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Charkhi Dadri News: शहर की जमाबंदी नौ माह में पूरी, 25 दिन में पोर्टल पर होगी अपलोड
Sun, 05 Apr 2026 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 05 Apr 2026 12:08 AM IST
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दादरी शहर की ड्रोन से ली गई तस्वीर।
चरखी दादरी। दादरी शहर की जमाबंदी को नौ माह से दुरुस्त करने में जुटे पटवारियों ने अपना काम पूरा कर दिया है। अब ऑपरेटर्स की दूसरी जगह ड्यूटी लगा दिए जाने की वजह से जमाबंदी पोर्टल पर अपलोड होने में करीब 25 दिन का समय लगेगा। चार साल बाद शहर की जमाबंदी दुरुस्त की जा रही है। जमाबंदी दुरुस्त करते समय चार हजार इंतकाल के मामले एवं त्रुटियां दूर की गई हैं। त्रुटियों की वजह से शहरवासियों को जमीन एवं मकान की खरीद-फरोख्त में दिक्कतें आ रही थी। पूरे शहर में 5600 खेवट धारक हैं।
बता दें कि गत जून माह से नई जमाबंदी तैयार करने का काम चल रहा है। बीते मानसून सीजन में जलभराव के चलते पटवारियों की फसल नुकसान का सत्यापन करने में ड्यूटी लग गई थी। इस वजह से करीब डेढ़ माह तक काम बाधित रहा। फिलहाल राजस्व विभाग ने पूरे शहर की जमीन के रिकार्ड को 15 जून 2025 से ऑफलाइन कर रखा है। इससे पहले सारी प्रक्रिया ऑनलाइन चल रही थी। अब कोई भी जमीन मालिक न तो अपना नाम परिवर्तन करवा सकता है और न ही जमीन का तबादला आदि कर सकता है। दाखिला खारिज का काम भी नहीं करवा सकता है। जमाबंदी में त्रुटियों की वजह से आए दिन लोगों को पटवारी व तहसीलदार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते रहे हैं।
वर्ष 2019 में जब से जमीन का रिकार्ड ऑनलाइन किया गया है तब से जिले में करीब साढ़े तीन हजार लोगों को अपनी जमीन की जमाबंदी में त्रुटियां ठीक करवानी पड़ी हैं। ऑनलाइन करते समय 2019 तक का पुराना ऑफलाइन रिकार्ड ही अपलोड कर दिया गया था। उसके बाद के रिकार्ड को अपडेट नहीं किया गया। जमाबंदी तैयार करते समय भी पुराना रिकार्ड उठा लिया गया था। इस वजह से जमाबंदी में हजारों त्रुटियां एवं खामियां रह गई थी। इन खामियों की वजह से किसी की जमीन का रकबा कम तो किसी का ज्यादा दिखाया जा रहा है। लोगों को आए दिन संशोधन यानी बदर लिखवाकर खामियों को दूर करवाना पड़ता था। पटवारी से बदर लिखवाने के लिए फीस भी वहन करनी पड़ती है। लोगों को आए दिन पटवारियों के चक्कर भी लगाने पड़े हैं। तहसीलदार के बदर पर हस्ताक्षर होते हैं तब जाकर जमाबंदी का रिकार्ड ठीक हो पाता है।
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प्रतिदिन करीब 25 प्लॉट एवं मकानों की रजिस्ट्री
तहसील कार्यालय में प्रतिदिन करीब 25 प्लॉट एवं मकानों की रजिस्ट्री होती हैं। रजिस्ट्री बनवाने से पहले जमीन का पूरा रिकार्ड तैयार करवाना होता है। ऐसे में रकबा कम या ज्यादा मिलने पर उसे ठीक करवाना पड़ता है। काफी संख्या में तो ऐसे मामले हैं जो वास्तविक मालिक होते हुए भी राजस्व विभाग के रिकार्ड में नहीं हैं।
जमाबंदी में खामियों के चलते विभाग व प्रशासन भी तंग आ चुका था
लोगों को किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जमीन की रजिस्ट्री बनवाने व खरीद-फरोख्त में बेहद कठिनाइयां आती रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऋण आदि के लिए जमाबंदी का होना जरूरी है। जमाबंदी में खामियों के चलते विभाग व प्रशासन भी तंग आ चुका था क्योंकि ऑनलाइन रिकार्ड में डाटा फीड करने में दिक्कतें आती हैं। जिले में करीब 12 ऐसे गांव हैं जिनमें आजादी के दशक के बाद से ही चकबंदी ही नहीं हुई है। पुराना रिकार्ड उर्दू में होने की वजह से नए पटवारी व गिरदावर को भी इसे समझने में दिक्कतें आ रही हैं।
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए जमाबंदी दस्तावेज जरूरी
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए उम्मीदवार को दस्तावेज के रूप में मकान या प्लॉट की रजिस्ट्री, इंतकाल व जमाबंदी भी जमा करवानी होती है। नगर परिषद से मकान के ऋण व अन्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए जमाबंदी की फर्द अवश्य जमा करवानी होती है तब जाकर उसे इन सुविधाओं का लाभ मिल पाता है। अब 25 दिन और नई जमाबंदी के लिए इंतजार करना होगा। उसके बाद ही इसे ऑनलाइन किया जाएगा।
