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Charkhi Dadri News: ओलंपिक का सफर तय कर जिले के 6 सूरमाओं ने बढ़ाया देश का मान

Mon, 23 Jun 2025 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Mon, 23 Jun 2025 12:39 AM IST
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6 warriors of the district increased the pride of the country by reaching Olympics
पूर्व ओलंपियन विनेश फोगाट।
चरखी दादरी। खेल शब्द कान में पड़ते ही देशवासियों के जहन में हरियाणा का नाम सबसे पहले आता है। वहीं, हरियाणा की बात करें तो चरखी दादरी जिला अग्रणी है। यहां के 6 सूरमाओं ने ओलंपिक और पैरा ओलंपिक तक का सफर तय कर पदक जीते हैं और सूबे व देश का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान बढ़ाया है।
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दरअसल, आज ओलंपिक दिवस है और यह खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय पटल पर पदक जीतने की यादों को तरोताजा करता है। इतना ही नहीं खिलाड़ियों को धरातल से उठकर ओलंपिक तक का सफर करने की संघर्ष गाथा का भी स्मरण कराता है। दादरी जिले की बात करें तो बॉक्सिंग में स्वर्गीय कैप्टन हवासिंह व राजकुमार सांगवान ने भी अपने समय में ओलंपिक पदक हासिल किया था। वहीं, गीता फोगाट ने देश की महिला कुश्ती को नई दिशा देने का काम किया है। पेश है जिले के ओलंपियन पर एक रिपोर्ट...
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जानिये... जिले के सूरमाओं की ओलंपिक के सफर की कहानी
1-गीता फोगाट: कुश्ती के क्षेत्र में ओलंपिक में जिला को विशेष पहचान दिलाने में गीता फोगाट का नाम आगे आता है। गीता ने अपने पिता महाबीर फोगाट के पास ही प्रशिक्षण लिया और वह ओलंपिक में क्वालिफाई करने और प्रतिस्पर्धा करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान हैं। उन्होंने 2012 में हुए ओलंपिक खेलों में स्वर्णिम उपलब्धि हासिल की थी और देश को नई पहचान दिलाई।
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2- नितेश लुहाच: पैरा बैडमिंटन में भी जिला के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। गत वर्ष हुए पेरिस पैरा ओलंपिक में जिला के गांव नांधा निवासी नितेश लुहाच ने स्वर्ण पदक जीतकर क्षेत्र का नाम चमकाया था। रेल हादसे में उन्होंने पैर गंवाया और फुटबाल खिलाड़ी का सपना अधूरा रह गया। बाद में उन्होंने पैरा बैडमिंटन में शुरुआत की और अब ओलंपिक में नाम कमा चुके हैं।

3- विनेश फोगाट: गांव बलाली निवासी विनेश फोगाट ने भी पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया और वर्ष 2024 में खेलने के लिए भी गई, लेकिन फाइनल मुकाबले में मापदंड पूरा न होने के कारण उनको सफलता हाथ नहीं लगी। उन्होंने भी अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में जिला का मान बढ़ाया और ओलंपिक के दौरान गांव से लेकर महानगरों तक उनकी चर्चा रही।


4- बबीता फोगाट: गांव बलाली निवासी बबीता फोगाट भी ओलंपिक में अपने दाव आजमा चुकीं हैं और देश को नई पहचान दिलाने की कोशिश की। उन्होंने वर्ष 2016 में ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया और भाग लेकर एक बाउट भी की। फिर भी इसमें उनको सफलता हाथ नहीं लगी। हालांकि उन्होंने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती क्षेत्र में देश के लिए कई पदक हासिल किए हैं।
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