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Charkhi Dadri News: किराये के भवनों में चल रहे सरकारी कार्यालय, लोगों के ढूंढने में छूट रहे पसीने....
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फोटो 20 पुराना झज्जर रोड स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय।
- फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। चरखी दादरी को जिला बने 6 साल का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को दूर नहीं कर पाई है। जिला बनने के बाद से ही आधा दर्जन सरकारी विभागों के कार्यालय अलग-अलग जगहों पर सरकारी और किराये के भवनों में चल रहे हैं। हालांकि करीब 13 माह पहले लघु सचिवालय निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, लेकिन चार मंजिला भवन बनने में अभी इतना ही समय और लग सकता है। लघु सचिवालय का निर्माण होने के बाद ही सभी विभागों की सुविधा जिलावासियों को एक छत के नीचे मिल पाएगी।
सितंबर 2016 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दादरी को प्रदेश का 22वां जिला घोषित किया था जबकि इसकी अधिसूचना करीब तीन माह बाद जारी किया गया था। इसके अलावा उन्होंने तेजी से जिला मुख्यालय की भांति इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करवाने की घोषणा की थी। करीब एक साल तक कोई परियोजना तक तैयार नहीं की गई। लघु सचिवालय निर्माण को जिला प्रशासन ने प्राथमिकता माना और इसके तहत चार अलग-अलग जगहों के प्रस्ताव सरकार को भेजे गए थे।
गत विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सीएम ने हुडा सेक्टर-10 की जगह को लघु सचिवालय और कोर्ट परिसर निर्माण के लिए फाइनल करने की घोषणा की थी। इसके बाद जमीन को हुडा से राजस्व विभाग को ट्रांसफर करवाने की प्रक्रिया शुरू की गई। करीब 100 करोड़ रुपये सरकार ने जमीन ट्रांसफर की एवज में राजस्व विभाग को दिए थे। इसके बाद करीब 13 माह पहले ही लघु सचिवालय निर्माण कार्य शुरू हुआ। अब तक यह कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के चलते आलम यह है कि किराये के भवन लेकर सरकारी दफ्तर चलाए जा रहे हैं और कई दफ्तरों के बीच की दूरी तो आठ से दस किलोमीटर है, जिसके चलते लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। इस समय महिला एवं बाल विकास विभाग के दो कार्यालय अलग-अलग भवनों में चल रहे हैं और इनके बीच करीब तीन किलोमीटर का फासला है।
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तीन साल में तीन बार बदला आरटीए कार्यालय
जिला प्रशासन के पास विभागों के दफ्तरों के लिए जगह का अभाव है। आरटीए कार्यालय पिछले तीन साल में तीन बार बदला जा चुका है। पहले आरटीए कार्यालय मेजबान चौक के समीप एक किराये के भवन में शुरू किया गया, तो इसके बाद इसे रावलधी-दिल्ली बाईपास स्थित एक किराये के भवन में शिफ्ट किया गया। अब पिछले कुछ माह से यह कार्यालय लोहारू रोड पर चल रहा है।
पटवारियों को ढूंढने में लग जाता है काफी समय
जिले की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि पटवारी एक जगह नहीं बैठते। पटवारियों के दफ्तर शहर में अलग-अलग जगहों पर हैं और लोग अपने कामकाज करवाने के लिए दफ्तर ढूंढते रहते हैं। कई दफ्तर तो तंग गलियों में चल रहे हैं, जहां लोगों का पहुंच पाना चुनौतीपूर्ण रहता है। लोगों को पटवारी ढूंढने में कई घंटे लग जाते हैं।
एक कमरे में चल रही जिला लाइब्रेरी
जिला मुख्यालय पर आधुनिक लाइब्रेरी खुलनी प्रस्तावित है, लेकिन यह परियोजना भी पिछले तीन साल से ठंडे बस्ते में है। इस समय पंचायत विभाग कार्यालय के एक कमरे में लाइब्रेरी चल रही है। यहां काफी कम पाठक बैठ पाते हैं। नई लाइब्रेरी में 150 से अधिक लोगों के एकसाथ बैठने की व्यवस्था की जानी है।
शहर से चार किलोमीटर दूर है डीईओ और डीएसओ दफ्तर
किसानों के बच्चों के लिए बनाया किसान मॉडल स्कूल के भवन में जिला प्रशासन ने सरकारी दफ्तर बनाए हुए हैं। किसान मॉडल स्कूल में कक्षाएं शुरू नहीं हो पाईं। इस समय आधा दर्जन विभागों के दफ्तर यहां चल रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी या जिला खेल विभाग के दफ्तर पहुंचने के लिए लोगों को आने-जाने में आठ किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
