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Charkhi Dadri News: 15 मिनट बरसे बदरा, गेहूं-सरसों की फसल को नुकसान
Sun, 19 Mar 2023 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 19 Mar 2023 12:15 AM IST
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चरखी दादरी। क्षेत्र में शनिवार दोपहर बाद हल्की बारिश हुई। करीब 15 मिनट की बारिश से सरसों व गेहूं की फसलों में नुकसान होने का अनुमान है। कई भागों में हवा से गेहूं की फसल बिछ गई और इससे पैदावार पर काफी असर पड़ेगा। वहीं, खलिहान में रखी सरसों भीगने से अब इसकी मशीन से कढ़ाई का कार्य कई दिनों तक नहीं हो सकेगा और किसानों को बेचने के लिए सरसों की नमी दूर होने का इंतजार करना पड़ेगा।
बारिश से शहर के निचले भागों में जलभराव होने से परेशानी भी हुई जबकि अनाज मंडी में करीब 50 क्विंटल सरसों भीग गई। हालांकि पिछले दो दिनों से मौसम परिवर्तनशील होने के कारण अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 7 और पांच डिग्री की गिरावट आई है। शनिवार को बारिश होने से जिले का अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम 8 डिग्री दर्ज किया गया।
बता दें कि दो दिन से आसमान में बादल छाए। शनिवार दोपहर बाद काली घटाएं छाईं और गरज के साथ हल्की बारिश हुई। दोपहर 2 से लेकर 2:15 बजे तक दादरी और आसपास के क्षेत्र में बारिश हुई। इसके अलावा आदमपुर और डाढ़ी समेत समीपवर्ती गांवों में जोरदार बारिश हुई।
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किसानों ने दस दिनों से सरसों की कटाई शुरू की हुई है। जिन किसानों ने सरसों की कटाई कर खलिहान के रूप में रखी है वह बारिश से भीग गई। अब खलिहान में पड़ी सरसों दाने की गुणवत्ता में गिरावट आने का अनुमान है। सरसों का दाना काला रंग का पड़ सकता है। अगर जल्द ही मौसम साफ नहीं हुआ और धूप नहीं खिली तो सरसों का दाना ज्यादा खराब होने का अंदेशा बन जाएगा।
- पकाव के अंतिम चरण में बिछा गेहूं
बारिश के साथ हवा का दबाव बनने से कई भागों में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल बिछ गई। गेहूं की फसल इस समय पकाव के अंतिम चरण में है। गेहूं की बाली में दाना बनने पर वजन हो गया है जिससे हवा के दबाव से पौधे बिछ गए। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जो पौधा नीचे बिछ जाता है उसका पकाव पूूर्ण रूप से नहीं हो पाता। दाना का आकार में छोटा और सिकुड़ जाता है। जिले में करीब 42 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल खड़ी है। अप्रैल प्रथम सप्ताह में गेहूं की कटाई शुरू हो जाएगी।
किसान बोले: राम नै पाड़ा चाला, इब बारिश अर पहल्म गैरा पाला
किसान टेकराम, रामपाल, नंबरदार कृष्ण व रणसिंह का कहना है कि इस समय बारिश से नुकसान के सिवाय कुछ फायदा नहीं होने वाला है। बारिश से सरसों का खलिहान भीगने पर परेशानी बढ़ गई है। धूप खिलने पर खलिहान को पाड़कर सुखाना पड़ेगा तब जाकर थ्रेशर से सरसों की कढ़ाई हो सकेगी। कटी हुई सरसों भीगने पर अब इसकी कढ़ाई में और देरी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले पाला से फसलों को नुकसान हुआ और बची कसर बारिश व हवा ने अब पूरी कर दी।
- शहर की सड़कों पर भरा पानी, एक घंटे बाद हुई निकासी
नगर के लाजपतराय चौक, तिकोना पार्क,मेन बाजार, काठमंडी, पुरानी अनाज मंडी सहित कई निचले भागों में बारिश का पानी भरने से सीवर मैनहोल ऊपर तक भर गए जिससे पानी सड़कों पर भर गया। पुरानी अनाज मंडी रोड पर पानी भरने ये लोगों को आवागमन में दिक्कतें हुईं। करीब एक घंटे बाद सड़कों से पानी की निकासी हो पाई।
- नई अनाज मंडी भीगी सरसों
बारिश से नई अनाज मंडी में बिक्री के लिए आई सरसों भी भीग गई। करीब 50 क्विंटल सरसों भीग गई। मंडी में अभी सरसों की आवक कम हो रही है क्योंकि मौसम खराब होने की वजह से किसान सरसों की कढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। अब तो बारिश होने पर कढ़ाई एक सप्ताह और देरी से हो पाएगी।
