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1.25 करोड़ से बिरही कलां माइनर और सब माइनर का होगा जीर्णोद्धार
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चरखी दादरी। पिछले लंबे से समय से जर्जर बिरहीकलां माइनर और सब माइनर के अब दिन फिरेंगे। माइनर व सब माइनर के जीर्णोद्धार की सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद सिंचाई विभाग ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर वर्क ऑर्डर जारी कर दिए है। विभाग की योजना के अनुसार नहर की कायाकल्प पर 1.25 करोड़ का बजट खर्च होगा और इससे 12 किलोमीटर लंबाई में सीसी की माइनर व सब माइनर बनाई जाएगी।
बिरही कलां माइनर का निर्माण वर्ष 1978 में हुआ था और पिछले लंबे समय से यह माइनर जर्जर है। ग्रामीण कई दफा इसके जीर्णोद्धार की मांग उठा चुके हैं। ग्रामीणों की मांग पर संज्ञान लेते हुए सिंचाई विभाग ने इसका एस्टीमेट तैयार कर सरकार को भेजा था। सरकार की ओर से इसे स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर आमंत्रित किया गया और इसके जरिये एजेंसी का चयन किया गया है। विभाग की ओर से टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही वर्क ऑर्डर जारी किए गए है। माइनर का जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने से अंतिम छोर तक पानी पहुंचेगा।
बिरही कलां माइनर और सब माइनर का निर्माण होने से 6 गांवों को फायदा होगा। इसके पुनर्निर्माण से करीब तीन हजार एकड़ भूमि की सिंचाई हो सकेगी और इससे जुड़े गांवों में पेयजल संकट भी नहीं रहेगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार संबंधित एजेंसी को 6 माह में यह कार्य पूरा करना होगा।
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44 साल पहले बनी थी माइनर
करीब 44 साल पहले टाइलों से बनी माइनर की हालात खस्ता होने से पानी का रिसाव होता है और इससे पानी की बर्बादी होती है। अब यह माइनर सीसी की बनने से पानी रिसाव के साथ बर्बादी भी रुकेगी। इसकी क्षमता 14 क्यूसेक हे, लेकिन करीब चार क्यूसेक पानी हर टर्म पर बर्बाद होता है।
इन गांवों के किसानों को मिलेगा लाभ
बिरही कलां माइनर और सब माइनर के साथ लगते गांव बिरही कलां, बिरही खुर्द, छपार, बरसाना, शीशवाला व तिवाला के ग्रामीणों को सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में नहरी पानी मिल सकेगा। ऐसे में इन किसानों की लगभग तीन हजार एकड़ भूमि के लिए सिंचाई का संकट भी नहीं रहेगा।
1.25 करोड़ से बिरही कलां माइनर व सब माइनर का जीर्णोद्धार कराया जाएगा। इससे माइनर से जुड़े गांवों को फायदा होगा और पानी की बर्बादी भी रुकेगी।
बलदेव सिंह, जेई, सिंचाई विभाग
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बिरही कलां माइनर का निर्माण वर्ष 1978 में हुआ था और पिछले लंबे समय से यह माइनर जर्जर है। ग्रामीण कई दफा इसके जीर्णोद्धार की मांग उठा चुके हैं। ग्रामीणों की मांग पर संज्ञान लेते हुए सिंचाई विभाग ने इसका एस्टीमेट तैयार कर सरकार को भेजा था। सरकार की ओर से इसे स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर आमंत्रित किया गया और इसके जरिये एजेंसी का चयन किया गया है। विभाग की ओर से टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही वर्क ऑर्डर जारी किए गए है। माइनर का जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने से अंतिम छोर तक पानी पहुंचेगा।
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बिरही कलां माइनर और सब माइनर का निर्माण होने से 6 गांवों को फायदा होगा। इसके पुनर्निर्माण से करीब तीन हजार एकड़ भूमि की सिंचाई हो सकेगी और इससे जुड़े गांवों में पेयजल संकट भी नहीं रहेगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार संबंधित एजेंसी को 6 माह में यह कार्य पूरा करना होगा।
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44 साल पहले बनी थी माइनर
करीब 44 साल पहले टाइलों से बनी माइनर की हालात खस्ता होने से पानी का रिसाव होता है और इससे पानी की बर्बादी होती है। अब यह माइनर सीसी की बनने से पानी रिसाव के साथ बर्बादी भी रुकेगी। इसकी क्षमता 14 क्यूसेक हे, लेकिन करीब चार क्यूसेक पानी हर टर्म पर बर्बाद होता है।
इन गांवों के किसानों को मिलेगा लाभ
बिरही कलां माइनर और सब माइनर के साथ लगते गांव बिरही कलां, बिरही खुर्द, छपार, बरसाना, शीशवाला व तिवाला के ग्रामीणों को सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में नहरी पानी मिल सकेगा। ऐसे में इन किसानों की लगभग तीन हजार एकड़ भूमि के लिए सिंचाई का संकट भी नहीं रहेगा।
1.25 करोड़ से बिरही कलां माइनर व सब माइनर का जीर्णोद्धार कराया जाएगा। इससे माइनर से जुड़े गांवों को फायदा होगा और पानी की बर्बादी भी रुकेगी।
बलदेव सिंह, जेई, सिंचाई विभाग