विधायक बोले
सरकार जिले के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। जिला स्तरीय लघु सचिवालय का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। पूरा प्रयास करूंगा कि इंफ्रास्ट्रक्चर की जो कमी है उसे दूर कराया जाए। जरूरत पड़ी तो इसके लिए जल्द ही सीएम से भी मिलूंगा।
-सोमबीर सांगवान, विधायक, दादरी
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सितंबर 2016 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दादरी को प्रदेश का 22वां जिला घोषित किया था जबकि इसकी अधिसूचना करीब तीन माह बाद जारी किया गया था। इसके अलावा उन्होंने तेजी से जिला मुख्यालय की भांति इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करवाने की घोषणा की थी। करीब एक साल तक कोई परियोजना तक तैयार नहीं की गई। लघु सचिवालय निर्माण को जिला प्रशासन ने प्राथमिकता माना और इसके तहत चार अलग-अलग जगहों के प्रस्ताव सरकार को भेजे गए थे।
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गत विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सीएम ने हुडा सेक्टर-10 की जगह को लघु सचिवालय और कोर्ट परिसर निर्माण के लिए फाइनल करने की घोषणा की थी। इसके बाद जमीन को हुडा से राजस्व विभाग को ट्रांसफर करवाने की प्रक्रिया शुरू की गई। करीब 100 करोड़ रुपये सरकार ने जमीन ट्रांसफर की एवज में राजस्व विभाग को दिए थे। इसके बाद करीब 13 माह पहले ही लघु सचिवालय निर्माण कार्य शुरू हुआ। अब तक यह कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के चलते आलम यह है कि किराये के भवन लेकर सरकारी दफ्तर चलाए जा रहे हैं और कई दफ्तरों के बीच की दूरी तो आठ से दस किलोमीटर है, जिसके चलते लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। इस समय महिला एवं बाल विकास विभाग के दो कार्यालय अलग-अलग भवनों में चल रहे हैं और इनके बीच करीब तीन किलोमीटर का फासला है।
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तीन साल में तीन बार बदला आरटीए कार्यालय
जिला प्रशासन के पास विभागों के दफ्तरों के लिए जगह का अभाव है। आरटीए कार्यालय पिछले तीन साल में तीन बार बदला जा चुका है। पहले आरटीए कार्यालय मेजबान चौक के समीप एक किराये के भवन में शुरू किया गया, तो इसके बाद इसे रावलधी-दिल्ली बाईपास स्थित एक किराये के भवन में शिफ्ट किया गया। अब पिछले कुछ माह से यह कार्यालय लोहारू रोड पर चल रहा है।
पटवारियों को ढूंढने में लग जाता है काफी समय
जिले की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि पटवारी एक जगह नहीं बैठते। पटवारियों के दफ्तर शहर में अलग-अलग जगहों पर हैं और लोग अपने कामकाज करवाने के लिए दफ्तर ढूंढते रहते हैं। कई दफ्तर तो तंग गलियों में चल रहे हैं, जहां लोगों का पहुंच पाना चुनौतीपूर्ण रहता है। लोगों को पटवारी ढूंढने में कई घंटे लग जाते हैं।
एक कमरे में चल रही जिला लाइब्रेरी
जिला मुख्यालय पर आधुनिक लाइब्रेरी खुलनी प्रस्तावित है, लेकिन यह परियोजना भी पिछले तीन साल से ठंडे बस्ते में है। इस समय पंचायत विभाग कार्यालय के एक कमरे में लाइब्रेरी चल रही है। यहां काफी कम पाठक बैठ पाते हैं। नई लाइब्रेरी में 150 से अधिक लोगों के एकसाथ बैठने की व्यवस्था की जानी है।
शहर से चार किलोमीटर दूर है डीईओ और डीएसओ दफ्तर
किसानों के बच्चों के लिए बनाया किसान मॉडल स्कूल के भवन में जिला प्रशासन ने सरकारी दफ्तर बनाए हुए हैं। किसान मॉडल स्कूल में कक्षाएं शुरू नहीं हो पाईं। इस समय आधा दर्जन विभागों के दफ्तर यहां चल रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी या जिला खेल विभाग के दफ्तर पहुंचने के लिए लोगों को आने-जाने में आठ किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
विधायक बोले
सरकार जिले के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। जिला स्तरीय लघु सचिवालय का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। पूरा प्रयास करूंगा कि इंफ्रास्ट्रक्चर की जो कमी है उसे दूर कराया जाए। जरूरत पड़ी तो इसके लिए जल्द ही सीएम से भी मिलूंगा।
-सोमबीर सांगवान, विधायक, दादरी