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यज्ञ का दूसरा नाम परोपकार : स्वामी सच्चिदानंद

Mon, 15 Apr 2024 04:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Mon, 15 Apr 2024 04:00 AM IST
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Charity is another name for Yagya
रूदड़ौल चरखी दादरी में शिविरार्थियों को यज्ञ करवाते स्वामी सच्चिदानंद। 
झोझूकलां। आर्यवीर दल की ओर से गांव रूदडौल में आसन व्यायाम प्रशिक्षण एवं चरित्र निर्माण संस्कार शिविर आयोजित किया गया। इसके पांचवे दिन सभी आर्यवीरों ने जिला संचालक स्वामी सच्चिदानंद के ब्रह्मत्व में यज्ञ किया। स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि परोपकार को ही यज्ञ कहा जाता है। उन्होंने कहा कि यज्ञ के तीन अर्थ देव पूजा, संगतिकरण और दान हैं। अपने से बड़े लोग देव हैं और उनकी पूजा करना यज्ञ है।
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उन्होंने कहा कि ईश्वरीय नियमों का पालन करना ईश्वर की व्यवस्था में सहयोग है। इसके भंग करने से आत्मिक परेशानी होती है। इसलिए हमें यम-नियम का पालन कर यज्ञीय जीवन जीना चाहिए। स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि समान व्यक्तियों के साथ संगति करना और छोटों को कुछ देना भी यज्ञ है। जगत में कोई पदार्थ, शक्ति और चाहे कोई गुण हो, यदि वह बड़ा है तो वह पूजनीय है, यदि समान है तो मिलने के योग्य है और यदि छोटा है तो कुछ पाने का अधिकारी है। इसी प्रकार हमें भी दूसरों से अपनी योग्यता के अनुसार पूजा, मेल और दान पाने के अधिकारी हैं। इस दौरान देव दत्त आर्य, व्यायाम शिक्षक राहुल आर्य, अनुराग आर्य, मोक्ष आर्य, जतिन, रामप्रसाद, वंश, लक्ष्य, अंकित, रोहित, मोहित, अरमान, हेमंत आदि रहे।
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