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मनरेगा के तहत 49 तालाबों का होगा सौंदर्यीकरण
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चरखी दादरी। मनरेगा के तहत प्रशासन ने जिले के 59 तालाबों के सुंदरीकरण का काम शुरू कर दिया है। गांव और शहरों में तालाबों की सफाई होनी है। बाद में पंचायत सचिव व बीडीपीओ की ओर से प्रस्ताव मिलने पर जरूरत के अनुसार इन तालाबों के चारों तरफ पौधे लगाए जाएंगे। इन तालाबों की मिट्टी निकलवाकर चारो ओर बांध बनाने के साथ पौधरोपण किया जाएगा ताकि हरियाली को बढ़ावा मिल सके। जिले में 167 ग्राम पंचायतें हैं।
जोहड़ एवं तालाब हरियाणवी संस्कृति की धरोहर रहे हैं, लेकिन आजकल जोहड़ भी अपना अस्तित्व खोने लगे हैं। पुराने समय में जोहड़ों में केवल बारिश का ही पानी भरता था, लेकिन यह जोहड़ जल प्रदूषण का कारण बनने लगे हैं क्योकि गांवों में दूषित पानी इन जोहड़ों में ही पहुंच रहा है जिससे जल प्रदूषण के साथ भूमि प्रदूषण भी बढ़ रहा है। पहले लोग तालाबों में ही पशुओं को पानी पिलाते थे, लेकिन तालाबों के पानी की गुणवत्ता खराब होने पर पशुपालक नल या नलकूप आदि के पानी का ही पशुओं के लिए इस्तेमाल करते हैं। इन जोहड़ों के चारों ओर हरियाली भी होती थी, लेकिन पिछले दो दशकों से यह हरियाली भी खत्म हो गई है। जिले से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग 152 डी के दोनों ओर भी पौधरोपण कर दिया गया है।
अब सरकार गांवों के लए नई योजना पर काम कर रही है। इसके तहत जिस भी गांव में जोहड़ एवं तालाब की सफाई होगी उसकी गाद निकालकर चारों ओर बांध बनाया जाएगा। इस बांध के चारों ओर पौधे लगाए जाएंगे ताकि आसपास का क्षेत्र हराभरा बन सके। जिले में 59 गांवों में काम मनरेगा स्कीम के तहत पूरा करवाया जाएगा। यह काम शुरू हो चुका है। ये 59 गांव जिले के सभी ब्लॉक से लिए गए हैं। जिले में पेड़ों की संख्या वैसे ही कम आंकी जा रही है। इसे देखते हुए लाखों की संख्या में पौधे लगाए जाने की योजना है। पेड़ों की संख्या अधिक होने से ही बारिश होने की संभावना ज्यादा है।
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- कई जोहड़ों की स्थिति बनी है दयनीय
जिले के कई जोहड़ों की स्थिति दयनीय बनी है जबकि यहां मवेशी पानी भी पीते हैं। प्रशासन और सरकार के संज्ञान में भी ये मामला है और इसके चलते जोहड़ों का मनरेगा के तहत कायाकल्प कराने की योजना तैयार की गई है। जोहड़ों का सौंदर्यीकरण होने से ग्रामीणों के साथ पशुपालकों को भी फायदा होगा।
वर्जन
मनरेगा के तहत 59 गांवों में तालाबों पर काम शुरू हो गया है। तालाबों की सफाई होने के बाद पौधरोपण किया जाएगा। इसके लिए पंचायत विभाग को प्रस्ताव तैयार कर प्रशासन को देना होगा।
राजबीर सिंह, मनरेगा प्रभारी
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जोहड़ एवं तालाब हरियाणवी संस्कृति की धरोहर रहे हैं, लेकिन आजकल जोहड़ भी अपना अस्तित्व खोने लगे हैं। पुराने समय में जोहड़ों में केवल बारिश का ही पानी भरता था, लेकिन यह जोहड़ जल प्रदूषण का कारण बनने लगे हैं क्योकि गांवों में दूषित पानी इन जोहड़ों में ही पहुंच रहा है जिससे जल प्रदूषण के साथ भूमि प्रदूषण भी बढ़ रहा है। पहले लोग तालाबों में ही पशुओं को पानी पिलाते थे, लेकिन तालाबों के पानी की गुणवत्ता खराब होने पर पशुपालक नल या नलकूप आदि के पानी का ही पशुओं के लिए इस्तेमाल करते हैं। इन जोहड़ों के चारों ओर हरियाली भी होती थी, लेकिन पिछले दो दशकों से यह हरियाली भी खत्म हो गई है। जिले से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग 152 डी के दोनों ओर भी पौधरोपण कर दिया गया है।
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अब सरकार गांवों के लए नई योजना पर काम कर रही है। इसके तहत जिस भी गांव में जोहड़ एवं तालाब की सफाई होगी उसकी गाद निकालकर चारों ओर बांध बनाया जाएगा। इस बांध के चारों ओर पौधे लगाए जाएंगे ताकि आसपास का क्षेत्र हराभरा बन सके। जिले में 59 गांवों में काम मनरेगा स्कीम के तहत पूरा करवाया जाएगा। यह काम शुरू हो चुका है। ये 59 गांव जिले के सभी ब्लॉक से लिए गए हैं। जिले में पेड़ों की संख्या वैसे ही कम आंकी जा रही है। इसे देखते हुए लाखों की संख्या में पौधे लगाए जाने की योजना है। पेड़ों की संख्या अधिक होने से ही बारिश होने की संभावना ज्यादा है।
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- कई जोहड़ों की स्थिति बनी है दयनीय
जिले के कई जोहड़ों की स्थिति दयनीय बनी है जबकि यहां मवेशी पानी भी पीते हैं। प्रशासन और सरकार के संज्ञान में भी ये मामला है और इसके चलते जोहड़ों का मनरेगा के तहत कायाकल्प कराने की योजना तैयार की गई है। जोहड़ों का सौंदर्यीकरण होने से ग्रामीणों के साथ पशुपालकों को भी फायदा होगा।
वर्जन
मनरेगा के तहत 59 गांवों में तालाबों पर काम शुरू हो गया है। तालाबों की सफाई होने के बाद पौधरोपण किया जाएगा। इसके लिए पंचायत विभाग को प्रस्ताव तैयार कर प्रशासन को देना होगा।
राजबीर सिंह, मनरेगा प्रभारी