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Charkhi Dadri News: हीरा इंडोर अकादमी में तैयार हो रहे बैडमिंटन के रत्न
Sun, 07 Apr 2024 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 07 Apr 2024 01:03 AM IST
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हीरा इंडोर बैडमिंटन स्टेडियम में अभ्यास करते खिलाड़ी। संवाद
हीरा इंडोर बैडमिंटन एकेडमी के खिलाड़ी जीत चुके 40 पदक, होनहार खिलाड़ी ईशान राष्ट्रीय स्तर पर दिखा चुका खेल प्रतिभा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। शहर स्थित हीरा बैडमिंटन एकेडमी के 22 गुना 44 आकार के गेम कोर्ट में बैडमिंटन खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं। कई प्रतिभावान खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में अपना शानदार प्रदर्शन कर करीब 40 पदक जीत चुके हैं। जिला बैडमिंटन एसोसिएशन भी हर साल जिलास्तरीय स्पर्धाएं करवाकर हुनर को आगे लाने की सार्थक पहल कर रही है।
बैडमिंटन एसोसिएशन के जिला महासचिव लोकेश गुप्ता ने बताया कि बैडमिंटन एकेडमी की शुरुआत करीब चार साल पहले की गई। शुरुआत में यहां करीब 15 खिलाड़ी ही आते थे, लेकिन अब खिलाड़ियों की संख्या बढ़कर 30 पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि जिले में पिछले कुछ सालों में बैडमिंटन के प्रति युवाओं का रुझान काफी बढ़ा है। खास बात ये है कि स्कूली विद्यार्थी भी बैडमिंटन में दिलचस्पी ले रहे हैं।
उन्होंने बताया कि एकेडमी 30 में से एक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुका है, जबकि 15 खिलाड़ी राज्यस्तरीय स्पर्धाओं में मेडल लाकर जिले का नाम रोशन कर चुके हैं। लोकेश गुप्ता ने बताया कि एकेडमी के खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में 20-20 पदक जीत चुके हैं।
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ईशान रोहिल्ला है एकेडमी का गोल्डन प्लेयर
एकेडमी के 40 में से 20 पदक अकेले राष्ट्रीय खिलाड़ी ईशान रोहिल्ला ने जीते हैं। ईशान एकेडमी का स्थायी खिलाड़ी हैं और कोच नरेश सैनी से प्रशिक्षण लेकर सफलता की सीढ़ी पर अग्रसर है। ईशान लगातार स्पर्धाओं में अपने हुनर की छाप छोड़ रहे हैं।
ये है कि प्रवेश प्रक्रिया
लोकेश गुप्ता ने बताया कि खिलाड़ियों की उम्र कम होने के कारण उनका ट्रायल नहीं लिया जाता है। खिलाड़ी की उम्र कम से कम 7 साल होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि खिलाड़ी प्रतिदिन शाम को 4 से 7 बजे तक यहां अभ्यास करते हैं और फिर घर चले जाते हैं।
खिलाड़ी बोले- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक लाना है लक्ष्य
अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में देश के लिए पदक जीतना मेरा सपना है। इस सपने को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा हूं। एकेडमी में खेल कौशल निखारने में काफी मदद मिली है और इसी का परिणाम है कि राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर पहचान बना पाया। -ईशान रोहिल्ला, खिलाड़ी
नौकरी ही नहीं खेलों के जरिये भी माता-पिता, परिवार, क्षेत्र, जिले, राज्य और देश का नाम रोशन किया जा सकता है। मेरा सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना है और फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचना ही मेरा लक्ष्य है। राज्य स्तरीय स्पर्धाओं में प्रतिभा दिखाने में कामयाब रहा हूं। - गोपीचंद, खिलाड़ी
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चरखी दादरी। शहर स्थित हीरा बैडमिंटन एकेडमी के 22 गुना 44 आकार के गेम कोर्ट में बैडमिंटन खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं। कई प्रतिभावान खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में अपना शानदार प्रदर्शन कर करीब 40 पदक जीत चुके हैं। जिला बैडमिंटन एसोसिएशन भी हर साल जिलास्तरीय स्पर्धाएं करवाकर हुनर को आगे लाने की सार्थक पहल कर रही है।
बैडमिंटन एसोसिएशन के जिला महासचिव लोकेश गुप्ता ने बताया कि बैडमिंटन एकेडमी की शुरुआत करीब चार साल पहले की गई। शुरुआत में यहां करीब 15 खिलाड़ी ही आते थे, लेकिन अब खिलाड़ियों की संख्या बढ़कर 30 पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि जिले में पिछले कुछ सालों में बैडमिंटन के प्रति युवाओं का रुझान काफी बढ़ा है। खास बात ये है कि स्कूली विद्यार्थी भी बैडमिंटन में दिलचस्पी ले रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि एकेडमी 30 में से एक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुका है, जबकि 15 खिलाड़ी राज्यस्तरीय स्पर्धाओं में मेडल लाकर जिले का नाम रोशन कर चुके हैं। लोकेश गुप्ता ने बताया कि एकेडमी के खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में 20-20 पदक जीत चुके हैं।
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ईशान रोहिल्ला है एकेडमी का गोल्डन प्लेयर
एकेडमी के 40 में से 20 पदक अकेले राष्ट्रीय खिलाड़ी ईशान रोहिल्ला ने जीते हैं। ईशान एकेडमी का स्थायी खिलाड़ी हैं और कोच नरेश सैनी से प्रशिक्षण लेकर सफलता की सीढ़ी पर अग्रसर है। ईशान लगातार स्पर्धाओं में अपने हुनर की छाप छोड़ रहे हैं।
ये है कि प्रवेश प्रक्रिया
लोकेश गुप्ता ने बताया कि खिलाड़ियों की उम्र कम होने के कारण उनका ट्रायल नहीं लिया जाता है। खिलाड़ी की उम्र कम से कम 7 साल होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि खिलाड़ी प्रतिदिन शाम को 4 से 7 बजे तक यहां अभ्यास करते हैं और फिर घर चले जाते हैं।
खिलाड़ी बोले- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक लाना है लक्ष्य
अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में देश के लिए पदक जीतना मेरा सपना है। इस सपने को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा हूं। एकेडमी में खेल कौशल निखारने में काफी मदद मिली है और इसी का परिणाम है कि राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर पहचान बना पाया। -ईशान रोहिल्ला, खिलाड़ी
नौकरी ही नहीं खेलों के जरिये भी माता-पिता, परिवार, क्षेत्र, जिले, राज्य और देश का नाम रोशन किया जा सकता है। मेरा सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना है और फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचना ही मेरा लक्ष्य है। राज्य स्तरीय स्पर्धाओं में प्रतिभा दिखाने में कामयाब रहा हूं। - गोपीचंद, खिलाड़ी