुई। इसमें परिजनों का काफी सहयोग रहा। अब तक मैंने 11 राष्ट्रीय व चार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल किए हैं।
-नेहा सांगवान, अंतरराष्ट्रीय पहलवान
खेल क्षेत्र में अपने कॅरिअर की शुरुआत 17 साल पहले की थी। अब तक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक आठ पदक हासिल किए हैं। गांव आदमपुर में उस समय ज्यादा खेल सुविधाएं नहीं थीं। गांव में तैयारी शुरू की और बाद में मेहनत के अनुसार सफलता की सीढ़ी चढ़ी। अब रेलवे विभाग में कार्यरत हूं।
-नितेश सांगवान, अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी
फोटो - 13
विकास सांगवान।
फोटो - 14
नितेश सांगवान।
फोटो- 15
नेहा सांगवान।
फोटो- 16
देवेंद्र कुमार।