अब तो बारिश से नुकसान ही है। खलिहान में सरसों भीगने पर दाने की गुणवत्ता भी खराब होने का अंदेशा बन जाता है। गेहूं की फसल बिछ जाने पर पकाव सौ प्रतिशत नहीं हो पाएगा। दाना का आकार छोटा रह जाएगा। बिछी हुई फसल की कटाई करने में भी किसान के समक्ष कठिनाई आएगी।
-डॉ. जितेंद्र सिहाग, तकनीकी कृषि अधिकारी
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बारिश से शहर के निचले भागों में जलभराव होने से परेशानी भी हुई जबकि अनाज मंडी में करीब 50 क्विंटल सरसों भीग गई। हालांकि पिछले दो दिनों से मौसम परिवर्तनशील होने के कारण अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 7 और पांच डिग्री की गिरावट आई है। शनिवार को बारिश होने से जिले का अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम 8 डिग्री दर्ज किया गया।
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बता दें कि दो दिन से आसमान में बादल छाए। शनिवार दोपहर बाद काली घटाएं छाईं और गरज के साथ हल्की बारिश हुई। दोपहर 2 से लेकर 2:15 बजे तक दादरी और आसपास के क्षेत्र में बारिश हुई। इसके अलावा आदमपुर और डाढ़ी समेत समीपवर्ती गांवों में जोरदार बारिश हुई।
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किसानों ने दस दिनों से सरसों की कटाई शुरू की हुई है। जिन किसानों ने सरसों की कटाई कर खलिहान के रूप में रखी है वह बारिश से भीग गई। अब खलिहान में पड़ी सरसों दाने की गुणवत्ता में गिरावट आने का अनुमान है। सरसों का दाना काला रंग का पड़ सकता है। अगर जल्द ही मौसम साफ नहीं हुआ और धूप नहीं खिली तो सरसों का दाना ज्यादा खराब होने का अंदेशा बन जाएगा।
- पकाव के अंतिम चरण में बिछा गेहूं
बारिश के साथ हवा का दबाव बनने से कई भागों में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल बिछ गई। गेहूं की फसल इस समय पकाव के अंतिम चरण में है। गेहूं की बाली में दाना बनने पर वजन हो गया है जिससे हवा के दबाव से पौधे बिछ गए। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जो पौधा नीचे बिछ जाता है उसका पकाव पूूर्ण रूप से नहीं हो पाता। दाना का आकार में छोटा और सिकुड़ जाता है। जिले में करीब 42 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल खड़ी है। अप्रैल प्रथम सप्ताह में गेहूं की कटाई शुरू हो जाएगी।
किसान बोले: राम नै पाड़ा चाला, इब बारिश अर पहल्म गैरा पाला
किसान टेकराम, रामपाल, नंबरदार कृष्ण व रणसिंह का कहना है कि इस समय बारिश से नुकसान के सिवाय कुछ फायदा नहीं होने वाला है। बारिश से सरसों का खलिहान भीगने पर परेशानी बढ़ गई है। धूप खिलने पर खलिहान को पाड़कर सुखाना पड़ेगा तब जाकर थ्रेशर से सरसों की कढ़ाई हो सकेगी। कटी हुई सरसों भीगने पर अब इसकी कढ़ाई में और देरी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले पाला से फसलों को नुकसान हुआ और बची कसर बारिश व हवा ने अब पूरी कर दी।
- शहर की सड़कों पर भरा पानी, एक घंटे बाद हुई निकासी
नगर के लाजपतराय चौक, तिकोना पार्क,मेन बाजार, काठमंडी, पुरानी अनाज मंडी सहित कई निचले भागों में बारिश का पानी भरने से सीवर मैनहोल ऊपर तक भर गए जिससे पानी सड़कों पर भर गया। पुरानी अनाज मंडी रोड पर पानी भरने ये लोगों को आवागमन में दिक्कतें हुईं। करीब एक घंटे बाद सड़कों से पानी की निकासी हो पाई।
- नई अनाज मंडी भीगी सरसों
बारिश से नई अनाज मंडी में बिक्री के लिए आई सरसों भी भीग गई। करीब 50 क्विंटल सरसों भीग गई। मंडी में अभी सरसों की आवक कम हो रही है क्योंकि मौसम खराब होने की वजह से किसान सरसों की कढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। अब तो बारिश होने पर कढ़ाई एक सप्ताह और देरी से हो पाएगी।
अब तो बारिश से नुकसान ही है। खलिहान में सरसों भीगने पर दाने की गुणवत्ता भी खराब होने का अंदेशा बन जाता है। गेहूं की फसल बिछ जाने पर पकाव सौ प्रतिशत नहीं हो पाएगा। दाना का आकार छोटा रह जाएगा। बिछी हुई फसल की कटाई करने में भी किसान के समक्ष कठिनाई आएगी।
-डॉ. जितेंद्र सिहाग, तकनीकी कृषि अधिकारी