{"_id":"628e663913b8e811544e7811","slug":"168-panchayats-did-not-get-12-crore-pri-grant-development-work-stalled-charkhidadri-news-hsr632631244","type":"story","status":"publish","title_hn":"168 पंचायतों को नहीं मिली 12 करोड़ की पीआरआई ग्रांट, विकास कार्य ठप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
168 पंचायतों को नहीं मिली 12 करोड़ की पीआरआई ग्रांट, विकास कार्य ठप
विज्ञापन
नांधा राजकीय स्कूल के रास्ते पर भरा पानी और गुजरते विद्यार्थी।
- फोटो : CharkhiDadri
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चरखी दादरी। पंचायती चुनाव लटकने से पहले ही ग्रामीण विकास पूरी तरह प्रभावित है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित समयावधि से दो माह ऊपर बीतने पर भी पीआरआई ग्रांट जारी नहीं की गई है। यह ग्रांट फरवरी में मिलनी थी। हालांकि मई माह के अंतिम सप्ताह तक भी ग्रांट जारी नहीं हुई है। इसके बाद ही गांवों में विकास कार्यों के लिए जनसंख्या के अनुसार बजट आवंटित होना है।
जिले के 168 गांवों मे विकास कार्यों के लिए हर साल केंद्र सरकार की ओर से पीआरआई योजना के तहत 25 करोड़ की ग्रांट दी जाती है। केंद्र सरकार की पीआरआई ग्रांट से सरपंच गांवों में नालों, छोटी गलियों व अन्य छोटे मोटे कामकाज करवाते हैं, लेकिन इस बार यह बजट भी पंचायतों को नसीब नहीं हो सका है। केंद्र सरकार साल में दो बार यह पीआरआई ग्रांट पंचायतों को देती है, लेकिन इस बार सितंबर माह के बाद जिला की पंचायतों को एक भी पैसा नहीं मिला है। साल में इसके तहत दो किस्त जारी होती हैं।
स्वराज पोर्टल पर डाटा अपलोड होने पर ही मिलेगी ग्रांट
पंचायत विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि सरकार ने ग्राम स्वराज नाम से नया पोर्टल लांच किया है। इस पोर्टल पर सभी पंचायतों का डाटा अपलोड होना है। गांवों की जनसंख्या, विकास कार्यों की प्रकृति व अन्य आवश्यक बिंदु इस पोर्टल पर अपडेट करने हैं। उसके बाद ही पीआरआई की ग्रांट जारी हो सकेगी। यह ग्रांट सीधे पंचायत के बैंक खाते में भेजी जाती है।
विज्ञापन
साल में दो बार तीनों ब्लॉक के गांवों को मिली है ग्रांट: बीडीपीओ
पीआरआई ग्रांट फरवरी माह में मिलनी थी, लेकिन अब तक नहीं मिली है। ग्राम स्वराज नाम से पोर्टल पर पंचायतों का पूरा डाटा अपलोड होने के बाद ही यह ग्रांट मिलने की उम्मीद है। साल भर में जिले के तीनों ब्लॉकों में करीब 25 करोड़ का बजट इस ग्रांट के तहत मिल ही जाती है, जिससे सरपंच गांवों में छोटे मोटे विकास कार्य खुद पूरा करवाते हैं। रोशनलाल, बीडीपीओ, पंचायत विभाग
सरपंच बोले : विकास कार्य थमने से ग्रामीण परेशान
गांव में विकास कार्य ठप हैं और समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। लंबे समय से ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं का दंश झेल रहे हैं। शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं हो पा रहा।
सोमेश, घिकाड़ा निवर्तमान सरपंच एवं हरियाणा सरपंच एसोसिएशन प्रधान
रकार की नीयत में खोट है। पोर्टल पर डाटा अपलोड हुए बिना भी सरकार गांवों में विकास के लिए पैसा दे सकती है। गांवों में विकास की चरखी नहीं घूम पा रही है।
राजकरण, पांडवान सरपंच एवं जिला सरपंच एसोसिएशन प्रधान
विज्ञापन
जिले के 168 गांवों मे विकास कार्यों के लिए हर साल केंद्र सरकार की ओर से पीआरआई योजना के तहत 25 करोड़ की ग्रांट दी जाती है। केंद्र सरकार की पीआरआई ग्रांट से सरपंच गांवों में नालों, छोटी गलियों व अन्य छोटे मोटे कामकाज करवाते हैं, लेकिन इस बार यह बजट भी पंचायतों को नसीब नहीं हो सका है। केंद्र सरकार साल में दो बार यह पीआरआई ग्रांट पंचायतों को देती है, लेकिन इस बार सितंबर माह के बाद जिला की पंचायतों को एक भी पैसा नहीं मिला है। साल में इसके तहत दो किस्त जारी होती हैं।
विज्ञापन
स्वराज पोर्टल पर डाटा अपलोड होने पर ही मिलेगी ग्रांट
पंचायत विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि सरकार ने ग्राम स्वराज नाम से नया पोर्टल लांच किया है। इस पोर्टल पर सभी पंचायतों का डाटा अपलोड होना है। गांवों की जनसंख्या, विकास कार्यों की प्रकृति व अन्य आवश्यक बिंदु इस पोर्टल पर अपडेट करने हैं। उसके बाद ही पीआरआई की ग्रांट जारी हो सकेगी। यह ग्रांट सीधे पंचायत के बैंक खाते में भेजी जाती है।
विज्ञापन
साल में दो बार तीनों ब्लॉक के गांवों को मिली है ग्रांट: बीडीपीओ
पीआरआई ग्रांट फरवरी माह में मिलनी थी, लेकिन अब तक नहीं मिली है। ग्राम स्वराज नाम से पोर्टल पर पंचायतों का पूरा डाटा अपलोड होने के बाद ही यह ग्रांट मिलने की उम्मीद है। साल भर में जिले के तीनों ब्लॉकों में करीब 25 करोड़ का बजट इस ग्रांट के तहत मिल ही जाती है, जिससे सरपंच गांवों में छोटे मोटे विकास कार्य खुद पूरा करवाते हैं। रोशनलाल, बीडीपीओ, पंचायत विभाग
सरपंच बोले : विकास कार्य थमने से ग्रामीण परेशान
गांव में विकास कार्य ठप हैं और समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। लंबे समय से ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं का दंश झेल रहे हैं। शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं हो पा रहा।
सोमेश, घिकाड़ा निवर्तमान सरपंच एवं हरियाणा सरपंच एसोसिएशन प्रधान
रकार की नीयत में खोट है। पोर्टल पर डाटा अपलोड हुए बिना भी सरकार गांवों में विकास के लिए पैसा दे सकती है। गांवों में विकास की चरखी नहीं घूम पा रही है।
राजकरण, पांडवान सरपंच एवं जिला सरपंच एसोसिएशन प्रधान