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Charkhi Dadri News: संसाधन व विशेषज्ञों की कमी होने से रेफर केंद्र बना सिविल अस्पताल

Thu, 14 Dec 2023 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Thu, 14 Dec 2023 12:09 AM IST
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Civil hospital became referral center due to lack of resources and experts
सिविल अस्पताल के ओपीडी काउंटर पर लगी मरीजों की कतार।
चरखी दादरी। बढ़ती सर्दी के साथ ही आमजन इसकी चपेट में आकर बीमार हो रहे हैं। इस समय जिले के सभी 17 स्वास्थ्य केंद्रों की दैनिक ओपीडी 2500 के पार चल रही है। अकेले सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी 1300 तक पहुंची हुई है। दूसरी ओर संसाधनों और विशेषज्ञों की कमी के चलते मरीजों को दूसरे जिलों में रेफर किया जा रहा है। इनमें से रोजाना 200 से अधिक मरीज दूसरे जिलों में उपचार के लिए रेफर किए जा रहे हैं।
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बता दें कि दादरी के जिला बनाने के सात साल बाद भी सिविल अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं हुई है। इसके चलते जिला स्वास्थ्य केंद्र रेफर केंद्र बनकर रह गया है। विशेषज्ञों की कमी के चलते जिले से हर माह औसतन चार हजार मरीज रेफर किए जा रहे हैं। वहीं, जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद अब तक विशेषज्ञों की जिले में तैनाती नहीं हो पाई है। इसका सीधे तौर पर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।
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ठंड का मौसम शुरू होने से पहले सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी एक हजार तक सीमित थी। पिछले एक सप्ताह से ठंड बढ़ी है और इसके चलते ओपीडी में भी करीब 30 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी हुई है। पिछले एक सप्ताह से ओपीडी 1300 तक पहुंच रही है। इस समय अगर सिविल अस्पताल की बात करें तो खांसी, जुकाम, बुखार के अलावा चर्म और श्वास रोग का उपचार करवाने प्रतिदिन करीब 400 मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं, दांतों और ईएनटी की ओपीडी भी इस समय बढ़ी हुई है।
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ईएनटी स्पेशलिस्ट न होने के चलते मरीजों को भिवानी सिविल अस्पताल जाकर उपचार करवाना पड़ रहा है। कमोबश यहीं स्थिति अल्ट्रासाउंड सुविधा की है। निशुल्क सेवा का लाभ उठाने के लिए मरीज रोहतक पीजीआई और भिवानी अस्पताल जाने को मजबूर हैं जबकि भागदौड़ से बचने के लिए काफी मरीज निजी केंद्रों पर जाकर अल्ट्रासाउंड करवा रहे हैं। सिविल अस्पताल में सरकारी अल्ट्रासाउंड सेवा न होने से मरीज निजी केंद्रों पर जाकर जेब ढीली करने को विवश हैं। मामला संज्ञान में होते हुए भी स्वास्थ्य विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
- एक लाख बच्चों पर नहीं एक भी बाल रोग विशेषज्ञ
जिले में बच्चों की संख्या करीब एक लाख है और बड़ी बात ये है कि जिले में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। लंबे इंतजार के बाद जिले में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई थी, लेकिन विशेषज्ञ का ट्रांसफर हो गया। इस समय जिले में बाल रोग विशेषज्ञ का पद खाली पड़ा है। वहीं, इस मौसम में बच्चे बीमारियों की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। ऐसे में परिजनों को निजी अस्पताल में जाकर बच्चों को उपचार करवाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
- इन विशेषज्ञों और सुविधाओं की भी खल रही कमी
दादरी जिले में इस समय फिजिशयन, ईएनटी स्पेशलिस्ट, अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट, एमडी मेडिसिन, जरनल सर्जन, मनोरोग विशेषज्ञ आदि नहीं हैं। लंबे समय से इनके पद खाली पड़े हैं। करीब 50 से अधिक बार डिमांड भेजने के बाद भी तैनाती नहीं हो पाई है। दादरी के जिला बनने के बाद से अल्ट्रासाउंड सेवा बंद है। वहीं, एमआरआई और सिटी स्कैन के मरीज भी भिवानी भेजे जा रहे हैं। ये दोनों सुविधाएं भी सिविल अस्पताल में नहीं हैं।
-जानिये... सालाना 48 हजार से अधिक मरीज किए गए रेफर
दादरी में विशेषज्ञों की कमी के चलते प्रतिदिन करीब 200 मरीजों को दूसरे जिलों के अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। एक माह में 20 कार्य दिवस लगाए तो एक माह में करीब चार हजार मरीजों को सिविल अस्पताल से रेफर किया जा रहा है। इस लिहाज से सालाना करीब 48 हजार मरीज रेफर किए जा रहे हैं।



विशेषज्ञों की तैनाती के लिए डिमांड मुख्यालय भेज चुके हैं। जल्द ही तैनाती होने की उम्मीद है। इस समय सामान्य बीमारियों से ग्रस्त मरीजों की संख्या बढ़ी हुई है और अस्पताल की दैनिक ओपीडी करीब 1300 है।
-डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग
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