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सुदामा-कृष्ण और दुर्योधन-शकुनि की मित्रता को हमेशा रखें याद : स्वामी सच्चिदानंद
Mon, 29 Apr 2024 04:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 29 Apr 2024 04:02 AM IST
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गांव बादल में आयोजित शिविर में व्यायाम करते युवा।
झोझूकलां। आर्यवीर दल की ओर से गांव बादल में आयोजित व्यायाम प्रशिक्षण एवं चरित्र निर्माण शिविर आयोजित किया गया। इसके तीसरे दिन व्यायाम शिक्षक राहुल आर्य, आयुष योग सहायक बिशन सिंह आर्य, सुरेंद्र आर्य ने युवाओं को संगीत के साथ सर्वांग सुंदर व्यायाम के 16 अभ्यास करवाए। इसकी अध्यक्षता करते हुए स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि सुदामा-कृष्ण और दुर्योधन-शकुनि की मित्रता हमेशा याद रखें और इससे जीवन में अच्छे और बुरे मित्र काे पहचानने में सहायता होगी।
स्वामी सच्चिदानंद ने बताया कि सर्वांग सुंदर व्यायाम के अभ्यास से पूरे शरीर का व्यायाम होता है और शरीर सुंदर, सुडौल और आकर्षक बनता है। प्रत्येक व्यक्ति पर आसपास के वातावरण और संगत का प्रभाव पड़ता है। बुरी संगति पाकर अच्छा व्यक्ति भी निकम्मा, अधर्मी, दुर्व्यसनी, नास्तिक, डरपोक बन जाता है, जबकि अच्छी संगति से सामान्य मनुष्य भी श्रेष्ठ आचरण करने को बाध्य हो जाता है। श्रेष्ठ संगति से मनुष्य की गति भी श्रेष्ठ दिशा की ओर होती है। इसलिए हमेशा उत्तम लोगों से संगत रखें।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गंदे नाले में गंगा जल की सात्विकता नहीं होती उसी प्रकार दुर्व्यसनी, हिंसक, व्यभिचारी, चोर प्रकृति, अशुद्ध भाषण करने वाले, कपटी, आलसी, प्रमादी, धन, समय का अपव्यय, दुरुपयोग करने वाले मित्रों में अच्छे गुण नहीं होते, इसलिए तुरंत ही उनकी संगति को त्याग देना चाहिए।
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आयोजन में मास्टर रविंद्र सांगवान, ओमवीर फौजी और मास्टर विजयपाल आदि का विशेष सहयोग रहा। शिविर में कप्तान सत्यवान, धर्मवीर साहब, रामस्वरूप साहब, उमेद सिंह, पूर्व सरपंच कपूर सिंह, बिजेंद्र सिंह डूडी, अजीत सिंह, चौकीदार नरेश, सतवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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स्वामी सच्चिदानंद ने बताया कि सर्वांग सुंदर व्यायाम के अभ्यास से पूरे शरीर का व्यायाम होता है और शरीर सुंदर, सुडौल और आकर्षक बनता है। प्रत्येक व्यक्ति पर आसपास के वातावरण और संगत का प्रभाव पड़ता है। बुरी संगति पाकर अच्छा व्यक्ति भी निकम्मा, अधर्मी, दुर्व्यसनी, नास्तिक, डरपोक बन जाता है, जबकि अच्छी संगति से सामान्य मनुष्य भी श्रेष्ठ आचरण करने को बाध्य हो जाता है। श्रेष्ठ संगति से मनुष्य की गति भी श्रेष्ठ दिशा की ओर होती है। इसलिए हमेशा उत्तम लोगों से संगत रखें।
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उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गंदे नाले में गंगा जल की सात्विकता नहीं होती उसी प्रकार दुर्व्यसनी, हिंसक, व्यभिचारी, चोर प्रकृति, अशुद्ध भाषण करने वाले, कपटी, आलसी, प्रमादी, धन, समय का अपव्यय, दुरुपयोग करने वाले मित्रों में अच्छे गुण नहीं होते, इसलिए तुरंत ही उनकी संगति को त्याग देना चाहिए।
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आयोजन में मास्टर रविंद्र सांगवान, ओमवीर फौजी और मास्टर विजयपाल आदि का विशेष सहयोग रहा। शिविर में कप्तान सत्यवान, धर्मवीर साहब, रामस्वरूप साहब, उमेद सिंह, पूर्व सरपंच कपूर सिंह, बिजेंद्र सिंह डूडी, अजीत सिंह, चौकीदार नरेश, सतवीर सिंह आदि मौजूद रहे।