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120 किसानों ने मंडी में बेचा 2200 क्विंटल बाजरा
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चरखी दादरी। खरीफ फसल खरीद सीजन के तीसरे दिन भी जिले की दस में से 9 मंडियों में आवक नहीं हुई है। मंगलवार को केवल दादरी मंडी में ही किसान बाजरा बेचने पहुंचे। यहां शाम तक 120 किसानों से 2200 क्विंटल बाजरा खरीदा गया। बाजरा की प्राइवेट खरीद गुणवत्ता के आधार पर की गई और किसानों ने एमएसपी से करीब 650 रुपये नीचे भी बाजरा बेचा।
वहीं एमएसपी से कम दाम पर बाजरा बेचने वाले किसानों का कहना है कि बारिश के चलते पैदावार और गुणवत्ता पर काफी प्रभाव पड़ा और इसके चलते उनकी फसल के दाम कम मिले।
इस संबंध में मार्केट कमेटी सचिव का कहना है कि जिन किसानों ने पोर्टल पर पंजीकरण करवा रखा है उनके नुकसान की भरपाई हो जाएगी। बता दें कि बाजरे का एमएसपी 2350 रुपये निर्धारित है। वहीं, मंगलवार को मंडी पहुंचे कई किसानों का तकनीकी गड़बड़ी के चलते गेट पास नहीं कट पाया और उन्हें बैरंग ही लौटना पड़। इन किसानों का कहना है कि अब उन्हें फसल बेचने के लिए दोबारा मंडी में आना पड़ेगा।
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बाजरा की सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू हुई है। इसके लिए जिले में 10 खरीद केंद्र बनाए गए हैं जिनमें से 9 पर अब तक बाजरे की आवक नहीं हुई है। तीनों दिन केवल दादरी मंडी में बाजरा खरीदा गया है। पहले दिन 10 किसानों ने 335 क्विंटल, दूसरे दिन 160 किसानों ने 4477 क्विंटल और तीसरे दिन 120 किसानों ने 2200 क्विंटल बाजरा बेचा। ऐसे में पिछले तीन दिन के अंदर दादरी मंडी में 290 किसान 7015 क्विंटल बाजरा बेच चुके हैं। अगले दो-तीन दिन में यह आवक और बढ़ने की उम्मीद है।
किसान बोले: नमी और अन्य खामियां रहे कम दाम का कारण
1. मैं बाजरा बेचने के लिए दादरी मंडी आया था। बाजरा में नमी और गुणवत्ता की कमी बताई गई। मैंने बाजरा 1700 रुपये क्विंटल के हिसाब से बेचा है। भावांतर भरपाई योजना से नुकसान की पूर्ति होने की उम्मीद है।
श्रीभगवान, सांतौर
2. फसल में कुछ मात्रा में नमी है। फसल जांच के बाद ही बाजरा खरीदा जा रहा है और किसानों पर इसकी मार पड़ेगी। अगर भावांतर योजना के तहत भरपाई नहीं हुई तो किसानों को काफी चपत लगेगी।
बीरभान, मिर्च
एजेंसी फसल को उसकी गुणवत्ता के हिसाब से ही खरीद रही है। जिन किसानों ने फसल बेचने के लिए ऑन लाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवा रखा है, सरकार भावांतर योजना से उसकी भरपाई करेगी।
नरेंद्र कुमार, सचिव, मार्केट कमेटी
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वहीं एमएसपी से कम दाम पर बाजरा बेचने वाले किसानों का कहना है कि बारिश के चलते पैदावार और गुणवत्ता पर काफी प्रभाव पड़ा और इसके चलते उनकी फसल के दाम कम मिले।
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इस संबंध में मार्केट कमेटी सचिव का कहना है कि जिन किसानों ने पोर्टल पर पंजीकरण करवा रखा है उनके नुकसान की भरपाई हो जाएगी। बता दें कि बाजरे का एमएसपी 2350 रुपये निर्धारित है। वहीं, मंगलवार को मंडी पहुंचे कई किसानों का तकनीकी गड़बड़ी के चलते गेट पास नहीं कट पाया और उन्हें बैरंग ही लौटना पड़। इन किसानों का कहना है कि अब उन्हें फसल बेचने के लिए दोबारा मंडी में आना पड़ेगा।
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बाजरा की सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू हुई है। इसके लिए जिले में 10 खरीद केंद्र बनाए गए हैं जिनमें से 9 पर अब तक बाजरे की आवक नहीं हुई है। तीनों दिन केवल दादरी मंडी में बाजरा खरीदा गया है। पहले दिन 10 किसानों ने 335 क्विंटल, दूसरे दिन 160 किसानों ने 4477 क्विंटल और तीसरे दिन 120 किसानों ने 2200 क्विंटल बाजरा बेचा। ऐसे में पिछले तीन दिन के अंदर दादरी मंडी में 290 किसान 7015 क्विंटल बाजरा बेच चुके हैं। अगले दो-तीन दिन में यह आवक और बढ़ने की उम्मीद है।
किसान बोले: नमी और अन्य खामियां रहे कम दाम का कारण
1. मैं बाजरा बेचने के लिए दादरी मंडी आया था। बाजरा में नमी और गुणवत्ता की कमी बताई गई। मैंने बाजरा 1700 रुपये क्विंटल के हिसाब से बेचा है। भावांतर भरपाई योजना से नुकसान की पूर्ति होने की उम्मीद है।
श्रीभगवान, सांतौर
2. फसल में कुछ मात्रा में नमी है। फसल जांच के बाद ही बाजरा खरीदा जा रहा है और किसानों पर इसकी मार पड़ेगी। अगर भावांतर योजना के तहत भरपाई नहीं हुई तो किसानों को काफी चपत लगेगी।
बीरभान, मिर्च
एजेंसी फसल को उसकी गुणवत्ता के हिसाब से ही खरीद रही है। जिन किसानों ने फसल बेचने के लिए ऑन लाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवा रखा है, सरकार भावांतर योजना से उसकी भरपाई करेगी।
नरेंद्र कुमार, सचिव, मार्केट कमेटी