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Charkhi Dadri News: जिले में थैलेसीमिया के 14 मरीज, 7 व्यस्क और 7 बच्चे
Wed, 08 May 2024 10:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 08 May 2024 10:47 PM IST
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थैलेसीमिया संबंधी जानकारी देते सीएमओ डॉ. विनोद कमल।
चरखी दादरी। शहर के सिविल अस्पताल में बुधवार को सिविल सर्जन डॉ. विनोद कमल के मार्गदर्शन में थैलेसीमिया दिवस मनाया गया। इस दौरान मरीजों व साथ आने वाले लोगों की थैलेसीमिया जांच की गई। डॉ. विनोद कमल ने बताया कि जिले में थैलेसीमिया के 14 मरीज हैं। इनमें 7 व्यस्क और 7 बच्चे हैं।
उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया विभाग के पास इस रोग संबंधी टेस्ट करने की सुविधा, उपकरण व दवाएं भी उपलब्ध हैं। साथ ही इसके उपचार व अन्य दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी भी दी गई। सीएमओ ने बताया कि थैलेसीमिया एक रक्त संबंधी बीमारी है। इसके कारण मरीज के खून में हीमोग्लोबिन बनना कम हो जाता है और आयरन की मात्रा अधिक हो जाती है। इससे मरीज को एनिमिया भी हो सकता है। इस रोग का समय रहते उपचार न हो तो मरीज की जान भी जा सकती है। विभाग की ओर से लोगों को जागरूक करने के लिए इसके प्रति काम किया जा रहा है।
डॉ. संदीप ने बताया कि ये रोग एक से दूसरी पीढ़ी में भी होता है। अगर माता-पिता में से किसी एक को सामान्य थैलेसीमिया है तो बच्चे को 50 प्रतिशत तक ये रोग हो सकता है। इस रोग की जांच के लिए खून की जांच की जाती है और खून में लाल रक्त कोशिकाओं का पता लगाया जाता है। गर्भवतियों को इसकी जांच 10 सप्ताह पूरे होने से पहले ही करवा लेनी चाहिए। लोगों को समय रहते इस रोग के बारे में पता नहीं चल पाता, जिससे देर होने के बाद उपचार करना बेहद मुश्किल हो जाता है। इस मौके पर डिप्टी सीएमओ डॉ. गौरव भारद्वाज भी मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया विभाग के पास इस रोग संबंधी टेस्ट करने की सुविधा, उपकरण व दवाएं भी उपलब्ध हैं। साथ ही इसके उपचार व अन्य दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी भी दी गई। सीएमओ ने बताया कि थैलेसीमिया एक रक्त संबंधी बीमारी है। इसके कारण मरीज के खून में हीमोग्लोबिन बनना कम हो जाता है और आयरन की मात्रा अधिक हो जाती है। इससे मरीज को एनिमिया भी हो सकता है। इस रोग का समय रहते उपचार न हो तो मरीज की जान भी जा सकती है। विभाग की ओर से लोगों को जागरूक करने के लिए इसके प्रति काम किया जा रहा है।
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डॉ. संदीप ने बताया कि ये रोग एक से दूसरी पीढ़ी में भी होता है। अगर माता-पिता में से किसी एक को सामान्य थैलेसीमिया है तो बच्चे को 50 प्रतिशत तक ये रोग हो सकता है। इस रोग की जांच के लिए खून की जांच की जाती है और खून में लाल रक्त कोशिकाओं का पता लगाया जाता है। गर्भवतियों को इसकी जांच 10 सप्ताह पूरे होने से पहले ही करवा लेनी चाहिए। लोगों को समय रहते इस रोग के बारे में पता नहीं चल पाता, जिससे देर होने के बाद उपचार करना बेहद मुश्किल हो जाता है। इस मौके पर डिप्टी सीएमओ डॉ. गौरव भारद्वाज भी मौजूद रहे।
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