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Charkhi Dadri News: जाम से जूझ रहा बाढड़ा, दस साल बाद भी नहीं मिला बाईपास
Sun, 23 Jun 2024 03:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 23 Jun 2024 03:53 AM IST
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बाढड़ा में जुई रोड पर लगा वाहनों का जाम।
बाढड़ा। कस्बे में बाईपास न होने से मुख्य चौक पर हर समय वाहनों से जाम रहता है। इससे व्यापारी व आमजन परेशानी से जूझ रहे हैं। चारों सड़कों के दोनों तरफ अवैध तरीके से वाहनों, रेहड़ियों के जमावड़े से यहां से गुजरना मुश्किल हो रहा है। समस्या के समाधान न होने से प्रशासन के प्रति लोगों में रोष बना हुआ है।
व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष बलजीत सिंह हंसावास, जगत सिंह बाढड़ा, व्यापारी नेता जयबीर काकड़ौली, प्रदीप पंचगावां, सतबीर, महेश काकड़ौली, नरेद्र जांगड़ा आदि ने बताया कि आबादी बढ़ने से अब पुरानी सड़कों पर अतिक्रमण की भरमार बनी हुई है। बार- बार सरकार से बाईपास निर्माण की अपील कर रहे हैं। केवल कोरे आश्वासन मिल रहे हैं। जाम के कारण व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
10 हजार से अधिक आबादी वाले बाढड़ा को आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। कस्बे में आवागमन के लिए न तो चौड़ी सड़कें हैं, जो हैं उन पर भी रेहड़ी संचालकों, दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है। मुख्य क्रांतिकारी चौक से बाढड़ा जुई, सतनाली, लोहारु व चरखी दादरी के लिए प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में इनको अधिकतर समय तक जाम में ही फंसा रहना पड़ता है।
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जनता की मांग पर प्रशासन ने रिंग रोड या मिनी बाइपास का दो बार प्रस्ताव भेज गया, जो पिछले 10 साल से केवल कागजी कार्यवाही में उलझ कर रह गया है। सांसद धर्मबीर सिंह के मांग-पत्र पर लोकनिर्माण विभाग ने मिनी बाइपास की फाइल को अंतिम रूप तक पहुंचा दिया है, अब उसका भी बजट स्वीकृत होने का इंतजार है।
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व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष बलजीत सिंह हंसावास, जगत सिंह बाढड़ा, व्यापारी नेता जयबीर काकड़ौली, प्रदीप पंचगावां, सतबीर, महेश काकड़ौली, नरेद्र जांगड़ा आदि ने बताया कि आबादी बढ़ने से अब पुरानी सड़कों पर अतिक्रमण की भरमार बनी हुई है। बार- बार सरकार से बाईपास निर्माण की अपील कर रहे हैं। केवल कोरे आश्वासन मिल रहे हैं। जाम के कारण व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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10 हजार से अधिक आबादी वाले बाढड़ा को आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। कस्बे में आवागमन के लिए न तो चौड़ी सड़कें हैं, जो हैं उन पर भी रेहड़ी संचालकों, दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है। मुख्य क्रांतिकारी चौक से बाढड़ा जुई, सतनाली, लोहारु व चरखी दादरी के लिए प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में इनको अधिकतर समय तक जाम में ही फंसा रहना पड़ता है।
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जनता की मांग पर प्रशासन ने रिंग रोड या मिनी बाइपास का दो बार प्रस्ताव भेज गया, जो पिछले 10 साल से केवल कागजी कार्यवाही में उलझ कर रह गया है। सांसद धर्मबीर सिंह के मांग-पत्र पर लोकनिर्माण विभाग ने मिनी बाइपास की फाइल को अंतिम रूप तक पहुंचा दिया है, अब उसका भी बजट स्वीकृत होने का इंतजार है।