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Charkhi Dadri News: बिरही कलां में पहुंचे 38 भारतीय व विदेशी प्रजातियों के 689 पक्षी, एशियाई जलपक्षी गणना के लिए पहुंची टीम

Wed, 14 Jan 2026 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Wed, 14 Jan 2026 01:10 AM IST
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689 birds of 38 Indian and foreign species arrived in Birahi Kalan, a team arrived for the Asian waterfowl census
बिरही कलां सेमग्रस्त भूमि पर मौजूद प्रवासी पक्षियों का झुंड।  - फोटो : 1
चरखी दादरी। जिले के गांव बिरही कलां में स्थित जलभराव व सेमग्रस्त जमीन पर हर वर्ष सर्दी के मौसम में आने वाले भारतीय व विदेशी विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों की संख्या में इस बार काफी कमी आई है। मंगलवार को एशियाई जलपक्षी गणना के लिए पहुंची टीम द्वारा किए गए सर्वे में यह तथ्य सामने आए हैं।
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दिल्ली से आए पक्षी विशेषज्ञ टीके रॉय के नेतृत्व में टीम ने बिरही कलां में मंगलवार को करीब पांच घंटे तक सेमग्रस्त भूमि का दौरा कर प्रजातियों व पक्षियों की गणना की। इस दौरान टीम को यहां कुल 38 प्रजातियों के 689 पक्षी मिले। इनमें 22 भारतीय और 16 विदेशी प्रजातियों के पक्षी शामिल हैं। इनमें दो प्रजाति विदेशी और दो प्रजाति भारतीय पक्षियों की ऐसी भी हैं, जो विलुप्त होने की कगार पर हैं। जबकि पिछले वर्ष फरवरी माह में किए गए सर्वे के दौरान यहां 25 भारतीय और 19 विदेशी प्रजातियों के 1094 पक्षी मिले थे। हर वर्ष यहां आने वाले पक्षियों की संख्या में कमी पर टीम ने भी हैरानी जताई और क्षेत्रवासियों से पक्षियों व इस क्षेत्र के संरक्षण में मदद की अपील की।
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चार दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी मिले

टीम को गांव बिरही कलां में चार दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी भी मिले हैं। इनमें दो भारतीय और दो विदेशी प्रजातियां शामिल हैं। विदेशी प्रजातियों में ब्लैक-टेल्ड गोडविट, यूरेशियन वूल्ली-नैक्ड शामिल हैं। वहीं भारतीय प्रजातियों में यूरेशियन स्पून बिल, कॉमन ग्रीनशैंक शामिल हैं। इन दोनों प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाने के लिए वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 के शेड्यूल एक में शामिल किया गया है। इनके अलावा यहां पर बारहैडिड गूज प्रजाति के पक्षी भी मिले हैं। विशेषज्ञ टीके रॉय ने बताया कि बारहैडिड गूज ऐसा पक्षी है, जो माउंट एवरेस्ट चोटी जितनी ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है।
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बर्ड सेंचुरी बनाने की कवायद
बता दें कि गांव बिरही कलां में करीब 70 एकड़ जमीन जलभराव व सेमग्रस्त है। इसमें से 60 एकड़ जमीन ग्राम पंचायत और 10 एकड़ जमीन वन विभाग की है। हर वर्ष सैंकड़ों की संख्या में आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या को देखते हुए इस क्षेत्र को बर्ड सेंचुरी बनाने की कवायदें भी की जा रही हैं। लेकिन ग्राम पंचायत की सहमति न मिल पाने के कारण यह योजना अधर में है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यहां बर्ड सेंचुरी बनती है तो पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
पक्षियों की संख्या कम होना चिंता का विषय : रॉय
पक्षी विशेषज्ञ टीके राय ने बताया कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार पक्षियों की संख्या कम है। यह चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन के कारण भी ऐसा हुआ है। वहीं उपयुक्त स्थान व माहौल न मिल पाने के कारण पक्षियों का प्रजनन भी प्रभावित हो रहा है। टीके रॉय ने बताया कि वे यहां की रिपोर्ट तैयार कर सरकार के साथ-साथ जैव विविधता बोर्ड, वन विभाग व विश्व संगठन को भी भेजेंगे।

चार जिलों के अधिकारियों ने लिया जायजा
बिरही कलां में जलपक्षी गणना के लिए पहुंची टीम में हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड की दादरी जिला समन्वयक बबीता श्योराण, सोनीपत जिला समन्वयक श्योप्रसाद, महेंद्रगढ़ जिला समन्वयक देशराज शर्मा, भिवानी जिला समन्वयक सुरेश कुमार, वन विभाग से डिप्टी रेंजर मंजीत कुमार आदि भी मौजूद रहे।
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