फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Charkhi Dadri News ›   Ayushman card holders did not get treatment in private hospital, patients sent back

Charkhi Dadri News: निजी अस्पताल में आयुष्मान कार्डधारकों को नहीं मिला उपचार, मरीजों को वापस भेजा

Sun, 17 Mar 2024 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sun, 17 Mar 2024 12:50 AM IST
विज्ञापन
Ayushman card holders did not get treatment in private hospital, patients sent back
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

फतेहाबाद। आयुष्मान भारत के पैनल में आने वाले जिले के 19 अस्पतालों के चिकित्सकों ने बकाया राशि न मिलने के विरोध में कार्ड धारकों का उपचार करने से मना कर दिया। शनिवार को जब लोग कार्ड पर अपना उपचार करवाने आए तो चिकित्सकों ने उनको मना कर दिया, जिस कारण मरीजों को लौटना पड़ा।
सरकार ने बकाया राशि को जमा नहीं करवाया तो आयुष्मान भारत और चिरायु योजना में शामिल जिले के करीब पांच लाख पात्रों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले के निजी अस्पतालों का करीब 10 करोड़ रुपये से भी ज्यादा के बिल बकाया पड़े हैं। जिले में इस योजना के तहत कुल 6 लाख 89 हजार पात्र हैं और इनमें से 4 लाख 93 हजार को कार्ड भी जारी कर दिए गए हैं।
विज्ञापन

पैनल में शामिल अस्पताल के संचालकों का कहना है कि सरकार द्वारा योजना के तहत किए गए उपचार की एवज में जो भुगतान किया जा रहा है, वह पैकेज के अनुसार न देकर कटौती करके दिया जा रहा है। इसके चलते आईएमए को यह फैसला लेने पर मजबूर होना पड़ा है। इसको लेकर आईएमए द्वारा उपायुक्त राहुल नरवाल के अलावा उप सिविल सर्जन डॉ. संगीता अबरोल को ज्ञापन भी दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

बता दें कि जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत 19 निजी अस्पताल पैनल में शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग से मिली रिपोर्ट के अनुसार जिले के निजी अस्पतालों को पिछले साल अक्टूबर माह तक 68 करोड़ 59 लाख का भुगतान हो चुका है। ये भुगतान 42 हजार 297 मरीजों के उपचार का किया गया था। पैनल में शामिल निजी अस्पताल संचालकोंं का कहना है कि अनुबंध के अनुसार मरीज के डिस्चार्ज के 15 दिन में भुगतान होना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। जो पैकेज है, उसके अनुसार भुगतान नहीं किया जा रहा है और कटौती की जा रही है।

जिले के ये अस्पताल पैनल में हैं शामिल
- सद्भावना अस्पताल, फतेहाबाद।
- आई क्यू अस्पताल, फतेहाबाद।
- वधवा सर्जिकल अस्पताल, फतेहाबाद।
- जयपुर चिल्ड्रन अस्पताल, फतेहाबाद।
- लाइफ केयर अस्पताल फतेहाबाद।
- उम्मीद अस्पताल फतेहाबाद।
- पारूल ईएनटी, स्किन एवं लेजर सेंटर टोहाना।
- राजन आई, हार्ट एवं लेजर सेंटर टोहाना।
- राजस्थान मेडिकल सेंटर टोहाना।
- जनता आई एवं मैटरनिटी अस्पताल टोहाना।
- अरोड़ा अस्पताल टोहाना।
- मेहता आई अस्पताल टोहाना।
- जैन चैरिटेबल अस्पताल टोहाना।
- सांई अस्पताल टोहाना
- कक्कड़ नर्सिंग होम, टोहाना।
- खन्ना ईएनटी टोहाना।
- दीपांश भाटिया अस्पताल टोहाना।
- शालिनी सर्जिकल एवं मैटरनिटी अस्पताल, टोहाना
- गोयल नर्सिंग होम, रतिया

-------
चिरायु योजना में शामिल लाभपात्र भी हो रहे प्रभावित
आयुष्मान भारत योजना में वर्ष 2011 की जनगणना में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को शामिल किया गया था। इसके बाद अब सरकार ने 1.80 लाख से कम आय वाले परिवारों को योजना में शामिल कर लिया और चिरायु योजना का नाम दे दिया। इसके अलावा 1.80 लाख से 3 लाख रुपये वार्षिक आय वाले परिवारों को भी योजना में शामिल किया गया है। इनसे 1500 रुपये वार्षिक प्रीमियम लिया गया है। आईएमए का कहना है कि वह चिरायु योजना में शामिल पात्रों का भी उपचार नहीं करेंगे।

------
मेरी माता के छाती में दर्द था। इसके चलते मैं फतेहाबाद के निजी अस्पताल में उपचार करवाने के लिए लाया था। अस्पताल स्टाफ ने आयुष्मान कार्ड पर उपचार करने से मना कर दिया। डॉक्टर ने बताया कि इलाज के लिए करीब 50 हजार रुपये की जरूरत होगी। मैं मजदूरी करता हूं। मेरे लिए यह बड़ी कीमत है। - माेनू, निवासी नागपुर




मैं दिल के उपचार के लिए शहर के निजी अस्पताल में आया था। मैं एक मंगलामुखी हूं और विवाह या बच्चे के जन्म पर खुशी के नाम से बधाई लेकर गुजारा करता हूं। मेरा आयुष्मान कार्ड तो बन गया है, लेकिन जब मुझे उपचार की जरूरत पड़ी तो आयुष्मान कार्ड पर डॉक्टर ने उपचार करने से मना कर दिया। -अमन, मंगलामुखी



आयुष्मान भारत योजना के तहत पैनल में शामिल निजी अस्पतालों ने बकाया भुगतान न होने तक योजना के लाभपात्रों का उपचार न करने का फैसला लिया है। मरीजों का उपचार करने वाले अस्पतालों का भुगतान कटौती करके किया जा रहा है और उसमें भी 6 महीने तक का समय लग रहा है। अनुबंध के अनुसार मरीज के डिस्चार्ज के 15 दिन बाद भुगतान होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। आईएमए इसको लेकर कई बार मुद्दा उठा चुका है, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। - डॉ. अमित आहूजा, सद्भावना अस्पताल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed