{"_id":"61aa6191d08d6e45a014fcb5","slug":"broken-windows-in-government-schools-children-is-chilling-in-the-cold-charkhidadri-news-hsr618501492","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजकीय स्कूलों में टूटी खिड़कियां, ठिठुर रहे नौनिहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजकीय स्कूलों में टूटी खिड़कियां, ठिठुर रहे नौनिहाल
विज्ञापन
राजकीय कन्या प्राइमरी स्कूल में क्षतिग्रस्त खिड़की।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। सर्दी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए है और जिले में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री तक पहुंच चुका है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने राजकीय स्कूलों की जर्जर खिड़कियों और दरवाजों की सुध नहीं ली है, जिसका खामियाजा विद्यार्थी भुगत रहे हैं। इतना ही नहीं डेस्क की कमी के चलते विद्यार्थियों को टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। संवाददाता की पड़ताल में शुक्रवार को शिक्षा विभाग की ये खामियां उजागर हुईं। संवाददाता ने चार स्कूलों को जायजा लिया, जिसमें 19 कमरों में 40 खिड़कियां टूटी मिलीं। वहीं हैरानी बात यह है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों से इसकी जानकारी भी नहीं है और नौनिहाल ठंड में ठिठुर रहे हैं।
अव्यवस्थाओं के चलते सर्दी राजकीय स्कूलों के विद्यार्थियों पर भारी पड़ सकती है। अधिकतर राजकीय स्कूलों में खिड़की, दरवाजे कंडम हालत में हैं। कई स्कूल ऐसे भी हैं, जिनकी कक्षाओं में दरवाजे तक नहीं है। खिड़कियों की स्थिति की अगर बात करें तो प्रत्येक स्कूल में दो से तीन कमरों में खिड़कियां टूटी होने से शीत लहर सीधे अंदर पहुंच रही है। ऐसे में विद्यार्थी ठंड में पढ़ाई करने को विवश हैं। संवाददाता ने शुक्रवार को शहर के चार अलग-अलग राजकीय स्कूलों में जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान इन स्कूलों के 19 कमरों में 40 खिड़कियां टूटी मिलीं। वहीं, शहर के राजकीय कन्या स्कूल में तो छात्राएं जमीन पर बैठकर पड़ाई करती मिलीं। वहीं, अगर गांवों के राजकीय स्कूलों की बात करें तो हालात इससे जुदा नहीं है।
जिला के अधिकतर सरकारी स्कूल 45 से 50 वर्ष पुराने हैं। इन स्कूलों के भवन जवाब दे चुके हैं। किसी स्कूल में कमरों की छत्त जर्जर हो चुकी हैं तो किसी के कमरों की दीवारों में दरारें आईं हुई हैं। कई स्कूलों में चाहरदीवारी तक टूटी पड़ी हैं। चाहरदीवारी नहीं होने से स्कूल परिसरों में लगे पौधों को लावारिस पशु नष्ट कर देेेते हैं। कई ऐसे भी स्कूल हैं जिनका लेवल काफी नीचा होने की वजह से जलभराव की समस्या अब तक बनी हुई है जिससे वैकल्पिक व्यवस्थाएं कर कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं।
विज्ञापन
टूटी खिड़कियां नकल माफिया की देन
संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि परीक्षाओं के समय नकल माफिया परीक्षा केंद्र के अंदर पहुंच जाते हैं। परीक्षार्थियों तक पर्ची पहुंचाने के लिए वे न केवल लोहे का जालियां उखाड़ देते हैं, बल्कि खिड़कियां और कांच तक तोड़ देते हैं। ज्यादातर राजकीय स्कूलों में नकल माफिया के कारण ही खिड़कियां टूटी हुई हैं।
