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शहादत के पांचवें दिन भी नहीं पहुंचा भूपेंद्र का पार्थिव शरीर
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जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए दादरी जिले के बांस गांव के भूपेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर मंगलवार को भी श्रीनगर से गांव नहीं पहुंच सका। शनिवार को शहादत की खबर मिलने के बाद से गांव में मातम छाया है। यहां तक कि ग्रामीणों ने फसल कटाई कार्य भी अधर में छोड़ दिया है। पिछले तीन दिनों से ग्रामीणों ने अपने खेत नहीं संभाले हैं। पूरा गांव अब भूपेंद्र के पार्थिव शरीर पहुंचने का इंतजार कर रहा है।
बता दें कि बांस गांव निवासी 23 वर्षीय जवान भूपेंद्र सिंह नौगाम और पुंछ में पाकिस्तान की तरफ से हुई फायरिंग में गत शुक्रवार रात शहीद हो गए थे। शनिवार दोपहर उनके परिजनों को शहादत की खबर मिली थी। परिजन तब से ही अपने सपूत के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रहे हैं। करीब 18 माह पहले भूपेंद्र सिंह के साथ विवाह बंधन में बंधने वाली रेखा और मां राजेश देवी की आंखों से आंसू रुक ही नहीं रहे। बेसुध हालत में दोनों श्रीनगर से शहीद भूपेंद्र के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रही हैं।
शहीद भूपेंद्र के दोस्त संदीप कौशिक ने बताया कि शनिवार की शाम गांव में भूपेंद्र की शहादत की खबर मिली थी। खबर मिलने के बाद ग्रामीणों ने बाजरा कटाई का काम अधर में छोड़ दिया है। पिछले तीन दिनों से ग्रामीण अपने खेतों में नहीं जा रहे हैं। भूपेंद्र की शहादत की सूचना मिलने के बाद से ग्रामीण शहीद के पिता मलखान सिंह, भाई दीपक और अन्य परिजनों को दिलासा देने के लिए घर पहुंच रहे हैं। रात के समय भी ग्रामीण परिवार को अकेला नहीं छोड़ते।
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अधिकारी व राजनेता नहीं पहुंचे सांत्वना देने
बांस के ग्रामीण अतर सिंह, सूरजभान, दिलीप, मुख्तयार, संदीप व सचिन आदि ने बताया कि भूपेंद्र की शहादत को चार दिन बीत चुके हैं। पिछले तीन दिनों से सूचना जिला प्रशासन के पास भी है। अब तक कोई अधिकारी परिवार को सांत्वना देने नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों ने बताया कि राजनेताओं का हाल तो ये है कि वे फोन पर ही पार्थिव शरीर के आने की सूचना ले रहे हैं।
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बता दें कि बांस गांव निवासी 23 वर्षीय जवान भूपेंद्र सिंह नौगाम और पुंछ में पाकिस्तान की तरफ से हुई फायरिंग में गत शुक्रवार रात शहीद हो गए थे। शनिवार दोपहर उनके परिजनों को शहादत की खबर मिली थी। परिजन तब से ही अपने सपूत के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रहे हैं। करीब 18 माह पहले भूपेंद्र सिंह के साथ विवाह बंधन में बंधने वाली रेखा और मां राजेश देवी की आंखों से आंसू रुक ही नहीं रहे। बेसुध हालत में दोनों श्रीनगर से शहीद भूपेंद्र के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रही हैं।
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शहीद भूपेंद्र के दोस्त संदीप कौशिक ने बताया कि शनिवार की शाम गांव में भूपेंद्र की शहादत की खबर मिली थी। खबर मिलने के बाद ग्रामीणों ने बाजरा कटाई का काम अधर में छोड़ दिया है। पिछले तीन दिनों से ग्रामीण अपने खेतों में नहीं जा रहे हैं। भूपेंद्र की शहादत की सूचना मिलने के बाद से ग्रामीण शहीद के पिता मलखान सिंह, भाई दीपक और अन्य परिजनों को दिलासा देने के लिए घर पहुंच रहे हैं। रात के समय भी ग्रामीण परिवार को अकेला नहीं छोड़ते।
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अधिकारी व राजनेता नहीं पहुंचे सांत्वना देने
बांस के ग्रामीण अतर सिंह, सूरजभान, दिलीप, मुख्तयार, संदीप व सचिन आदि ने बताया कि भूपेंद्र की शहादत को चार दिन बीत चुके हैं। पिछले तीन दिनों से सूचना जिला प्रशासन के पास भी है। अब तक कोई अधिकारी परिवार को सांत्वना देने नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों ने बताया कि राजनेताओं का हाल तो ये है कि वे फोन पर ही पार्थिव शरीर के आने की सूचना ले रहे हैं।

Bhupendra's body did not reach even on the fifth day of martyrdom- फोटो : CharkhiDadri