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Charkhi Dadri News: 63 साल बाद भी जारी है भूखों को भोजन देने की मुहिम...
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फोटो 21 ट्रेन में यात्री को खाना वितरित करते हुए। संवाद
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। मैं अकेला ही चला था-जानिब -ए- मंजिल, मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया। मानो शायर की ये पंक्तियां स्वर्गीय लाला फकीरचंद के लिए ही बनी हो। 1960 में लाला फकीरचंद ने रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन निशुल्क खाना वितरण की जो मुहिम शुरू की थी, उसे 63 साल बाद भी रामा सेवा दल जारी रखे हुए है। दोनों समय अब भी रेलवे स्टेशन पर यात्रियों और भिखारियों को खाना खिलाया जाता है।
दरअसल, लाला फकीरचंद ने 1960 में दादरी रेलवे स्टेशन पर निशुल्क खाना वितरण सेवा शुरू की थी। इसके साथ ही दादरी देश का पहला ऐसा स्टेशन बना जहां निशुल्क खाना की व्यवस्था हो। शुरुआत में दो किलोग्राम आटे की रोटियां तैयार कर वितरित की जाती थी और अब यह मात्रा 60 किलोग्राम तक पहुंच चुकी है। यह मुहिम लाला फकीरचंद ने अकेले शुरू की थी और 38 साल तक इसे जारी रखा। 1998 में लाला फकीरचंद की मौत होने के बाद शहर के कई लोग इसे निरंतर जारी रखे हुए हैं। लाल फकीरचंद का सपना था कि शहर में कोई भूखा ने सोए, जिसे अब तक जनसहयोग से साकार किया जा रहा है।
भोजन तैयार करने के लिए लगा रखे हैं 5 कर्मचारी : विनोद
रामा सेवा दल प्रधान विनोद कुमार ने बताया कि संस्था ने यात्रियों के भोजन बनाने के लिए पांच कर्मचारी लगाए हुए हैं। इन कर्मचारियों के साथ सेवा दल के सदस्य सुबह चार बजे से खाना तैयार करने में जुट जाते है। सुबह साढ़े दस बजे से डेढ़ बजे तक गाड़ी में बैठे व आने वाले यात्रियों को निशुल्क रोटी व सब्जी वितरित करते है। उन्होंने बताया कि सुबह और सायं दोनों समय उनका दल 60 किलो आटे की रोटियां बनाकर लोगों को खिलाता है।
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रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी जुड़े मुहिम से
रामा सेवा दल के सदस्य सीताराम ने बताया कि उनकी रिटायरमेंट बिजली विभाग से वर्ष 2011 में हुई थी। उसके बाद से सेवा दल की भावना को देखते हुए वो भी सेवा में लग गए। वहीं, रिटायर्ड कर्मचारी मोहनलाल भी निस्वार्थ भावना से सुबह सायं रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को खाना खिलाने में लगे रहते हैं।
दुकानदार भी करते हैं सहयोग
संगठन के वरिष्ठ उप-प्रधान ओमप्रकाश ने बताया कि शहर के कई दुकानदार भी इस नेक काम में सहयोग करते हैं। सुबह और शाम के समय वो दुकान छोड़कर खाना बनवाने और वितरण में सहयोग करते हैं। उनका कहना है कि संगठन सदस्य छह सवारी ट्रेनों के यात्रियों को भोजन मुहैया कराते हैं।
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दरअसल, लाला फकीरचंद ने 1960 में दादरी रेलवे स्टेशन पर निशुल्क खाना वितरण सेवा शुरू की थी। इसके साथ ही दादरी देश का पहला ऐसा स्टेशन बना जहां निशुल्क खाना की व्यवस्था हो। शुरुआत में दो किलोग्राम आटे की रोटियां तैयार कर वितरित की जाती थी और अब यह मात्रा 60 किलोग्राम तक पहुंच चुकी है। यह मुहिम लाला फकीरचंद ने अकेले शुरू की थी और 38 साल तक इसे जारी रखा। 1998 में लाला फकीरचंद की मौत होने के बाद शहर के कई लोग इसे निरंतर जारी रखे हुए हैं। लाल फकीरचंद का सपना था कि शहर में कोई भूखा ने सोए, जिसे अब तक जनसहयोग से साकार किया जा रहा है।
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भोजन तैयार करने के लिए लगा रखे हैं 5 कर्मचारी : विनोद
रामा सेवा दल प्रधान विनोद कुमार ने बताया कि संस्था ने यात्रियों के भोजन बनाने के लिए पांच कर्मचारी लगाए हुए हैं। इन कर्मचारियों के साथ सेवा दल के सदस्य सुबह चार बजे से खाना तैयार करने में जुट जाते है। सुबह साढ़े दस बजे से डेढ़ बजे तक गाड़ी में बैठे व आने वाले यात्रियों को निशुल्क रोटी व सब्जी वितरित करते है। उन्होंने बताया कि सुबह और सायं दोनों समय उनका दल 60 किलो आटे की रोटियां बनाकर लोगों को खिलाता है।
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रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी जुड़े मुहिम से
रामा सेवा दल के सदस्य सीताराम ने बताया कि उनकी रिटायरमेंट बिजली विभाग से वर्ष 2011 में हुई थी। उसके बाद से सेवा दल की भावना को देखते हुए वो भी सेवा में लग गए। वहीं, रिटायर्ड कर्मचारी मोहनलाल भी निस्वार्थ भावना से सुबह सायं रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को खाना खिलाने में लगे रहते हैं।
दुकानदार भी करते हैं सहयोग
संगठन के वरिष्ठ उप-प्रधान ओमप्रकाश ने बताया कि शहर के कई दुकानदार भी इस नेक काम में सहयोग करते हैं। सुबह और शाम के समय वो दुकान छोड़कर खाना बनवाने और वितरण में सहयोग करते हैं। उनका कहना है कि संगठन सदस्य छह सवारी ट्रेनों के यात्रियों को भोजन मुहैया कराते हैं।