जानिए....संवाददाता को किसी स्कूल में मिली क्या स्थिति
1- मॉडल संस्कृति स्कूल : सरदार झाडू सिंह चौक समीप स्थित मॉडल संस्कृति स्कूल में छठी से बारहवीं कक्षा तक कुल 1094 विद्यार्थी हैं। ये विद्यार्थी 30 कमरों में बैठकर पढ़ाई करते हैं। इस स्कूल में पांच अलग-अलग लैब में खिड़कियां टूटी हुई हैं, जबकि दो कमरों में भी स्थिति ऐसी ही है।
2- रेलवे गेट प्राइमरी स्कूल : इस स्कूल में 194 विद्यार्थी हैं। 10 कमरों में बैठकर इस स्कूल के विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। इन दस में से चार कमरों में खिड़कियां टूटी हुई हैं। इस स्कूल में डेस्क की कमी बनी हुई है, जिसके चलते विद्यार्थी जमीन पर टाट-पट्टी पर बैठने को विवश हैं।
3- राजकीय कन्या प्राइमरी स्कूल : शहर के राजकीय कन्या प्राइमरी स्कूल में छात्राओं की संख्या 194 है। यहां नौ कमरों में कक्षाएं लगाई जाती हैं। इस स्कूल में चार कमरों की आठ खिड़कियां टूटी हुई हैं, जिनके जरिये सर्द हवाएं अंदर तक पहुंच रही है। इसके चलते छात्राओं के अलावा शिक्षक भी परेशान हैं।
4- राजकीय कन्या स्कूल : काठमंडी क्षेत्र स्थित राजकीय कन्या स्कूल में 18 कमरे हैं जबकि यहां 960 विद्यार्थी हैं। इस स्कूल के चार कमरों में दस खिड़कियां क्षतिग्रस्त हैं। सूत्रों के अनुसार गत सर्दी के मौसम में भी यहां स्थिति ऐसी ही थी, लेकिन एक साल बीतने पर भी ध्यान नहीं दिया गया।
इस सत्र 7520 विद्यार्थी बढ़े
राज्य के राजकीय स्कूलों में इस सत्र में 3.25 लाख ज्यादा विद्यार्थियों ने दाखिले लिए हैं। दादरी जिले में विद्यार्थियों की संख्या 7510 बढ़ी हैं, ऐसे में पर्याप्त भवन का होना जरूरी है। इस समय सभी दरवाजों व खिड़कियों को ठीक करने की जरूरत है ताकि ठंडी हवा से छात्रों का बचाव हो सके।
वर्जन::
अगर ऐसा है तो स्कूल मुख्याध्यापक हमारे पास इस संबंध में डिमांड भेजें। डिमांड मिलने के बाद जल्द से जल्द इन कमियों को दूर करवा दिया जाएगा। डेस्क की डिमांड हम पहले ही उच्चाधिकारियों के पास भेज चुके हैं।
विरेंद्र मलिक, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
विज्ञापन
अव्यवस्थाओं के चलते सर्दी राजकीय स्कूलों के विद्यार्थियों पर भारी पड़ सकती है। अधिकतर राजकीय स्कूलों में खिड़की, दरवाजे कंडम हालत में हैं। कई स्कूल ऐसे भी हैं, जिनकी कक्षाओं में दरवाजे तक नहीं है। खिड़कियों की स्थिति की अगर बात करें तो प्रत्येक स्कूल में दो से तीन कमरों में खिड़कियां टूटी होने से शीत लहर सीधे अंदर पहुंच रही है। ऐसे में विद्यार्थी ठंड में पढ़ाई करने को विवश हैं। संवाददाता ने शुक्रवार को शहर के चार अलग-अलग राजकीय स्कूलों में जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान इन स्कूलों के 19 कमरों में 40 खिड़कियां टूटी मिलीं। वहीं, शहर के राजकीय कन्या स्कूल में तो छात्राएं जमीन पर बैठकर पड़ाई करती मिलीं। वहीं, अगर गांवों के राजकीय स्कूलों की बात करें तो हालात इससे जुदा नहीं है।
विज्ञापन
