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सीसीआई ने किसानों से 14.34 करोड़ की कपास खरीदी, भुगतान अभी तक नहीं
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CCI bought 14.34 crore cotton from farmers, payment not yet
- फोटो : CharkhiDadri
कई दिन के इंतजार के बाद कपास बेचने वाले किसान अब भुगतान नहीं होने से परेशान हैं। खरीद एजेंसी सीसीआई ने अभी एक भी किसान के खाते में भुगतान राशि नहीं डाली है। 26 अक्तूबर की दोपहर तक सीसीआई जिले में 25058 क्विंटल कपास खरीद चुकी है, जिसकी कीमत करीब 14 करोड़ 34 लाख रुपये है। कपास का सरकारी रेट 5725 रुपये प्रति क्विंटल है।
दादरी जिले में कपास की एमएसपी पर खरीद शुरू करवाने के लिए किसान संगठनों को एक सप्ताह तक धरना देना पड़ा था। एमएसपी पर खरीद शुरू होने से पहले करीब एक हजार किसानों ने 700 से 800 रुपये कम दाम पर अपनी कपास बेच दी थी। कपास की खरीद शुरू हुए दस दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक तीस हजार क्विंटल कपास भी नहीं खरीदी गई है।
कपास बेचने से पहले किसानों को मंडी आकर अपना पंजीकरण करवाना पड़ता है और इसके बाद ही खरीद एजेंसी सीसीआई किसान को मंडी बुलाती है। किसान कपास खरीद की प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं। वहीं, भुगतान न होने से किसानों को अगली फसल की बिजाई में भी देरी हो रही है। किसानों का कहना है कि कपास की भुगतान राशि आने के बाद खाद, बीज लाकर वो सरसों और गेहूं की बिजाई कर सकेंगे।
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किसान बोले : एमएसपी पर कपास बेचने के लिए करना पड़ रहा इंतजार
- एमएसपी पर कपास बेचने के लिए लंबा इंतजार करवाया जा रहा है। किसान मंडियों के चक्कर काटने को विवश हैं लेकिन अधिकारियों को उनकी परेशानियों से कोई सारोकार नहीं है।
सतबीर, समसपुर
- मेरा गांव माजरा झज्जर जिले में है और मैंने कपास बेचने के लिए दादरी मंडी को चुना था। यहां कपास खरीद प्रक्रिया बेहद धीमी चल रही है। किसान बेहद परेशान हैं।
सुदर्शन, माजरा
16 अक्तूबर तक जिन किसानों से हमने कपास खरीदी है उनके खाते में जल्द भुगतान राशि डाल दी जाएगी। इस संबंध में हमने हैड ऑफिस अपनी रिपोर्ट भेज दी है।
अंकित, असिस्टेंट परचेज मैनेजर, सीसीआई
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दादरी जिले में कपास की एमएसपी पर खरीद शुरू करवाने के लिए किसान संगठनों को एक सप्ताह तक धरना देना पड़ा था। एमएसपी पर खरीद शुरू होने से पहले करीब एक हजार किसानों ने 700 से 800 रुपये कम दाम पर अपनी कपास बेच दी थी। कपास की खरीद शुरू हुए दस दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक तीस हजार क्विंटल कपास भी नहीं खरीदी गई है।
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कपास बेचने से पहले किसानों को मंडी आकर अपना पंजीकरण करवाना पड़ता है और इसके बाद ही खरीद एजेंसी सीसीआई किसान को मंडी बुलाती है। किसान कपास खरीद की प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं। वहीं, भुगतान न होने से किसानों को अगली फसल की बिजाई में भी देरी हो रही है। किसानों का कहना है कि कपास की भुगतान राशि आने के बाद खाद, बीज लाकर वो सरसों और गेहूं की बिजाई कर सकेंगे।
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किसान बोले : एमएसपी पर कपास बेचने के लिए करना पड़ रहा इंतजार
- एमएसपी पर कपास बेचने के लिए लंबा इंतजार करवाया जा रहा है। किसान मंडियों के चक्कर काटने को विवश हैं लेकिन अधिकारियों को उनकी परेशानियों से कोई सारोकार नहीं है।
सतबीर, समसपुर
- मेरा गांव माजरा झज्जर जिले में है और मैंने कपास बेचने के लिए दादरी मंडी को चुना था। यहां कपास खरीद प्रक्रिया बेहद धीमी चल रही है। किसान बेहद परेशान हैं।
सुदर्शन, माजरा
16 अक्तूबर तक जिन किसानों से हमने कपास खरीदी है उनके खाते में जल्द भुगतान राशि डाल दी जाएगी। इस संबंध में हमने हैड ऑफिस अपनी रिपोर्ट भेज दी है।
अंकित, असिस्टेंट परचेज मैनेजर, सीसीआई