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Charkhi Dadri News: कांग्रेस बाढड़ा की खोई सीट पाने तो भाजपा दूसरी बार कमल खिलाने की जुगत में
Sat, 28 Sep 2024 04:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 28 Sep 2024 04:25 AM IST
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ग्राउंड रिपोर्ट
लगातार तीन हार झेलने के बाद कांग्रेस ने बदला प्रत्याशी, पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के बेटे के बजाय इस बार दामाद को उतारा मैदान में
- भाजपा ने एक बार निर्दलीय चुनाव लड़ चुके उमेद पातुवास पर खेला दांव
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी/बाढड़ा। बाढड़ा सीट पर इस चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों की नजर है। कांग्रेस इस खोई सीट को वापस पाने की जुगत में है। भाजपा यहां दूसरी बार कमल खिलाने के फिराक में है। इतना ही नहीं, टिकट कटने पर हलके के नेताओं ने भी दल बदला है। इसका असर चुनावी समीकरण पर पड़ेगा। इतना ही नहीं निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनावी समीकरण बिगाड़ते नजर आ रहे हैं।
बाढड़ा हलके की बात करें तो कांग्रेस ने लगातार चौथी बार बंसीलाल परिवार पर दांव खेला है। पिछले तीन चुनावों में कांग्रेस ने स्वर्गीय बंसीलाल के बड़े बेटे एवं बीसीसीआई के पूर्व चेयरमैन रणबीर महेंद्रा को मैदान में उतारा था। वह तीनों चुनाव हार गए थे। इस बार लोहारू हलके से चुनाव लड़ने वाले बंसीलाल के दामाद सोमवीर श्योराण को कांग्रेस ने बाढड़ा हलके से चुनाव लड़वाया है। वहीं, भाजपा ने उमेद पातुवास को अपने प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा है। उमेद निर्दलीय एक चुनाव लड़ चुके हैं।
वहीं, बाढड़ा हलके में टिकट वितरण से खफा होकर पूर्व विधायक एवं भाजपा किसान मोर्चा सुखविंद्र मांढ़ी ने पार्टी छोड़ी थी। वह कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं। उनके अलावा टिकट न मिलने पर कांग्रेस नेता सोमवीर घसोला ने निर्दलीय ताल ठोकी है। वह भी वोट बैंक प्रभावित करेंगे। जजपा की बात करें तो नए चेहरे के रूप में कर्नल यशवीर सिंह को चुनावी रण में उतारा है। वहीं, इनेलो-बसपा के उम्मीदवार के तौर पर जिला अध्यक्ष विजय पंचगांव मैदान में हैं।
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- यह रहा बाढड़ा हलके के 13 चुनावों का इतिहास
बाढड़ा हलके की अगर बात करें तो यह सीट वर्ष 1972 और 2005 में कांग्रेस के खाते में गई है। वहीं, वर्ष 2014 में यह सीट भाजपा ने जीती थी। वर्ष 1982 और 87 में यह सीट लोकदल ने जीती। 1991 व 1996 के चुनाव में इस सीट से हरियाणा विकास पार्टी के उम्मीदवार विजयी हुए। वर्ष 2000 व 2009 में यहां से इनेलो प्रत्याशी विजेता बना। वर्ष 2019 में यह सीट जजपा के खाते में आई। वीएचपी व जनता पार्टी के खाते में एक-एक बार सीट आई जबकि एक बार निर्दलीय उम्मीदवार को हलके के मतदाताओं ने विधानसभा में भेजा।
- धीमी रही विकास की रफ्तार, लोगों ने झेली परेशानी
बाढड़ा हलके के मतदाता हरपाल, जितेंद्र, सुनील और सतीश का कहना है कि सरकार ने बाढड़ा को उपमंडल का दर्जा तो दे दिया, लेकिन साढ़े 7 साल से अधिक समय बीतने के बाद भी विकास की रफ्तार धीमी है। अब तक न तो तमाम कार्यालय खुल पाए हैं न ही उपमंडल के लिहाज से अधिकारी तैनात हैं। उपमंडल में सरकारी भवनों की कमी खल रही है।
- ये हैं बाढड़ा के चुनावी मुद्दे
- बाढड़ा में बाईपास निर्माण।
- किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन न मिलना।
- अनाज मंडी का दायरा छोटा पड़ना।
- स्वास्थ्य सेवाओं की कमी।
- जाम की समस्या
- बाढड़ा हलके से जुड़े तथ्य
कुल मतदाता-1,97,966
महिला मतदाता-93,644
पुरुष मतदाता-1,04,321
मतदान केंद्रों की संख्या- 239
क्रिटीकल बूथ- 52
फोटो 28
बाढड़ा कस्बे में ताश खेलते हुए चुनावी चर्चा करते ग्रामीण। संवाद
