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Charkhi Dadri News: 8 घंटों में बना 487 क्विंटल अन्नकूट 5 घंटों में बंटा, 20 हजार लोगों ने चखा स्वाद

Mon, 13 Nov 2023 10:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Mon, 13 Nov 2023 10:33 PM IST
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487 quintal Annakoot made in 8 hours, distributed in 5 hours, 20 thousand people tasted it
कढ़ी का प्रसाद तैयार करते मंदिर सेवक। संवाद
चरखी दादरी। शहर के मंदिरों में गोवर्धन पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान अन्नकूट का प्रसाद भी वितरित किया गया। शहर के दो मंदिरों में करीब 487 क्विंटल प्रसाद तैयार कर श्रद्धालुओं को वितरित किया गया। प्रसाद लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी रही। अन्नकूट को तैयार करने में करीब आठ घंटे का समय लगा जबकि वितरण करीब पांच घंटे के अंदर ही हो गया।
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शहर के बाला वाला मंदिर व पुराना शहर स्थित प्राचीन गणेश मंदिर में अन्नकूट बनाने की तैयारी रविवार शाम से ही शुरू कर दी गई थी। दोनों मंदिरों में लगभग 487 क्विंटल अन्नकूट तैयार किया गया। बाला वाला मंदिर में जहां लोगों को प्रसाद वितरित किया गया तो वही गणेश मंदिर परिसर में ही श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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बाला वाला मंदिर महंत मंगलनाथ ने बताया कि अन्नकूट तैयार करने के लिए लगभग 40 सेवक रविवार रात 11 बजे तैयारियों में जुट गए थे। मंदिर में 450 क्विंटल कढ़ी, 6 क्विंटल चावल, 6 क्विंटल बाजरे की खिचड़ी, पौने तीन क्विंटल मूंग, 4 क्विंटल मूली की भूर्जी, 3 क्विंटल बैंगन की सब्जी तैयार की गई। उन्होंने बताया कि मंदिर में हर वर्ष अन्नकुट का प्रसाद वितरित किया जाता है। मंदिर महंत ने बताया कि शहर व आसपास के 20 हजार से अधिक लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने बताया कि मंदिर में अन्नकूट प्रसाद वितरण की शुरुआत ब्रह्मलीन महंत सच्चानाथ ने लगभग 60 साल पहले की थी।
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वहीं, प्राचीन गणेश मंदिर में 7 क्विंटल कढ़ी के अलावा ढाई क्विंटल चावल, एक क्विंटल बाजरा, सवा क्विंटल मूंग, 2 क्विंटल मूली, 2 क्विंटल बैंगन और 101 क्विंटल मूंग दाल का हलवा का प्रसाद बनाया गया। मंदिर कमेटी सदस्यों ने परिसर में बैठाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद खिलाया।

- पूजा के बाद लगाया भोग, फिर शुरू हुआ वितरण
गद्दीनसीन मंगलनाथ महाराज ने बताया कि गोवर्धन पूजा में भगवान श्रीकृष्ण गोवर्धन पर्वत व गाय की पूजा का विधान है। इसी दिन 56 या 108 भोग का प्रसाद बनाकर भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाया जाता है, जिसे अन्नकूट कहते है। महंत ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार जब बृजवासियों पर देवराज इंद्र ने कहर बरपाया तब भगवान श्रीकृष्ण ने बृजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को सात दिनों तक अपनी तर्जनी उंगली पर उठाए रखा। उसके बाद से गोवर्धन पर्व मनाया जाता है।


- इन श्रद्धालुओं का रहा विशेष सहयोग
गोवर्धन पर्व पर अन्नकूट तैयार में रिंकू जोगी, मदन, सोनू राव, कालिया, पुनीत कुमार, हरीश सैनी, मोहित सैनी, परसाराम, अमित सैनी, मुखत्यार सैनी, गौरव कुमार, सोनू सैनी, सज्जन कुमार, राजकुमार जांगड़ा, पप्पू शर्मा आदि अनेक श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।
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