फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Charkhi Dadri News ›   Civil hospital built at district, referral center, facing shortage of experts

विशेषज्ञों की कमी से जूझ रहा जिला, रेफर केंद्र पर बना सिविल अस्पताल

Fri, 08 Jan 2021 11:32 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 08 Jan 2021 11:32 PM IST
विज्ञापन
Civil hospital built at district, referral center, facing shortage of experts
दादरी के जिला बनने के चार साल बाद भी स्वास्थ्य विभाग संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। इस समय जिले में विशेषज्ञों के नाम पर सिविल अस्पताल में सिर्फ एक सर्जन और तीन गाइनोलॉजिस्ट ही हैं। इसके अलावा विशेषज्ञों के दस पद खाली पड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अब तक दादरी में विशेषज्ञों की तैनाती करने की तरफ ध्यान नहीं दिया है। हाल ही में चर्म रोग विशेषज्ञ ने भी रिजाइन दे दिया है, जिसके चलते चर्म रोग की ओपीडी भी अस्पताल में पिछले एक सप्ताह से बंद है। स्वास्थ्य विभाग के जिला अधिकारियों का कहना है कि वे हेड ऑफिस लगातार डिमांड भेज रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों के खाली पदों पर तैनाती नहीं हो पाई है।
विज्ञापन

विशेषज्ञों व संसाधनों की कमी के चलते दादरी सिविल अस्पताल रेफर केंद्र बना हुआ है। दुर्घटना में घायल मरीजों के अलावा जहर निगलने और आग से जलने के केस प्राथमिक उपचार के बाद रोहतक पीजीआई रेफर किए जा रहे हैं। जिले के सामाजिक संगठन कई बार स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ाने की मांग उठा चुके हैं, जो अब तक परवान नहीं चढ़ पाई है। जिले में फिलहाल पीडिट्रिशियन, एमडी मेडिसन, चर्म रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, ईएनटी व पैथोलॉजिस्ट समेत दस विशेषज्ञों के पद खाली हैं। कोरोनाकाल में स्वास्थ्य विभाग ने 20 मेडिकल ऑफिसर जिले में तैनात किए हैं, लेकिन विशेषज्ञों की कमी लगातार बनी हुई है।
विज्ञापन

साढ़े पांच लाख लोग जिला स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित
दादरी जिले में 172 गांव हैं और जिले की आबादी करीब साढ़े पांच लाख है। जिले में सिविल अस्पताल समेत स्वास्थ्य केंद्र हैं। शहर में सिविल अस्पताल और मातृ शिशु अस्पताल है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिले की साढ़े पांच लाख की आबादी को विशेषज्ञों और स्वास्थ्य संसाधनों की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बाल रोग विशेषज्ञ की कमी, निजी अस्पतालों में करवाना पड़ रहा उपचार
जिले में पिछले लंबे समय से बाल रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं है। इसके चलते जिले के लोग बच्चों का उपचार करवाने के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर हैं। शहर के चार मुख्य निजी अस्पतालों की दैनिक ओपीडी 200 से पार रहती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार बच्चों का उपचार निजी अस्पताल में करवाने में सक्षम नहीं हैं और उन्हें सस्ते उपचार के लिए भिवानी जीएच या फिर रोहतक पीजीआई के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
एक माह में दो हजार से अधिक मरीजों को किया जाता है रेफर
दादरी सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी करीब 500 है। एमआईआर और सिटी स्कैन के प्रतिदिन करीब 15 से 20 मरीज भिवानी भेजे जाते हैं। इसके अलावा सड़क हादसे में घायल प्रतिदिन तीन से चार लोगों को भी भिवानी या रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है। आंखों के ऑपरेशन की भी अस्पताल में सुविधा नहीं है और एक माह में 200 से 250 मरीजों को ऑपरेशन के लिए भिवानी जाना पड़ता है। एक माह में सिविल अस्पताल से औसतन दो हजार मरीज रेफर किए जाते हैं।
अस्पताल के 11 वेंटिलेटर को फिजिशियन की जरूरत
सिविल अस्पताल में कोरोना काल में 11 वेंटिलेटर तो आ गए हैं, लेकिन इन्हें ऑपरेट करने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने एक भी फिजिशियन तैनात नहीं किया है। इसके कारण अब तक एक भी वेंटिलेटर वर्किंग में नहीं हैं। इस समय सिविल अस्पताल में रखे वेंटिलेटर को फिजिशियन रूपी ऑक्सीजन की जरूरत है।
जिले में ये विशेषज्ञ हैं तैनात
इस समय सर्जन के तौर पर डॉक्टर अंकित अपनी सेवाएं दे रहे हैं। एनस्थीसिया स्पेशलिस्ट के तौर पर डॉक्टर आरोह और अनिल, जबकि गाइनोलॉजिस्ट के रूप में डॉक्टर अनीता गुलिया, डॉक्टर शिल्पी और डॉक्टर बिंदु तैनात हैं।

वर्जन
विशेषज्ञों की कमी यकीनन जिले में बनी हुई है। हम इस संबंध में लगातार हेड ऑफिस डिमांड भेज रहे हैं। उम्मीद है कि दादरी जिले में जल्द ही विशेषज्ञों की तैनात हो जाएगी और इसके बाद स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ जाएगा।
- डॉ. सुदर्शन पंवार, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed