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मौसम में आया बदलाव, तेज हवा के साथ बूंदाबांदी ने दिलाई गर्मी से राहत
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चरखी दादरी। जिले में बुधवार को मौसम का मिजाज बदल गया। शहरी के बाहरी क्षेत्र में दोपहर के समय करीब पांच मिनट तक झमाझम बारिश हुई तो अंदरूनी क्षेत्र में बूंदाबांदी हुई। इसके साथ ही तेज हवा भी चली, जिससे दोपहर के समय भी गर्मी का प्रकोप कम रहा। बुधवार को जिले का न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री दर्ज किया और मंगलवार के मुकाबले न्यूनतम तापमान में दशमलव सात डिग्री की बढ़ोतरी देखने को मिली। वहीं, जिले का अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री दर्ज किया गया और इसमें दशमलव तीन डिग्री की गिरावट दर्ज कर गई।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र से पश्चिमी विक्षोभ बना और इसका प्रभाव चरखी दादरी में भी देखने को मिला। सुबह से ही आसमान में बादल छाये रहे और दोपहर बाद तेज हवाएं चली। कई भागों में बूंदाबांदी हुई और इससे मौसम में बदलाव आ गया। पिछले तीन-चार दिनो से बनी उमस भरी गर्मी से लोगों को काफी राहत मिली है।
जिले में मानसून सीजन में अब तक 281 एमएम बारिश हुई है जो सामान्य से काफी कम है। इस समय बारिश की जरूरत है। बारिश कम होने की वजह से खरीफ की फसलों का पकाव ठीक प्रकार से नहीं हो सका और अगली रबी की फसलों की बिजाई के लिए भी किसानों के समक्ष संकट पैदा हो गया है। बारिश नहीं होने पर किसानों को सिंचाई करके सरसों की बिजाई करनी पड़ेगी। इससे किसान पर लागत खर्च प्रति एकड़ और बढ़ जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार मानसून सीजन की बारिश का अब विदाई का समय चल रहा है। सितंबर माह के अंत तक मानसून की विदाई तय मानी जा रही है। क्षेत्रीय मौसम वैज्ञानिक डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि मानसून विदाई का समय आ गया है।
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मौसम वैज्ञानिक डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र से पश्चिमी विक्षोभ बना और इसका प्रभाव चरखी दादरी में भी देखने को मिला। सुबह से ही आसमान में बादल छाये रहे और दोपहर बाद तेज हवाएं चली। कई भागों में बूंदाबांदी हुई और इससे मौसम में बदलाव आ गया। पिछले तीन-चार दिनो से बनी उमस भरी गर्मी से लोगों को काफी राहत मिली है।
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जिले में मानसून सीजन में अब तक 281 एमएम बारिश हुई है जो सामान्य से काफी कम है। इस समय बारिश की जरूरत है। बारिश कम होने की वजह से खरीफ की फसलों का पकाव ठीक प्रकार से नहीं हो सका और अगली रबी की फसलों की बिजाई के लिए भी किसानों के समक्ष संकट पैदा हो गया है। बारिश नहीं होने पर किसानों को सिंचाई करके सरसों की बिजाई करनी पड़ेगी। इससे किसान पर लागत खर्च प्रति एकड़ और बढ़ जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार मानसून सीजन की बारिश का अब विदाई का समय चल रहा है। सितंबर माह के अंत तक मानसून की विदाई तय मानी जा रही है। क्षेत्रीय मौसम वैज्ञानिक डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि मानसून विदाई का समय आ गया है।
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