25 दिन में जमाबंदी को ऑनलाइन कर दिया जाएगा। पटवारियों की तरफ से काम पूरा हो चुका है। दुरुस्त किए रिकार्ड की एक बार दोबारा जांच की जाएगी। बाद में ऑपरेटर्स जमाबंदी को ऑनलाइन करेंगे।
-राजेश कुमार, सदर कानूनगो, राजस्व विभाग, दादरी।
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बता दें कि गत जून माह से नई जमाबंदी तैयार करने का काम चल रहा है। बीते मानसून सीजन में जलभराव के चलते पटवारियों की फसल नुकसान का सत्यापन करने में ड्यूटी लग गई थी। इस वजह से करीब डेढ़ माह तक काम बाधित रहा। फिलहाल राजस्व विभाग ने पूरे शहर की जमीन के रिकार्ड को 15 जून 2025 से ऑफलाइन कर रखा है। इससे पहले सारी प्रक्रिया ऑनलाइन चल रही थी। अब कोई भी जमीन मालिक न तो अपना नाम परिवर्तन करवा सकता है और न ही जमीन का तबादला आदि कर सकता है। दाखिला खारिज का काम भी नहीं करवा सकता है। जमाबंदी में त्रुटियों की वजह से आए दिन लोगों को पटवारी व तहसीलदार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते रहे हैं।
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वर्ष 2019 में जब से जमीन का रिकार्ड ऑनलाइन किया गया है तब से जिले में करीब साढ़े तीन हजार लोगों को अपनी जमीन की जमाबंदी में त्रुटियां ठीक करवानी पड़ी हैं। ऑनलाइन करते समय 2019 तक का पुराना ऑफलाइन रिकार्ड ही अपलोड कर दिया गया था। उसके बाद के रिकार्ड को अपडेट नहीं किया गया। जमाबंदी तैयार करते समय भी पुराना रिकार्ड उठा लिया गया था। इस वजह से जमाबंदी में हजारों त्रुटियां एवं खामियां रह गई थी। इन खामियों की वजह से किसी की जमीन का रकबा कम तो किसी का ज्यादा दिखाया जा रहा है। लोगों को आए दिन संशोधन यानी बदर लिखवाकर खामियों को दूर करवाना पड़ता था। पटवारी से बदर लिखवाने के लिए फीस भी वहन करनी पड़ती है। लोगों को आए दिन पटवारियों के चक्कर भी लगाने पड़े हैं। तहसीलदार के बदर पर हस्ताक्षर होते हैं तब जाकर जमाबंदी का रिकार्ड ठीक हो पाता है।
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प्रतिदिन करीब 25 प्लॉट एवं मकानों की रजिस्ट्री
तहसील कार्यालय में प्रतिदिन करीब 25 प्लॉट एवं मकानों की रजिस्ट्री होती हैं। रजिस्ट्री बनवाने से पहले जमीन का पूरा रिकार्ड तैयार करवाना होता है। ऐसे में रकबा कम या ज्यादा मिलने पर उसे ठीक करवाना पड़ता है। काफी संख्या में तो ऐसे मामले हैं जो वास्तविक मालिक होते हुए भी राजस्व विभाग के रिकार्ड में नहीं हैं।
जमाबंदी में खामियों के चलते विभाग व प्रशासन भी तंग आ चुका था
लोगों को किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जमीन की रजिस्ट्री बनवाने व खरीद-फरोख्त में बेहद कठिनाइयां आती रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऋण आदि के लिए जमाबंदी का होना जरूरी है। जमाबंदी में खामियों के चलते विभाग व प्रशासन भी तंग आ चुका था क्योंकि ऑनलाइन रिकार्ड में डाटा फीड करने में दिक्कतें आती हैं। जिले में करीब 12 ऐसे गांव हैं जिनमें आजादी के दशक के बाद से ही चकबंदी ही नहीं हुई है। पुराना रिकार्ड उर्दू में होने की वजह से नए पटवारी व गिरदावर को भी इसे समझने में दिक्कतें आ रही हैं।
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए जमाबंदी दस्तावेज जरूरी
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए उम्मीदवार को दस्तावेज के रूप में मकान या प्लॉट की रजिस्ट्री, इंतकाल व जमाबंदी भी जमा करवानी होती है। नगर परिषद से मकान के ऋण व अन्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए जमाबंदी की फर्द अवश्य जमा करवानी होती है तब जाकर उसे इन सुविधाओं का लाभ मिल पाता है। अब 25 दिन और नई जमाबंदी के लिए इंतजार करना होगा। उसके बाद ही इसे ऑनलाइन किया जाएगा।
25 दिन में जमाबंदी को ऑनलाइन कर दिया जाएगा। पटवारियों की तरफ से काम पूरा हो चुका है। दुरुस्त किए रिकार्ड की एक बार दोबारा जांच की जाएगी। बाद में ऑपरेटर्स जमाबंदी को ऑनलाइन करेंगे।
-राजेश कुमार, सदर कानूनगो, राजस्व विभाग, दादरी।