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चरखी दादरी : जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बीमार, सात साल से विशेषज्ञों का इंतजार
Sun, 07 Apr 2024 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 07 Apr 2024 01:01 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। दादरी को जिला बने सवा सात साल पूरे हो चुके हैं। इस समय अवधि में भी विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं हो पाई है। इसका सीधे तौर पर असर जिला मुख्यालय स्थित सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। सिविल अस्पताल उपमंडल अस्पताल की तर्ज पर चल रहा है, जबकि तीनों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक्स-रे सुविधा तक नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाएं लाचार हैं।
विश्व स्वास्थ्य दिवस पर संवाददाता ने सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं की नब्ज टटोली तो सामने आया कि चरखी दादरी जब उपमंडल था तो यहां अल्ट्रासाउंड सुविधा थी, लेकिन जिला बनने के कुछ समय बाद ही यह सेवा बंद हो गई। आलम यह है कि यह सुविधा पिछले करीब 6 सालों से बंद पड़ी है। सिविल अस्पताल से मरीजों को रेफर कर काम चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लंबा समय बीतने के बाद भी अल्ट्रासाउंड सुविधा को बहाल नहीं करवा पाए हैं। इस समय सिविल अस्पताल को अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट समेत नई अल्ट्रासाउंड मशीन की भी दरकार है।
संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि जिले में विशेषज्ञों की भारी कमी बनी है। ऐसे में सिविल अस्पताल रेफर केंद्र बनकर रह गया है। सिविल अस्पताल पर जिले की साढ़े 5 लाख की आबादी निर्भर है।
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मजबूरीवश मरीज दूसरे जिलों के अस्पतालों की खाक छानने को विवश हैं।
जिले में नहीं हैं ये विशेषज्ञ
सिविल अस्पताल में फिजिशियन, बाल रोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ, अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट, जनरल सर्जन, एमडी मेडिसिन नहीं हैं। इसके अलावा यहां रेडियोग्राफर, रेडियोलॉजिस्ट, गाइनी आदि की कमी भी खल रही है।
इन सुविधाओं का टोटा
1- अल्ट्रासाउंड- सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन एक कमरे में धूल फांक रही है। यहां अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट नहीं है। गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड के लिए स्वास्थ्य विभाग निजी केंद्रों पर निर्भर है, जबकि पुरुष मरीजों को भिवानी या रोहतक पीजीआई रेफर किया जा रहा है।
2- एमआरआई व सीटी स्कैन : जिले बनने के 6 साल बाद भी सिविल अस्पताल में एमआरआई और सीटी स्कैन की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। हर माह करीब 200 मरीजों को भिवानी सिविल अस्पताल रेफर किया जा रहा है।
3- जगह की कमी : सिविल अस्पताल में सुविधाओं का दायरा बढ़ाने के लिए जगह की कमी भी बनी हुई है। यहां अभी कई विशेष वार्ड बनने हैं, लेकिन इसके लिए जगह नहीं है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कोर्ट केस के चलते सिविल अस्पताल परिसर में नया भवन नहीं बनाया जा सकता।
स्वास्थ्य केंद्रों व ओपीडी की स्थिति
स्वास्थ्य केंद्र- संख्या- दैनिक ओपीडी
सिविल अस्पताल- 1-1200 से 1400
मातृ-शिशु अस्पताल-1- 150
सीएचसी - 3- 70 से 90
पीएचसी-12- 30 से 35
अल्ट्रासाउंड सुविधा समेत विशेषज्ञों की मांग पहले ही मुख्यालय भेजी जा चुकी है। जिले में इनकी तैनाती होते ही मरीजों के लिए सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी। - डॉ. गौरव भारद्वाज, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी
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चरखी दादरी। दादरी को जिला बने सवा सात साल पूरे हो चुके हैं। इस समय अवधि में भी विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं हो पाई है। इसका सीधे तौर पर असर जिला मुख्यालय स्थित सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। सिविल अस्पताल उपमंडल अस्पताल की तर्ज पर चल रहा है, जबकि तीनों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक्स-रे सुविधा तक नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाएं लाचार हैं।
विश्व स्वास्थ्य दिवस पर संवाददाता ने सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं की नब्ज टटोली तो सामने आया कि चरखी दादरी जब उपमंडल था तो यहां अल्ट्रासाउंड सुविधा थी, लेकिन जिला बनने के कुछ समय बाद ही यह सेवा बंद हो गई। आलम यह है कि यह सुविधा पिछले करीब 6 सालों से बंद पड़ी है। सिविल अस्पताल से मरीजों को रेफर कर काम चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लंबा समय बीतने के बाद भी अल्ट्रासाउंड सुविधा को बहाल नहीं करवा पाए हैं। इस समय सिविल अस्पताल को अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट समेत नई अल्ट्रासाउंड मशीन की भी दरकार है।
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संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि जिले में विशेषज्ञों की भारी कमी बनी है। ऐसे में सिविल अस्पताल रेफर केंद्र बनकर रह गया है। सिविल अस्पताल पर जिले की साढ़े 5 लाख की आबादी निर्भर है।
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मजबूरीवश मरीज दूसरे जिलों के अस्पतालों की खाक छानने को विवश हैं।
जिले में नहीं हैं ये विशेषज्ञ
सिविल अस्पताल में फिजिशियन, बाल रोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ, अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट, जनरल सर्जन, एमडी मेडिसिन नहीं हैं। इसके अलावा यहां रेडियोग्राफर, रेडियोलॉजिस्ट, गाइनी आदि की कमी भी खल रही है।
इन सुविधाओं का टोटा
1- अल्ट्रासाउंड- सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन एक कमरे में धूल फांक रही है। यहां अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट नहीं है। गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड के लिए स्वास्थ्य विभाग निजी केंद्रों पर निर्भर है, जबकि पुरुष मरीजों को भिवानी या रोहतक पीजीआई रेफर किया जा रहा है।
2- एमआरआई व सीटी स्कैन : जिले बनने के 6 साल बाद भी सिविल अस्पताल में एमआरआई और सीटी स्कैन की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। हर माह करीब 200 मरीजों को भिवानी सिविल अस्पताल रेफर किया जा रहा है।
3- जगह की कमी : सिविल अस्पताल में सुविधाओं का दायरा बढ़ाने के लिए जगह की कमी भी बनी हुई है। यहां अभी कई विशेष वार्ड बनने हैं, लेकिन इसके लिए जगह नहीं है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कोर्ट केस के चलते सिविल अस्पताल परिसर में नया भवन नहीं बनाया जा सकता।
स्वास्थ्य केंद्रों व ओपीडी की स्थिति
स्वास्थ्य केंद्र- संख्या- दैनिक ओपीडी
सिविल अस्पताल- 1-1200 से 1400
मातृ-शिशु अस्पताल-1- 150
सीएचसी - 3- 70 से 90
पीएचसी-12- 30 से 35
अल्ट्रासाउंड सुविधा समेत विशेषज्ञों की मांग पहले ही मुख्यालय भेजी जा चुकी है। जिले में इनकी तैनाती होते ही मरीजों के लिए सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी। - डॉ. गौरव भारद्वाज, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी