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Charkhi Dadri News: नहरों में छोड़ा जा रहा रसायनयुक्त और दूषित पानी, उपायुक्त से मिले अधिवक्ता

Sat, 03 May 2025 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sat, 03 May 2025 11:45 PM IST
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Chemical and contaminated water is being released into the canals, advocates met the Deputy Commissioner
उपायुक्त मुनीश शर्मा से मुलाकात करते हुए अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल।
चरखी दादरी। जिले में नहरों में रसायन युक्त और जोहड़ों में गंदे पानी को डालने की समस्या गंभीर रूप धारण कर चुकी है। इस मुद्दे को लेकर दादरी के अधिवक्ताओं ने संजीव तक्षक की अगुवाई में उपायुक्त दादरी से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा।
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ज्ञापन की एक प्रति मानव अधिकार आयोग, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्य सचिव हरियाणा सरकार को उपायुक्त के माध्यम से प्रेषित की है। अधिवक्ताओं ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया है कि चरखी दादरी जिले में लोहारू फीडर और बधवाना माइनर दो महत्वपूर्ण नहरें हैं, जो चरखी दादरी जिले में कई गांवों और दादरी शहर की पेयजल आपूर्ति का मुख्य स्रोत हैं। इन नहरों का पानी जनस्वास्थ्य विभाग के माध्यम से जलघरों तक पहुंचता है। वहां से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति होती है।
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संजीव तक्षक व अन्य अधिवक्ताओं ने शिकायत में बताया कि नहरों में गंदा पानी डालने से पानी में रसायन, जहरीली दवाओं के अंश, साबुन-सर्फ, और अन्य दूषित पदार्थ मिल जाते हैं। यह पानी न केवल पीने के लिए, बल्कि, दैनिक कार्यों जैसे नहाने, कपड़े धोने, और पशुओं को पानी पिलाने के लिए भी उपयोग हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप कैंसर, त्वचा रोग, दमा, और टीबी जैसी जानलेवा बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। ये धीरे-धीरे इंसान और जीवों के लिए मौत का कारण बन रही हैं। ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में कालीमरण, प्रवीण तक्षक, प्रशांत, विकास महला, रविंद्र सांगवान, अमित गांधी व सक्षम आदि अधिवक्ता शामिल रहे।
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विभागों पर लापरवाही का आरोप
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि जनस्वास्थ्य विभाग, सिंचाई विभाग और बिजली विभाग की लापरवाही के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने बताया कि पाइपलाइन दबाकर व बिजली विभाग ने 11000 वॉल्ट की लाइन बिछाकर जहरीले व रासायनिक पानी को दोनों नहरों में डालने का काम कर रहे हैं, जो जिले के लोगों के जीवन के लिए बहुत अधिक खतरनाक साबित होगा। इस प्रकार करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद इन विभागों ने जहरीले पानी की निकासी के लिए कोई स्थायी समाधान नहीं किया है।
प्रशासन से की हस्तक्षेप की मांग
अधिवक्ताओं ने प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप करने और नहरों में जहरीला पानी डालने पर रोक लगाने की मांग। इसके साथ ही जल को शुद्ध करने और दूषित पानी की निकासी के लिए स्थायी व प्रभावी समाधान करने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि अगर इस समस्या का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो यह जिले के निवासियों और पशु-जीवों के लिए भारी खतरा बन सकता है।
सिविल कोर्ट में याचिका दायर करने की दी चेतावनी
अधिवक्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि वे अनेक बार प्रशासन से इस विषय के समाधान के लिए गुहार लगा चुके हैं, लेकिन, संज्ञान नहीं लिया गया। अगर इस बार कोई संज्ञान नहीं लिया जाता है तो वे सिविल कोर्ट का रुख अपनाएंगे और अगर उच्च न्यायालय में भी जाना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे।


उपायुक्त ने बुलाए दोनों एक्सईएन
उपायुक्त से अधिवक्ताओं की करीब 2 घंटे वार्तालाप चली। उपायुक्त ने सिंचाई विभाग और जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन को कार्यालय में बुलाया और जिले से एक ड्रेन के निर्माण के लिए तुरंत प्रस्ताव तैयार करवाने के आदेश दिए।
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