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भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत बनाता है भैयादूज : डॉ. मनोज
Wed, 22 Oct 2025 10:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 22 Oct 2025 10:39 PM IST
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फोटो 28 : डॉ. मनोज शास्त्री बलाली। स्रोत : स्वयं
यमराज अपनी बहन यमुना के घर आए थे, तभी से मनाया जाता है भैयादूज पर्व
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। पांच दिवसीय दीपोत्सव का त्योहार धनतेरस से शुरू होकर भैया दूज पर समाप्त होता है। इस बार भैया दूज पर्व 23 अक्तूबर वीरवार को मनाया जाएगा। यह पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और अधिक मजबूत बनाता है।
डॉ. मनोज शास्त्री बलाली ने बताया कि भैया दूज का त्योहार यमराज और यमुना से जुड़ा हुआ है। बताते हैं कि सूर्य भगवान की जो संतानें थीं, उनमें से यमुना और यमराज दो भाई-बहन भी थे। यमुना पृथ्वी पर आ गई थीं और यमराज को यमलोक की जिम्मेदारी दी गई थी। यमराज अधिक व्यस्त होने के कारण अपनी बहन को समय नहीं दे पाते थे। एक दिन भाग्य से कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज यमुना के द्वार पर पहुंचे।
भाई को देखकर बहन बड़ी प्रसन्न हुई और उनकी बहुत अच्छी तरह से आवभगत की। इस प्रकार आतिथ्य से प्रसन्न होकर यम कहने लगे बहन आपकी सेवा, आपके परिवार का लगाव देखकर मेरा हृदय गदगद हो गया। मैं आपको वर देना चाहता हूं बताइए आप क्या मांगती हैं।
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इस पर यमुना ने कहा कि भाई मुझे कुछ नहीं चाहिए। बस आप हर वर्ष कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मेरे घर पर पधारो और जो कोई भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर का आतिथ्य स्वीकार करे या यमुना नदी में स्नान करे, उसको कभी भी अकाल मृत्यु का सामना न करना पड़े, ऐसा वर मांगती हूं। तब से भैया दूज का त्योहार मनाया जा रहा है।
डॉ. मनोज शास्त्री ने बताया कि वैसे तो वीरवार को पूरा दिन पर्व मनाया जा सकता है लेकिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:32 से आठ बजे तक, सुबह 11 से दोपहर तीन बजे तक और सायं 4:22 से सूर्यास्त तक रहेगा। इस दिन भाई को अपनी बहन के घर भोजन करना चाहिए। बहन को चाहिए कि वह भाई को तिलक कर गोला अवश्य दे।
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यमराज अपनी बहन यमुना के घर आए थे, तभी से मनाया जाता है भैयादूज पर्व
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। पांच दिवसीय दीपोत्सव का त्योहार धनतेरस से शुरू होकर भैया दूज पर समाप्त होता है। इस बार भैया दूज पर्व 23 अक्तूबर वीरवार को मनाया जाएगा। यह पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और अधिक मजबूत बनाता है।
डॉ. मनोज शास्त्री बलाली ने बताया कि भैया दूज का त्योहार यमराज और यमुना से जुड़ा हुआ है। बताते हैं कि सूर्य भगवान की जो संतानें थीं, उनमें से यमुना और यमराज दो भाई-बहन भी थे। यमुना पृथ्वी पर आ गई थीं और यमराज को यमलोक की जिम्मेदारी दी गई थी। यमराज अधिक व्यस्त होने के कारण अपनी बहन को समय नहीं दे पाते थे। एक दिन भाग्य से कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज यमुना के द्वार पर पहुंचे।
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भाई को देखकर बहन बड़ी प्रसन्न हुई और उनकी बहुत अच्छी तरह से आवभगत की। इस प्रकार आतिथ्य से प्रसन्न होकर यम कहने लगे बहन आपकी सेवा, आपके परिवार का लगाव देखकर मेरा हृदय गदगद हो गया। मैं आपको वर देना चाहता हूं बताइए आप क्या मांगती हैं।
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इस पर यमुना ने कहा कि भाई मुझे कुछ नहीं चाहिए। बस आप हर वर्ष कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मेरे घर पर पधारो और जो कोई भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर का आतिथ्य स्वीकार करे या यमुना नदी में स्नान करे, उसको कभी भी अकाल मृत्यु का सामना न करना पड़े, ऐसा वर मांगती हूं। तब से भैया दूज का त्योहार मनाया जा रहा है।
डॉ. मनोज शास्त्री ने बताया कि वैसे तो वीरवार को पूरा दिन पर्व मनाया जा सकता है लेकिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:32 से आठ बजे तक, सुबह 11 से दोपहर तीन बजे तक और सायं 4:22 से सूर्यास्त तक रहेगा। इस दिन भाई को अपनी बहन के घर भोजन करना चाहिए। बहन को चाहिए कि वह भाई को तिलक कर गोला अवश्य दे।