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Charkhi Dadri News: दंपती आत्महत्या मामले में परिवार के पक्ष में आए आर्य समाज और कन्या गुरुकुल समिति

Mon, 03 Apr 2023 10:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Mon, 03 Apr 2023 10:47 PM IST
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Arya Samaj and Kanya Gurukul Samiti came in favor of the family in the couple's suicide case
एसएचओ को ज्ञापन सौंपते आर्य समाज और कन्या गुरुकुल प्रबंधन समिति के पदाधिकारी।
चरखी दादरी/बाढड़ा। बुजुर्ग दंपती मौत मामले में आर्य समाज बाढड़ा और कन्या गुरुकुल महाविद्यालय प्रबंधन समिति परिवार के पक्ष में उतर आए हैं। सोमवार को बाढड़ा थाने में पहुंचकर एसएचओ कप्तान सिंह से मुलाकात की और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। जनसंगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि मृतक जगदीशचंद आर्य ने सुसाइड नोट मानसिक परेशानी के चलते लिखा और इसमें लिखी गईं सभी बातें सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मृतक दंपती का बेटा और पुत्रवधू ऐसे नहीं हैं।
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आर्य समाज बाढड़ा और कन्या गुरुकुल महाविद्यालय की ओर से इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग के लिए अलग-अलग ज्ञापन भी दिए गए। आर्य समाज और कन्या गुरुकुल महाविद्यालय प्रबंधन समिति की ओर से दिए गए ज्ञापन में बताया गया कि जगदीशचंद और उनकी पत्नी भागली देवी का आत्महत्या करना बेहद दर्दनाक और हृदय विदारक घटना है। करीब तीन साल पहले भागली देवी को लकवा आ गया था। तब से वे अपने बेटे विरेंद्र के पास रहे रहे थे। समाज के लोग जब भी उनसे मिलने जाते थे तो वो साफ-सुथरे वस्त्रों में और अच्छे बिस्तर पर मिलते थे। वो पुत्र विरेंद्र व पुत्रवधू सुनीता के सेवा कार्य की प्रशंसा करते थे। उन्होंने कभी भी सेवा में कमी की चर्चा नहीं की। जगदीशचंद दानी प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। वो समय-समय पर अपनी इच्छा अनुसार कन्या गुरुकुल पंचगांव, गरुकुल दादरी, बाढड़ा, भांडवा, आर्यनगर, बेरला, पांडवान व अन्य स्थानों पर आयोजित आर्य समाज के कार्यक्रमों में दान भी करते थे। जगदीशचंद आर्य कन्या गुरुकुल पंचगांव के आजीवन सदस्य रहे और वर्षों तक अधिकारी के तौर पर भी गुरुकुल की सेवा की। उन्होंने आवेश में आकर ये सब लिख और बहुत गलत कदम उठाया। इससे परिवार कलंकित हुआ है और समाज में गलत संदेश गया है। प्रशासन से मांग है कि पूरी और सही जांच कर मामले को निरस्त किया जाए।
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क्या है मामला
मूलरूप से गोपी निवासी और फिलहाल बाढड़ा में रह रहे जगदीशचंद और भागली देवी नामक बुजुर्ग दंपती ने 29 मार्च की रात घर पर जहरीला पदार्थ निगलकर आत्महत्या कर ली थी। मृतक जगदीशचंद ने मरने से पहले पुलिस को एक सुसाइड नोट सौंपा था। इसमें उन्होंने अपने बेटे और दो पुत्रवधू पर प्रताड़ित करने और सही से देखभाल न करने का आरोप लगाया था। इसके आधार पर पुलिस ने मृतक के बेटे और दो पुत्रवधू समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज दर्ज किया था।
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- आश्रम में नहीं दो साल गुरुकुल में रहे थे
जगदीशचंद कन्या गुरुकुल महाविद्यालय प्रबंधन समिति ने ज्ञापन में बताया कि जगदीशचंद ने सुसाइड नोट में लिखा है कि वो दो साल तक अनाथ आश्रम में रहे, जबकि ऐसा नहीं है। दो साल वो गुरुकुल में रहे। गुरुकुल अनाथ आश्रम नहीं शिक्षण संस्थान है।
- आर्य समाज के व्यक्तियों से की जाए पूछताछ
ज्ञापन के जरिये एसएचओ को बताया गया कि पुत्र विरेंद्र और पुत्रवधू सुनीता ने उनकी काफी सेवा की और आर्य समाज से जुड़े लोग इसके गवाह है। पुलिस चाहे तो समाज के किसी भी व्यक्ति से पूछताछ कर सकती है। हर कोई विरेंद्र और सुनीता के सेवाभाव से वाकिफ है।
- पूरा परिवार सहमति देगा तो ही लेते हैं संपत्ति
आर्य समाज प्रधान डॉ. देवेंद्र बोहरा ने बताया कि किसी व्यक्ति विशेष के लिखने से आर्य समाज संपत्ति नहीं लेता। इसके लिए पूरे परिवार की रजामंदी जरूरी है। इस मामले में भी इस नियम का पालन होगा।

आर्य समाज और कन्या गुरुकुल प्रबंधन समिति ने बुजुर्ग सुसाइड मामले में ज्ञापन सौंपे है। पुलिस मामले की निष्पक्ष और सही जांच करेगी। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
-कप्तान सिंह, एसएचओ बाढड़ा
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