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श्रीमद्भागवत कथा से होता है सद्मार्ग का ज्ञान : आचार्य गोविंद
Mon, 30 Dec 2024 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 30 Dec 2024 11:18 PM IST
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बस स्टैंड के पीछे स्थित दादी रानी सती मंदिर में आयोजित की गई श्रीमद्भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। श्रीमद्भागवत के अध्ययन-मनन से हमें जीवन के सद्मार्ग का ज्ञान होता है। यह बात आचार्य गोविंद कृष्ण शास्त्री ने शहर के बस स्टैंड के पास स्थित दादी रानी सती मंदिर परिसर में आयोजित कथा के दौरान कहीं।
आचार्य गोविंद कृष्ण शास्त्री ने कहा कि बिना ज्ञान के मनुष्य जीवन अधूरा रहता है। श्रीमद्भागवत जैसे धर्म ग्रंथ मनुष्य को जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं। इनसे हमें शिक्षा मिलती है कि जब यह संसार भगवान ने ही रचा है तो मनुष्य को स्वयं के जीवन पर अभिमान नहीं करना चाहिए। मानव ईश्वर का केवल प्रतिबिंब मात्र है। इसलिए उसे स्वयं को भगवान के प्रति अर्पित कर देना ही कष्टों से मुक्ति पाने का सरल रास्ता है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने पृथ्वी पर बढ़ते अत्याचारों को खत्म करने के लिए मानव रूप में जन्म लिया और बाल्यकाल में ही कालिया नाग, कंस, बकासुर जैसे राक्षसों का वध कर दिया था।
एक बार तो इंद्र ने भी स्वयं का अभिमान प्रकट करने के लिए गोकुल में भारी वर्षा आरंभ कर दी। इंद्र का घमंड चकनाचूर करने के लिए नटवर गिरधारी ने अपनी अनुष्का अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को धारण किया। यह देखकर इंद्र शर्मिंदा हो गए और उन्होंने भगवान से क्षमा मांगी।
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अंत में सभी में प्रसाद वितरित किया गया और दादी सती चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गईं।
फोटो-35
कथा के दौरान दादी सती सभागार में मौजूद श्रद्धालु। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। श्रीमद्भागवत के अध्ययन-मनन से हमें जीवन के सद्मार्ग का ज्ञान होता है। यह बात आचार्य गोविंद कृष्ण शास्त्री ने शहर के बस स्टैंड के पास स्थित दादी रानी सती मंदिर परिसर में आयोजित कथा के दौरान कहीं।
आचार्य गोविंद कृष्ण शास्त्री ने कहा कि बिना ज्ञान के मनुष्य जीवन अधूरा रहता है। श्रीमद्भागवत जैसे धर्म ग्रंथ मनुष्य को जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं। इनसे हमें शिक्षा मिलती है कि जब यह संसार भगवान ने ही रचा है तो मनुष्य को स्वयं के जीवन पर अभिमान नहीं करना चाहिए। मानव ईश्वर का केवल प्रतिबिंब मात्र है। इसलिए उसे स्वयं को भगवान के प्रति अर्पित कर देना ही कष्टों से मुक्ति पाने का सरल रास्ता है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने पृथ्वी पर बढ़ते अत्याचारों को खत्म करने के लिए मानव रूप में जन्म लिया और बाल्यकाल में ही कालिया नाग, कंस, बकासुर जैसे राक्षसों का वध कर दिया था।
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एक बार तो इंद्र ने भी स्वयं का अभिमान प्रकट करने के लिए गोकुल में भारी वर्षा आरंभ कर दी। इंद्र का घमंड चकनाचूर करने के लिए नटवर गिरधारी ने अपनी अनुष्का अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को धारण किया। यह देखकर इंद्र शर्मिंदा हो गए और उन्होंने भगवान से क्षमा मांगी।
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अंत में सभी में प्रसाद वितरित किया गया और दादी सती चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गईं।
फोटो-35
कथा के दौरान दादी सती सभागार में मौजूद श्रद्धालु। संवाद