{"_id":"62c1df89852930064919ec55","slug":"chetan-adopted-yoga-to-stay-healthy-after-mastering-it-he-has-made-a-national-identity-charkhidadri-news-hsr635774950","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वस्थ रहने के लिए चेतन ने अपनाया योग, महारत हासिल कर राष्ट्रीय स्तर पर बना चुके पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वस्थ रहने के लिए चेतन ने अपनाया योग, महारत हासिल कर राष्ट्रीय स्तर पर बना चुके पहचान
विज्ञापन
चरखी दादरी। योग आज केवल स्वस्थ रहने का जरिया नहीं है, बल्कि इसकी जरिये अपनी पहचान भी बनाई जा सकती है। मूल रूप से झज्जर जिले के गांव लोहारी निवासी एवं दादरी के हिंदी संस्कृत महाविद्यालय के गुरुकुल के छात्र चेतन ने इस बात को प्रमाणित किया है। चेतन अपनी योग कला के जरिये राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं। अब तक वो राष्ट्रीय स्तर की तीन स्पर्धाओं में भाग ले चुके हैं और 2018 में तमिलनाडु में आयोजित सीनियर नेशनल योग स्पर्धा के वो रजत पदक विजेता रहे।
संवाददाता से बातचीत में चेतन आर्यन ने बताया कि वह मूल रूप से झज्जर जिले का निवासी है। छठीं कक्षा के बाद उसने गुरुकुल में दाखिला लिया था। गुरुकुल में एक खेल चुनना अनिवार्य था और उसने स्वस्थ रहने के उद्देश्य से योग को चुन लिया। योग सीखते हुए उनकी योग में दिलचस्पी इतनी बढ़ गई कि वो योग के बारे में गहराई से जानकारी जुटाने लगा। योग के गुर सीखने के बाद आचार्य प्रवीन की प्रेरणा से वो राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में सहभागिता निभाकर योग कला का प्रदर्शन करने लगा। 2018 में इसका सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद उसकी दिलचस्पी और बढ़ गई। चेतन आर्यन का कहना है कि वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग में छाप छोड़ना चाहता है।
योग शिक्षक बनना चाहता है चेतन -
चेतन ने बताया कि एक पड़ाव के बाद शरीर में लचीलापन कम होता जाता है। इसके बाद शरीर नेशनल या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभागिता करने में दिक्कतें आती है। उसका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम चमकाने के साथ योग शिक्षक बनना है। इसके जरिये वो योग का प्रचार करना चाहता है।
विज्ञापन
दस साल की उम्र से शुरू किया सीखना -
चेतन ने बताया कि वो तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा है। उनके पिता सुरेंद्र किसान हैं और उनकी मां सोनिया गृहिणी है। दस साल की उम्र से उसने योग को सीखना शुरू किया। पिछले दस साल में उसने आचार्य प्रवीन से काफी कुछ सीखने को मिला है।
विज्ञापन
संवाददाता से बातचीत में चेतन आर्यन ने बताया कि वह मूल रूप से झज्जर जिले का निवासी है। छठीं कक्षा के बाद उसने गुरुकुल में दाखिला लिया था। गुरुकुल में एक खेल चुनना अनिवार्य था और उसने स्वस्थ रहने के उद्देश्य से योग को चुन लिया। योग सीखते हुए उनकी योग में दिलचस्पी इतनी बढ़ गई कि वो योग के बारे में गहराई से जानकारी जुटाने लगा। योग के गुर सीखने के बाद आचार्य प्रवीन की प्रेरणा से वो राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में सहभागिता निभाकर योग कला का प्रदर्शन करने लगा। 2018 में इसका सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद उसकी दिलचस्पी और बढ़ गई। चेतन आर्यन का कहना है कि वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग में छाप छोड़ना चाहता है।
विज्ञापन
योग शिक्षक बनना चाहता है चेतन -
चेतन ने बताया कि एक पड़ाव के बाद शरीर में लचीलापन कम होता जाता है। इसके बाद शरीर नेशनल या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभागिता करने में दिक्कतें आती है। उसका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम चमकाने के साथ योग शिक्षक बनना है। इसके जरिये वो योग का प्रचार करना चाहता है।
विज्ञापन
दस साल की उम्र से शुरू किया सीखना -
चेतन ने बताया कि वो तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा है। उनके पिता सुरेंद्र किसान हैं और उनकी मां सोनिया गृहिणी है। दस साल की उम्र से उसने योग को सीखना शुरू किया। पिछले दस साल में उसने आचार्य प्रवीन से काफी कुछ सीखने को मिला है।