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विज्ञान ने साधन तो दे दिए, साधना समाप्त कर दी : बीके प्रेमलता
Mon, 30 Dec 2024 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 30 Dec 2024 11:16 PM IST
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दादरी ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम में केक काटतीं बीके प्रेमलता व मौजूद अन्य ल
- नववर्ष के उपलक्ष्य में दादरी ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र पर आयोजित किया गया कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। नववर्ष हम सबको नए विचार, संस्कार, संसार व समाज की ओर लेकर जाएगा। इससे संसार का प्रत्येक प्राणी सुख व चैन की सांस लेगा। आनंदमय जीवन की अनुभूति करेगा। उक्त उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के दादरी सेवाकेंद्र पर आयोजित कार्यक्रम में जिला प्रभारी बीके प्रेमलता ने व्यक्त किए।
उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि आज विज्ञान ने साधन तो दे दिए, लेकिन, साधना समाप्त कर दी। आज आधुनिक संसार है, लेकिन, संस्कार समाप्त होते जा रहे हैं। इंसान का शरीर रूपी चित्र तो सजा है, लेकिन, चरित्र नष्ट हो चुका है। इसलिए नया वर्ष नए परिवर्तन की मांग कर रहा है कि अब साइंस के साथ साइलेंस भी चाहिए। भौतिकता के साथ आध्यात्मिकता चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान सभी को एक नाटक के माध्यम से आध्यात्मिकता की आवश्यकता की जरूरत समझाई गई। बीके प्रेमलता ने कहा कि जब हम प्रत्येक कार्य को परमात्मिक किरणों को प्राप्त करते हुए करेंगे तो सदा श्रेष्ठ कार्य करेंगे और सकारात्मक विचारों से चारों ओर नई उर्जा प्रदान करेंगे। इस अवसर पर भूवि, उर्वि, आशिमा, कंचन और अंजलि ने नृत्य की प्रस्तुति दी। ब्रह्माकुमार जयनारायण शर्मा और जगबीर ने नववर्ष के उपलक्ष्य में कविता सुनाई।
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फोटो 15
दादरी ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम में केक काटतीं बीके प्रेमलता व मौजूद अन्य लोग। स्रोत : संस्थान
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। नववर्ष हम सबको नए विचार, संस्कार, संसार व समाज की ओर लेकर जाएगा। इससे संसार का प्रत्येक प्राणी सुख व चैन की सांस लेगा। आनंदमय जीवन की अनुभूति करेगा। उक्त उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के दादरी सेवाकेंद्र पर आयोजित कार्यक्रम में जिला प्रभारी बीके प्रेमलता ने व्यक्त किए।
उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि आज विज्ञान ने साधन तो दे दिए, लेकिन, साधना समाप्त कर दी। आज आधुनिक संसार है, लेकिन, संस्कार समाप्त होते जा रहे हैं। इंसान का शरीर रूपी चित्र तो सजा है, लेकिन, चरित्र नष्ट हो चुका है। इसलिए नया वर्ष नए परिवर्तन की मांग कर रहा है कि अब साइंस के साथ साइलेंस भी चाहिए। भौतिकता के साथ आध्यात्मिकता चाहिए।
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कार्यक्रम के दौरान सभी को एक नाटक के माध्यम से आध्यात्मिकता की आवश्यकता की जरूरत समझाई गई। बीके प्रेमलता ने कहा कि जब हम प्रत्येक कार्य को परमात्मिक किरणों को प्राप्त करते हुए करेंगे तो सदा श्रेष्ठ कार्य करेंगे और सकारात्मक विचारों से चारों ओर नई उर्जा प्रदान करेंगे। इस अवसर पर भूवि, उर्वि, आशिमा, कंचन और अंजलि ने नृत्य की प्रस्तुति दी। ब्रह्माकुमार जयनारायण शर्मा और जगबीर ने नववर्ष के उपलक्ष्य में कविता सुनाई।
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दादरी ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम में केक काटतीं बीके प्रेमलता व मौजूद अन्य लोग। स्रोत : संस्थान