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Charkhi Dadri News: नहीं रहे चौधरी बंसीलाल के बुलडोजर सतपाल

Tue, 04 Mar 2025 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Tue, 04 Mar 2025 12:37 AM IST
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Chaudhary Bansi Lal's bulldozer Satpal is no more
पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान।
चरखी दादरी। प्रदेश के पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान ( 85) ने गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में रविवार शाम को अंतिम सांस ली। लंबे समय से वह बीमार चल रहे थे। शाम को पैतृक गांव चंदेनी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे एवं दादरी विधायक सुनील सांगवान ने उन्हें मुखाग्नि दी। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत चौधरी बंसीलाल के करीबी नेताओं में सतपाल सांगवान शुमार थे। मजबूत कद-काठी के होने के कारण बंसीलाल उन्हें प्यार से बुलडोजर के नाम से पुकारते थे।
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प्रदेश के पूर्व मंत्री का पार्थिव शरीर गुरुग्राम से दादरी के लोहारू रोड स्थित आवास पर रविवार की रात लाया गया। सोमवार सुबह उनके समर्थकों ने शव के अंतिम दर्शन कर पुष्पांजलि अर्पित की। दोपहर करीब 3 बजे दादरी से उनकी अंतिम यात्रा पैतृक गांव चंदेनी के लिए रवाना हुई। शाम को गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया। दादरी से भाजपा विधायक सुनील सांगवान ने पिता के शव को मुखाग्नि दी।
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बंसीलाल के भक्त थे सतपाल, उनके कहने पर ही नौकरी छोड़कर आए थे राजनीति में
सतपाल सांगवान पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल के भक्त थे। चौधरी बंसीलाल उनकी ईमानदारी और स्पष्टवादिता से बहुत प्रसन्न थे। उन्होंने ही सतपाल सांगवान का राजनीति में पदार्पण कराया था। राजनीति में आने से पहले सतपाल सांगवान दूरसंचार विभाग में एसडीओ थे। चौधरी बंसीलाल ने उनको फोन कर कहा कि वे कल रोहतक आ रहे हैं और वहां अपनी गाड़ी से चले आना। वहां मिले तो उन्होंने कहा कि अभी अपने पद से इस्तीफा दे दो। तुमको राजनीति में लाना है। चौधरी बंसीलाल के कहने पर उन्होंने रोहतक में ही ऑफिस में जाकर इस्तीफा लिख दिया था और वीआरएस लेकर वर्ष 1996 में विधानसभा चुनाव लड़ा था। 33,690 वोट लेकर वह विजेता बने थे। इसके बाद वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में वह तीसरे स्थान पर रहे। वर्ष 2005 में 27,874 वोट लेकर वह उपविजेता बने। बंसीलाल उनकी कद-काठी के कारण उनको बुलडोजर कहा करते थे।
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बेटे को सौंप गए राजनीतिक विरासत

सतपाल सांगवान के परिवार का सातवां चुनाव उनके इकलौते बेटे सुनील सांगवान ने लड़ा। वर्ष 2024 के चुनाव में जीत हासिल कर सुनील सांगवान ने तीन योजना बाद परिवार की सत्ता में वापसी कराई। राजनीति में आने से पहले सुनील सांगवान जेल अधीक्षक थे। पिता की तरह वह भी नौकरी से वीआरएस लेकर राजनीति में आए। उन्होंने अपना पहला ही चुनाव जीत लिया। सतपाल सांगवान की राजनीतिक विरासत को अब बेटा विधायक सुनील सांगवान आगे बढ़ाएंगे। हालांकि, वह अभी तक बड़ी बहन को खोने के गम से नहीं उभर पाए थे। अब पिता का साथ भी छूट गया।
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