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Charkhi Dadri News: चारों तरफ बिखरी थीं लाशें, शव रखने के लिए छोटा पड़ गया था अस्पताल

Wed, 12 Nov 2025 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Wed, 12 Nov 2025 01:13 AM IST
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Bodies were scattered everywhere, and the hospital was too small to accommodate the bodies.
उस समय घटनास्थल पर पहुंचे तत्कालीन पीएम एचडी देवगाैड़ा व तत्कालीन सीएम चौ. बंसीलाल। सौजन्य : दय - फोटो : तहसील बार एसोसिएशन के जीते महासचिव योगेश कुमार एवं अध्यक्ष चरन सिंह सहित अन्य पदाधिकारी। स्रोत स्वयं
चरखी दादरी।
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चरखी दादरी में हुई भारत की सबसे बड़ी हवाई दुर्घटना को आज 29 वर्ष पूरे हो गए हैं लेकिन लोगों के जेहन में अभी तक इस हादसे की यादें ताजा हैं। हादसे में दोनों जहाजों में सवार सभी 349 लोगों की मौत हो गई थी। गांव टिकाण कलां के खेतों में चारों तरफ लाशें बिखरी हुई थीं और हवाई जहाज के मलबे में आग लगी हुई थी। घटनास्थल पर पहुंचे लोगों की रूह कांप गई थी। शवों को रखने के लिए उस समय दादरी का नागरिक अस्पताल परिसर भी छोटा पड़ गया था।
वर्ष 1996 में 12 नवंबर को जिला के लोग भैया दूज पर्व मनाने में जुटे हुए थे। उसी दिन शाम के समय सऊदी अरब एयरलाइंस के यात्री विमान बोइंग 763 ने 23 क्रू सदस्य व 289 यात्रियों के साथ दिल्ली हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी। दूसरी ओर कजाकिस्तान एयरलाइंस का मालवाहक विमान 12 क्रू सदस्य व 25 अन्य लोगों के साथ दिल्ली हवाई अड्डे की तरफ आ रहा था। शाम करीब साढ़े छह बजे ये दोनों विमान दादरी के ऊपर आपस में टकरा गए। दोनों विमानों के टकराने के साथ ही पूरा आकाश लाल हो गया था। शुरुआत में तो किसी को कुछ नहीं समझ आया कि आखिर हुआ क्या है। लेकिन कुछ ही पलों के बाद एक विमान दादरी जिला के गांव टिकाण कलां तथा दूसरा विमान झज्जर जिला के गांव बिरोहड़ के समीप खेतों में गिरे। इसके बाद लोगों को पता चला कि आकाश में दो विमान टकराए हैं।
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तत्कालीन प्रधानमंत्री पहुंचे थे घटनास्थल
हादसे के के अगले ही दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगोड़ा भी घटनास्थल पर पहुंचे थे। यहां उन्होंने राहत कार्यों का जायजा लिया। प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. चौ. बंसीलाल भी उनके साथ घटनास्थल पर मौजूद रहे थे।
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स्मारक की योजना नहीं चढ़ी सिरे
इस हवाई दुर्घटना में मारे गए लोगों की स्मृति में स्मारक बनाने के लिए वर्ष 2021 में तत्कालीन जिला उपायुक्त राजेश जोगपाल ने प्रयास भी शुरू किए थे। लेकिन उनका तबादला होने के बाद यह योजना भी सिरे नहीं चढ़ सकी।

अगले वर्ष जंतर-मंतर पर कार्यक्रम की तैयारी
चिड़िया मोड़ के समीप स्थित कब्रिस्तान में इस विमान हादसे से संबंधित बोर्ड भी लगा हुआ है। उस बोर्ड पर हादसे का ब्योरा लिखा गया है। मुस्लिम इंतजामिया कमेटी दादरी की ओर से अगले वर्ष इस दुर्घटना के 30 वर्ष पूरे होने पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा कार्यक्रम करने की योजना भी बनाई जा रही है।
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