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Charkhi Dadri News: आंगनबाड़ी केंद्रों में 47 बच्चे झेल रहे कुपोषण का दंश, जनवरी में थे 69

Tue, 03 Mar 2026 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Tue, 03 Mar 2026 01:41 AM IST
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47 children in Anganwadi centres are suffering from malnutrition, up from 69 in January
दादरी स्थित महिला एवं बाल विकास कार्यालय। 
चरखी दादरी। दादरी जिले में 634 आंगनबाड़ी केंद्रों में छह वर्ष तक की आयु के 47 बच्चे कुपोषण का शिकार बने हुए हैं। जनवरी 2025 में यह आंकड़ा 69 था। इन आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की कुल संख्या करीब 35 हजार है। पोषण ट्रैकर मशीन से बच्चे के कुषोषण होने की जांच की जाती है। कुपोषित मिलने पर हेल्थ सेंटर भेजा जाता है जहां बच्चे की डाइट संबंधी काउंसिलिंग होती है। उसे जरूरत के अनुसार पोषक तत्व युक्त आहार दिया जाता है।
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आज बच्चे फास्ट एवं जंक फूड का अधिक सेवन करते हैं। खानपान में पूरी तरह से बदलाव आ गया है। आजकल बच्चे एवं युवा बर्गर, चाउमीन, समोसा, पाव भाजी, पिज्जा का सेवन करना अधिक पसंद करते हैं। ये सभी पदार्थ गरिष्ठ भोजन की श्रेणी में आते हैं। तले हुए पदार्थों के अधिक सेवन से आंतों एवं पेट में भी विकार आ रहे हैं। बच्चे का शरीर के लिहाज से आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते है जिससे वह कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। कुपोषण का तात्पर्य आयु, कद के अनुरूप बच्चे का वजन होना चाहिए।
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चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार एक इंच लंबाई के लिए एक किलोग्राम वजन होना चाहिए। कुषोषण की वजह से बच्चे के भावात्मक, शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक विकास पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। आगे चलकर बच्चा कक्षा-कक्षा में अपनी आयुवर्ग के बच्चों की तुलना में शिक्षण में भी पिछड़ जाता है।
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केंद्र सरकार की ओर से कुपोषण से बचाव के लिए कई योजनाएं भी शुरू की गई है। इसके तहत आंगनबाड़ी व क्रैच में छह वर्ष तक के बच्चों को डाइट के रूप में संतुलित खाद्य पदार्थ खिलाए जाते हैं। जिनमें अंजीर, रेडीमेड खीर, सोयाबीन, मूंगफली, चावल, पौष्टिक पराठा, पाउडर दूध आदि शामिल हैं। आंगनबाड़ी केंद्र में एक बच्चे की डाइट का बजट नौ रुपये प्रतिदिन है जबकि क्रैच में डाइट बजट 12 रुपये है। कुपोषण के शिकार बच्चों के लिए डाइट भत्ता 15 रुपये तय कर रखा है।
इस समय जिले में 634 आंगनबाड़ी केंद्रों में 47 बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इनको संतुलित डाइट दी जा रही है। चिकित्सकों की सलाह पर खाद्य पदार्थ खिलाए जा रहे हैं। गर्भवती महिलाओं को 12 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से डाइट दी जाती है ताकि गर्भ में पल रहे बच्चों का सही पोषण हो सके।


केंद्रों में समय-समय पर बच्चों के कुपोषण संबंधी जांच की जाती है। कुपोषित मिलने पर डाइट पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उनकी हेल्थ सेंटर में परवरिश की जाती है। कुपोषण का आंकड़ा लगातार गिर रहा है। सरकार इस दिशा में अनेक कदम उठा रही है।
-सुशीला देवी, डीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग, दादरी।
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