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Charkhi Dadri News: भगवान जगन्नाथ मंदिर के रहस्य और कृष्ण-सुदामा की कथा सुनाई
Wed, 25 Jun 2025 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 25 Jun 2025 12:47 AM IST
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चरखी दादरी की शंकर कॉलोनी में आयोजित कथा में शामिल भक्त।
चरखी दादरी। शंकर कॉलोनी में श्रीमद्भागवत कथा आयोजित की जा रही है। इसके छठे दिन मंगलवार को मुख्य यजमान विकास गर्ग, विशाल गर्ग, बजरंग लाल गर्ग और नीलम गर्ग ने भागवत की पूजा कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
वृंदावन से पधारे विद्वान आचार्य पंडित विष्णु शास्त्री, पंडित ललित शास्त्री, पंडित शिवम शास्त्री एवं पंडित भूपेंद्र शास्त्री ने नवग्रह एवं व्यास पीठ की पूजा करवाई।
कथावाचक बाल व्यास पंडित चंद्रप्रकाश बृजवासी ने भगवान जगन्नाथ मंदिर के रहस्य और कृष्ण-सुदामा के प्रसंगों पर आधारित कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि जगन्नाथ मंदिर में विराजमान मूर्ति के भीतर स्वयं ब्रह्मा का वास है।
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मान्यता है कि कृष्ण के शरीर का हृदय (पिंड) जलने के बाद भी नष्ट नहीं हुआ। भगवान के आशीर्वाद से पांडवों ने इसे जल में प्रवाहित कर दिया, जो बाद में लकड़ी के लट्ठे के रूप में मिला। राजा इंद्रद्युम्न ने इसे मूर्ति के भीतर स्थापित किया और वह लट्ठा अब भी उसी प्रकार मौजूद है। हर 12 वर्षों में मूर्ति बदली जाती है लेकिन यह लट्ठा यथावत रहता है।
ऐसा विश्वास है कि इस लट्ठे को देखने वाले की मृत्यु निश्चित है। इसलिए पंडित ने यह भी बताया कि मूर्ति बदलने की प्रक्रिया के दौरान पुजारियों की आंखों पर पट्टी बांध दी जाती है और हाथ ढक दिए जाते हैं। इस कारण इस लट्ठे को आज तक किसी ने नहीं देखा।
स्वामी ने कहा कि यह रहस्य आज भी अनसुलझा है कि क्या वास्तव में मूर्ति में ब्रह्मा का वास है। कृष्ण-सुदामा प्रसंग में उन्होंने बताया कि सुदामा, अपनी दरिद्र अवस्था में भी कृष्ण से मिलने पहुंचे। कृष्ण ने उन्हें सम्मान दिया और मित्रता की मर्यादा निभाई। यह प्रसंग भक्ति, प्रेम और त्याग का अमर प्रतीक है।
कथा के बाद आरती, वंदना एवं प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान रोहताश शर्मा, अशोक सिंघल, मोहन अग्रवाल, राजेंद्र अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल, शंकरलाल बंसल, मनोज कुमार, रामअवतार बिंदल, पुरुषोत्तमदास दलाल और विशाल गर्ग आदि मौजूद रहे।
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वृंदावन से पधारे विद्वान आचार्य पंडित विष्णु शास्त्री, पंडित ललित शास्त्री, पंडित शिवम शास्त्री एवं पंडित भूपेंद्र शास्त्री ने नवग्रह एवं व्यास पीठ की पूजा करवाई।
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कथावाचक बाल व्यास पंडित चंद्रप्रकाश बृजवासी ने भगवान जगन्नाथ मंदिर के रहस्य और कृष्ण-सुदामा के प्रसंगों पर आधारित कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि जगन्नाथ मंदिर में विराजमान मूर्ति के भीतर स्वयं ब्रह्मा का वास है।
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मान्यता है कि कृष्ण के शरीर का हृदय (पिंड) जलने के बाद भी नष्ट नहीं हुआ। भगवान के आशीर्वाद से पांडवों ने इसे जल में प्रवाहित कर दिया, जो बाद में लकड़ी के लट्ठे के रूप में मिला। राजा इंद्रद्युम्न ने इसे मूर्ति के भीतर स्थापित किया और वह लट्ठा अब भी उसी प्रकार मौजूद है। हर 12 वर्षों में मूर्ति बदली जाती है लेकिन यह लट्ठा यथावत रहता है।
ऐसा विश्वास है कि इस लट्ठे को देखने वाले की मृत्यु निश्चित है। इसलिए पंडित ने यह भी बताया कि मूर्ति बदलने की प्रक्रिया के दौरान पुजारियों की आंखों पर पट्टी बांध दी जाती है और हाथ ढक दिए जाते हैं। इस कारण इस लट्ठे को आज तक किसी ने नहीं देखा।
स्वामी ने कहा कि यह रहस्य आज भी अनसुलझा है कि क्या वास्तव में मूर्ति में ब्रह्मा का वास है। कृष्ण-सुदामा प्रसंग में उन्होंने बताया कि सुदामा, अपनी दरिद्र अवस्था में भी कृष्ण से मिलने पहुंचे। कृष्ण ने उन्हें सम्मान दिया और मित्रता की मर्यादा निभाई। यह प्रसंग भक्ति, प्रेम और त्याग का अमर प्रतीक है।
कथा के बाद आरती, वंदना एवं प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान रोहताश शर्मा, अशोक सिंघल, मोहन अग्रवाल, राजेंद्र अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल, शंकरलाल बंसल, मनोज कुमार, रामअवतार बिंदल, पुरुषोत्तमदास दलाल और विशाल गर्ग आदि मौजूद रहे।