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Charkhi Dadri News: मटर की खेती के लिए यह अनुकूल समय, बिजाई से पहले मिट्टी और पानी की करवाएं जांच
Tue, 15 Oct 2024 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 15 Oct 2024 01:04 AM IST
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माई सिटी के लिए::
60 से 70 दिन में पककर तैयार हो जाती हैं अर्कल व स्नोबर्ड किस्में, पौधों के बीच की दूरी हो 3 से 5 सेंटीमीटर
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। मटर की खेती के लिए यह अनुकूल समय है। मटर की अर्कल व स्नोबर्ड किस्म अच्छी मानी गई हैं। ये दोनों किस्में 60 से 70 दिन में पककर तैयार हो जाती हैं। वहीं, कृषि विशेषज्ञ की मानें तो किसान बिजाई से पहले खेत की जुताई सही प्रकार से कर लें। पौधे से पौधे की दूरी तीन से पांच सेंटीमीटर तक होनी चाहिए। बिजाई से पहले मिट्टी व पानी की जांच अवश्य करवा लेनी चाहिए।
सर्दी के मौसम में मटर को सब्जी के रूप में बेहद पौष्टिक माना जाता है। इस मौसम में मटर की अगेती व उसके बाद पछेती किस्मों की पैदावार बनी रहती है। मटर स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद गुणकारी होता है। इसमें विटामिन बी, जिंक, मैग्नीशियम, मैगनीज, आयरन, सोडियम, पोटाश के अलावा अन्य कई पोषक होते हैं।
किसान इस समय मटर की फसल की बिजाई कर सकते हैं। यह तापमान इस फसल के लिए अनुकूल है। बिजाई से पहले खेत को समतल बनाएं। तीन से चार बार खाली खेत की जुताई करें। बिजाई के दौरान खूड यानी लाइन से लाइन की दूरी 25 सेंटीमीटर तक होनी चाहिए जबकि पौधे से पौधे की दूरी तीन से पांच से सेंटीमीटर होनी चाहिए।
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- 25 से 30 क्विंटल प्रति एकड़ मिलती है पैदावार
स्नोबर्ड व स्पार्कल व डेब्रेक मटर की बढि़यां किस्में मानी जाती हैं। इनकी औसत पैदावार 25 से 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक मिल सकती है। बिजाई के दौरान बीज की मात्रा 30 से 35 किलोग्राम प्रति एकड़ होना चाहिए। डीएपी खाद की मात्रा 20 किलोग्राम प्रति एकड़ तक डालनी चाहिए। ये तीनों किस्में 60 से 70 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं।
- जरूरत अनुसार किसान डालें खाद
बिजाई से पहले मिट्टी की जांच अवश्य करवा लेनी चाहिए। ताकि, भूमि में मटर के लिए मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी मिल सके। उतनी ही जरूरत के अनुसार खाद का इस्तेमाल हो सके। पानी की जांच भी अवश्य करवानी चाहिए। मटर रेतीला क्षेत्र में भी बोई जा सकती है।
- 20 से 25 दिन में करें पहली सिंचाई
पहली सिंचाई 20 से 25 दिन में कर देनी चाहिए। उसके बाद दूसरी सिंचाई फल या फूल आने पर करें। इस फसल में सिंचाई की कम ही जरूरत पड़ती है। खर-पतवार होने पर खेत से उखाड़ना ही बेहतर उपाय है। रोग का ज्यादा प्रकोप बढ़ने पर मैलाथियान दवा का छिड़काव करें।
वर्सन:
किसान इस समय मटर की बिजाई कर सकते हैं। मटर के बाद किसान गेहूं की पछेती फसल भी ले सकते हैं। बिजाई से पहले मिट्टी व पानी की जांच अवश्य करवाएं। समय-समय पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह जरूर लेते रहें।
-डॉ. जितेंद्र सिहाग, बीएओ, कृषि विभाग
फोटो 27
मटर की ढेरी। स्रोत : इंटरनेट
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60 से 70 दिन में पककर तैयार हो जाती हैं अर्कल व स्नोबर्ड किस्में, पौधों के बीच की दूरी हो 3 से 5 सेंटीमीटर
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। मटर की खेती के लिए यह अनुकूल समय है। मटर की अर्कल व स्नोबर्ड किस्म अच्छी मानी गई हैं। ये दोनों किस्में 60 से 70 दिन में पककर तैयार हो जाती हैं। वहीं, कृषि विशेषज्ञ की मानें तो किसान बिजाई से पहले खेत की जुताई सही प्रकार से कर लें। पौधे से पौधे की दूरी तीन से पांच सेंटीमीटर तक होनी चाहिए। बिजाई से पहले मिट्टी व पानी की जांच अवश्य करवा लेनी चाहिए।
सर्दी के मौसम में मटर को सब्जी के रूप में बेहद पौष्टिक माना जाता है। इस मौसम में मटर की अगेती व उसके बाद पछेती किस्मों की पैदावार बनी रहती है। मटर स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद गुणकारी होता है। इसमें विटामिन बी, जिंक, मैग्नीशियम, मैगनीज, आयरन, सोडियम, पोटाश के अलावा अन्य कई पोषक होते हैं।
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किसान इस समय मटर की फसल की बिजाई कर सकते हैं। यह तापमान इस फसल के लिए अनुकूल है। बिजाई से पहले खेत को समतल बनाएं। तीन से चार बार खाली खेत की जुताई करें। बिजाई के दौरान खूड यानी लाइन से लाइन की दूरी 25 सेंटीमीटर तक होनी चाहिए जबकि पौधे से पौधे की दूरी तीन से पांच से सेंटीमीटर होनी चाहिए।
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- 25 से 30 क्विंटल प्रति एकड़ मिलती है पैदावार
स्नोबर्ड व स्पार्कल व डेब्रेक मटर की बढि़यां किस्में मानी जाती हैं। इनकी औसत पैदावार 25 से 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक मिल सकती है। बिजाई के दौरान बीज की मात्रा 30 से 35 किलोग्राम प्रति एकड़ होना चाहिए। डीएपी खाद की मात्रा 20 किलोग्राम प्रति एकड़ तक डालनी चाहिए। ये तीनों किस्में 60 से 70 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं।
- जरूरत अनुसार किसान डालें खाद
बिजाई से पहले मिट्टी की जांच अवश्य करवा लेनी चाहिए। ताकि, भूमि में मटर के लिए मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी मिल सके। उतनी ही जरूरत के अनुसार खाद का इस्तेमाल हो सके। पानी की जांच भी अवश्य करवानी चाहिए। मटर रेतीला क्षेत्र में भी बोई जा सकती है।
- 20 से 25 दिन में करें पहली सिंचाई
पहली सिंचाई 20 से 25 दिन में कर देनी चाहिए। उसके बाद दूसरी सिंचाई फल या फूल आने पर करें। इस फसल में सिंचाई की कम ही जरूरत पड़ती है। खर-पतवार होने पर खेत से उखाड़ना ही बेहतर उपाय है। रोग का ज्यादा प्रकोप बढ़ने पर मैलाथियान दवा का छिड़काव करें।
वर्सन:
किसान इस समय मटर की बिजाई कर सकते हैं। मटर के बाद किसान गेहूं की पछेती फसल भी ले सकते हैं। बिजाई से पहले मिट्टी व पानी की जांच अवश्य करवाएं। समय-समय पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह जरूर लेते रहें।
-डॉ. जितेंद्र सिहाग, बीएओ, कृषि विभाग
फोटो 27
मटर की ढेरी। स्रोत : इंटरनेट