फोटो 29
भाजपा प्रत्याशी उमेद पातुवास।
फोटो 30
कांग्रेस प्रत्याशी सोमवीर श्योराण।
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लगातार तीन हार झेलने के बाद कांग्रेस ने बदला प्रत्याशी, पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के बेटे के बजाय इस बार दामाद को उतारा मैदान में
- भाजपा ने एक बार निर्दलीय चुनाव लड़ चुके उमेद पातुवास पर खेला दांव
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी/बाढड़ा। बाढड़ा सीट पर इस चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों की नजर है। कांग्रेस इस खोई सीट को वापस पाने की जुगत में है। भाजपा यहां दूसरी बार कमल खिलाने के फिराक में है। इतना ही नहीं, टिकट कटने पर हलके के नेताओं ने भी दल बदला है। इसका असर चुनावी समीकरण पर पड़ेगा। इतना ही नहीं निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनावी समीकरण बिगाड़ते नजर आ रहे हैं।
बाढड़ा हलके की बात करें तो कांग्रेस ने लगातार चौथी बार बंसीलाल परिवार पर दांव खेला है। पिछले तीन चुनावों में कांग्रेस ने स्वर्गीय बंसीलाल के बड़े बेटे एवं बीसीसीआई के पूर्व चेयरमैन रणबीर महेंद्रा को मैदान में उतारा था। वह तीनों चुनाव हार गए थे। इस बार लोहारू हलके से चुनाव लड़ने वाले बंसीलाल के दामाद सोमवीर श्योराण को कांग्रेस ने बाढड़ा हलके से चुनाव लड़वाया है। वहीं, भाजपा ने उमेद पातुवास को अपने प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा है। उमेद निर्दलीय एक चुनाव लड़ चुके हैं।
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वहीं, बाढड़ा हलके में टिकट वितरण से खफा होकर पूर्व विधायक एवं भाजपा किसान मोर्चा सुखविंद्र मांढ़ी ने पार्टी छोड़ी थी। वह कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं। उनके अलावा टिकट न मिलने पर कांग्रेस नेता सोमवीर घसोला ने निर्दलीय ताल ठोकी है। वह भी वोट बैंक प्रभावित करेंगे। जजपा की बात करें तो नए चेहरे के रूप में कर्नल यशवीर सिंह को चुनावी रण में उतारा है। वहीं, इनेलो-बसपा के उम्मीदवार के तौर पर जिला अध्यक्ष विजय पंचगांव मैदान में हैं।
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- यह रहा बाढड़ा हलके के 13 चुनावों का इतिहास
बाढड़ा हलके की अगर बात करें तो यह सीट वर्ष 1972 और 2005 में कांग्रेस के खाते में गई है। वहीं, वर्ष 2014 में यह सीट भाजपा ने जीती थी। वर्ष 1982 और 87 में यह सीट लोकदल ने जीती। 1991 व 1996 के चुनाव में इस सीट से हरियाणा विकास पार्टी के उम्मीदवार विजयी हुए। वर्ष 2000 व 2009 में यहां से इनेलो प्रत्याशी विजेता बना। वर्ष 2019 में यह सीट जजपा के खाते में आई। वीएचपी व जनता पार्टी के खाते में एक-एक बार सीट आई जबकि एक बार निर्दलीय उम्मीदवार को हलके के मतदाताओं ने विधानसभा में भेजा।
- धीमी रही विकास की रफ्तार, लोगों ने झेली परेशानी
बाढड़ा हलके के मतदाता हरपाल, जितेंद्र, सुनील और सतीश का कहना है कि सरकार ने बाढड़ा को उपमंडल का दर्जा तो दे दिया, लेकिन साढ़े 7 साल से अधिक समय बीतने के बाद भी विकास की रफ्तार धीमी है। अब तक न तो तमाम कार्यालय खुल पाए हैं न ही उपमंडल के लिहाज से अधिकारी तैनात हैं। उपमंडल में सरकारी भवनों की कमी खल रही है।
- ये हैं बाढड़ा के चुनावी मुद्दे
- बाढड़ा में बाईपास निर्माण।
- किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन न मिलना।
- अनाज मंडी का दायरा छोटा पड़ना।
- स्वास्थ्य सेवाओं की कमी।
- जाम की समस्या
- बाढड़ा हलके से जुड़े तथ्य
कुल मतदाता-1,97,966
महिला मतदाता-93,644
पुरुष मतदाता-1,04,321
मतदान केंद्रों की संख्या- 239
क्रिटीकल बूथ- 52
फोटो 28
बाढड़ा कस्बे में ताश खेलते हुए चुनावी चर्चा करते ग्रामीण। संवाद
फोटो 29
भाजपा प्रत्याशी उमेद पातुवास।
फोटो 30
कांग्रेस प्रत्याशी सोमवीर श्योराण।