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Charkhi Dadri News: जिले में 54.12 प्रतिशत लोगों की बनी आभा आईडी, 70 प्रतिशत आंकड़ा पहुंचने पर घर बैठे बनवा सकेंगे ओपीडी स्लिप
Fri, 03 Apr 2026 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 03 Apr 2026 12:31 AM IST
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दादरी नागरिक अस्पताल ओपीडी में पर्ची बनवाने के लिए कतार में लगे लोग।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। नागरिक अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाओं को व्यवस्थित करने, मरीजों के उपचार व टेस्ट से संबंधित रिकॉर्ड को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के लिए आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) आईडी बनाई जा रही हैं। जिले में अभी तक 5,64,664 में से 3,05,607 लोगों यानी 54.12 प्रतिशत की आभा आईडी बन चुकी है। विभाग की योजना है कि यह आंकड़ा 70 प्रतिशत पहुंचने पर लोग घर बैठे ही ऑनलाइन ओपीडी स्लिप बनवा सकेंगे। इससे लोगों को अस्पतालों में आकर ओपीडी पर्ची बनवाने के लिए लाइनों में लगने का झंझट नहीं रहेगा।
क्या होती है आभा आईडी
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. राहुल अरोड़ा ने बताया कि आभा आईडी का पूरा नाम आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (एबीएचए) है। यह आधार कार्ड की तरह ही 14 अंकों की एक डिजिटल स्वास्थ्य पहचान संख्या होती है, जो व्यक्ति के सभी मेडिकल रिकॉर्ड को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ेगी और देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराएगी। आभा आईडी से व्यक्ति का डिजिटल रूप से स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। इससे देशभर के किसी भी अस्पताल में आसानी से उपचार मिल सकेगा। संबंधित चिकित्सकों के साथ मेडिकल रिकॉर्ड साझा करने की सुविधा मिलेगी।
ऐसे बनवा सकते हैं आभा आईडी
अस्पताल में चस्पा किए गए स्कैनर के अलावा इंटरनेट पर आभा की साइट पर जाकर भी आभा आईडी बनवा सकते हैं। आभा आईडी बनने के बाद मरीजों को बार-बार अस्पताल जाने के दौरान पुरानी ओपीडी पर्ची ले जाने की जरूरत नहीं रहेगी। ओपीडी पर्ची या आभा आईडी भूलने की स्थिति में आधार कार्ड से आईडी का पता किया जा सकेगा। आभा आईडी का एक लाभ यह है कि मरीज को पुरानी पर्चियों के अलावा पुरानी जांच रिपोर्ट को भी संभाल कर रखने की जरूरत नहीं होगी।
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अभी तक 54.12 प्रतिशत की बनी आईडी
बता दें कि परिवार पहचान पत्र पोर्टल के अनुसार दादरी जिले की जनसंख्या पांच लाख 64 हजार 664 है। इनमें से अभी तक तीन लाख पांच हजार 607 लोगों की आभा आईडी बन चुकी है और दो लाख 59 हजार 57 लोगों की आभा आईडी बनना शेष है। अभी तक 54.12 प्रतिशत की आईडी बन चुकी है।
वर्सन :
नेक्सजेन ई-अस्पताल पोर्टल के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्रों को जोड़ने व लोगों की आभा आईडी बनाने का काम तेजी से चल रहा है। लोगों को आभा आईडी बनवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। आभा आईडी बनने से लोगों को उपचार के दौरान व रिकॉर्ड रखने में काफी सहुलियत होगी। - डॉ. राहुल अरोड़ा, डिप्टी सिविल सर्जन, दादरी।
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क्या होती है आभा आईडी
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. राहुल अरोड़ा ने बताया कि आभा आईडी का पूरा नाम आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (एबीएचए) है। यह आधार कार्ड की तरह ही 14 अंकों की एक डिजिटल स्वास्थ्य पहचान संख्या होती है, जो व्यक्ति के सभी मेडिकल रिकॉर्ड को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ेगी और देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराएगी। आभा आईडी से व्यक्ति का डिजिटल रूप से स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। इससे देशभर के किसी भी अस्पताल में आसानी से उपचार मिल सकेगा। संबंधित चिकित्सकों के साथ मेडिकल रिकॉर्ड साझा करने की सुविधा मिलेगी।
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ऐसे बनवा सकते हैं आभा आईडी
अस्पताल में चस्पा किए गए स्कैनर के अलावा इंटरनेट पर आभा की साइट पर जाकर भी आभा आईडी बनवा सकते हैं। आभा आईडी बनने के बाद मरीजों को बार-बार अस्पताल जाने के दौरान पुरानी ओपीडी पर्ची ले जाने की जरूरत नहीं रहेगी। ओपीडी पर्ची या आभा आईडी भूलने की स्थिति में आधार कार्ड से आईडी का पता किया जा सकेगा। आभा आईडी का एक लाभ यह है कि मरीज को पुरानी पर्चियों के अलावा पुरानी जांच रिपोर्ट को भी संभाल कर रखने की जरूरत नहीं होगी।
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अभी तक 54.12 प्रतिशत की बनी आईडी
बता दें कि परिवार पहचान पत्र पोर्टल के अनुसार दादरी जिले की जनसंख्या पांच लाख 64 हजार 664 है। इनमें से अभी तक तीन लाख पांच हजार 607 लोगों की आभा आईडी बन चुकी है और दो लाख 59 हजार 57 लोगों की आभा आईडी बनना शेष है। अभी तक 54.12 प्रतिशत की आईडी बन चुकी है।
वर्सन :
नेक्सजेन ई-अस्पताल पोर्टल के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्रों को जोड़ने व लोगों की आभा आईडी बनाने का काम तेजी से चल रहा है। लोगों को आभा आईडी बनवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। आभा आईडी बनने से लोगों को उपचार के दौरान व रिकॉर्ड रखने में काफी सहुलियत होगी। - डॉ. राहुल अरोड़ा, डिप्टी सिविल सर्जन, दादरी।