जिला के अधिकतर सरकारी स्कूल 45 से 50 वर्ष पुराने हैं। इन स्कूलों के भवन जवाब दे चुके हैं। किसी स्कूल में कमरों की छत्त जर्जर हो चुकी हैं तो किसी के कमरों की दीवारों में दरारें आईं हुई हैं। कई स्कूलों में चाहरदीवारी तक टूटी पड़ी हैं। चाहरदीवारी नहीं होने से स्कूल परिसरों में लगे पौधों को लावारिस पशु नष्ट कर देेेते हैं। कई ऐसे भी स्कूल हैं जिनका लेवल काफी नीचा होने की वजह से जलभराव की समस्या अब तक बनी हुई है जिससे वैकल्पिक व्यवस्थाएं कर कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं।
विज्ञापन
टूटी खिड़कियां नकल माफिया की देन
संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि परीक्षाओं के समय नकल माफिया परीक्षा केंद्र के अंदर पहुंच जाते हैं। परीक्षार्थियों तक पर्ची पहुंचाने के लिए वे न केवल लोहे का जालियां उखाड़ देते हैं, बल्कि खिड़कियां और कांच तक तोड़ देते हैं। ज्यादातर राजकीय स्कूलों में नकल माफिया के कारण ही खिड़कियां टूटी हुई हैं।
जानिए....संवाददाता को किसी स्कूल में मिली क्या स्थिति
1- मॉडल संस्कृति स्कूल : सरदार झाडू सिंह चौक समीप स्थित मॉडल संस्कृति स्कूल में छठी से बारहवीं कक्षा तक कुल 1094 विद्यार्थी हैं। ये विद्यार्थी 30 कमरों में बैठकर पढ़ाई करते हैं। इस स्कूल में पांच अलग-अलग लैब में खिड़कियां टूटी हुई हैं, जबकि दो कमरों में भी स्थिति ऐसी ही है।
2- रेलवे गेट प्राइमरी स्कूल : इस स्कूल में 194 विद्यार्थी हैं। 10 कमरों में बैठकर इस स्कूल के विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। इन दस में से चार कमरों में खिड़कियां टूटी हुई हैं। इस स्कूल में डेस्क की कमी बनी हुई है, जिसके चलते विद्यार्थी जमीन पर टाट-पट्टी पर बैठने को विवश हैं।
3- राजकीय कन्या प्राइमरी स्कूल : शहर के राजकीय कन्या प्राइमरी स्कूल में छात्राओं की संख्या 194 है। यहां नौ कमरों में कक्षाएं लगाई जाती हैं। इस स्कूल में चार कमरों की आठ खिड़कियां टूटी हुई हैं, जिनके जरिये सर्द हवाएं अंदर तक पहुंच रही है। इसके चलते छात्राओं के अलावा शिक्षक भी परेशान हैं।
4- राजकीय कन्या स्कूल : काठमंडी क्षेत्र स्थित राजकीय कन्या स्कूल में 18 कमरे हैं जबकि यहां 960 विद्यार्थी हैं। इस स्कूल के चार कमरों में दस खिड़कियां क्षतिग्रस्त हैं। सूत्रों के अनुसार गत सर्दी के मौसम में भी यहां स्थिति ऐसी ही थी, लेकिन एक साल बीतने पर भी ध्यान नहीं दिया गया।
इस सत्र 7520 विद्यार्थी बढ़े
राज्य के राजकीय स्कूलों में इस सत्र में 3.25 लाख ज्यादा विद्यार्थियों ने दाखिले लिए हैं। दादरी जिले में विद्यार्थियों की संख्या 7510 बढ़ी हैं, ऐसे में पर्याप्त भवन का होना जरूरी है। इस समय सभी दरवाजों व खिड़कियों को ठीक करने की जरूरत है ताकि ठंडी हवा से छात्रों का बचाव हो सके।
वर्जन::
अगर ऐसा है तो स्कूल मुख्याध्यापक हमारे पास इस संबंध में डिमांड भेजें। डिमांड मिलने के बाद जल्द से जल्द इन कमियों को दूर करवा दिया जाएगा। डेस्क की डिमांड हम पहले ही उच्चाधिकारियों के पास भेज चुके हैं।
विरेंद्र मलिक, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी

मॉडल संस्कृति स्कूल में टूटी कमरे की खिड़की।- फोटो : CharkhiDadri