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Charkhi Dadri News: टीम ने जांच के लिए 11 हजार किसानों के खेतों की मिट्टी के लिए नमूने
Fri, 18 Jul 2025 10:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 18 Jul 2025 10:14 PM IST
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फोटो 02
दादरी क्षेत्र के खेत में लहलहाती ज्वार की फसल। संवाद
- जिले को खरीफ व रबी सीजन 2025-26 में 55 हजार मिट्टी-पानी के नमूनों की जांच का मिला है लक्ष्य, 1.22 लाख हेक्टेयर है कुल कृषि योग्य रकबा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। भूमि परीक्षण शाखा ने मौजूदा खरीफ सीजन में खेत की मिट्टी की जांच के लिए अब तक 11 हजार नमूने एकत्रित किए हैं। इनकी जांच शुरू कर दी गई है। वहीं, खरीफ व रबी सीजन 2025-26 में 55 हजार मिट्टी-पानी के नमूनाें की जांच करने का लक्ष्य है।
जिले का कुल कृषि योग्य रकबा एक लाख 22 हजार 378 हेक्टेयर क्षेत्र है। जिले में रबी व खरीफ सीजन में गेहूं, सरसों, जौ, ज्वार, बाजरा, चना, जौ व मेथी आदि की फसलें होती हैं। लगातार रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल करने और भूमि एवं जल प्रदूषण की वजह से जिले की कृषि योग्य मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की कमी पहले से ही बनी हुई है।
मिट्टी का पीएच मान भी ज्यादा बना हुआ है, जो आने वाले समय में खेती के लिए संकट पैदा कर सकता है। यह क्रम इसी प्रकार जारी रहा तो उपजाऊ मिट्टी बंजर का रूप ले लेगी।
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पिछले डेढ़ दशक से किसान सभी प्रकार की फसलों में रासायनिक खाद का आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। देशी गोबर की खाद की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जैविक खाद का भी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। किसान फसल चक्र को भी नहीं अपना रहे हैं। ताकि, जमीन की उर्वरा शक्ति क्षीण न होने पाए। इतना ही नहीं, धान व अन्य फसलों के अवशेष भी खेत में जला दिए जाते हैं, जिससे जमीन के मित्र कीट मर जाते हैं। - किसानों को किया जा रहा जागरूक
वैसे ही जलवायु परिवर्तन से जल व भूमि प्रदूषण का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। जल का दोहन भी ज्यादा हो रहा है। मानसून सीजन में औसत से कम बारिश होने की वजह से भूमिगत जलस्तर भी लगातार नीचे जा रहा है, जो और भी चिंता का विषय है।
सरकार की ओर से अब किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। विभाग व सरकार ने मिट्टी की जांच की मुहिम तेज कर रखी है। किसान भी अब थोड़ा जागरूक हो गए हैं।
- नमूने लेने में किसान सहायकों की ली जा रही मदद
कृषि वर्ष 2025-26 के दौरान जिले में मिट्टी-पानी के 55 हजार नमूने की जांच करने का लक्ष्य है जबकि अब तक 11 हजार नमूने एकत्रित किए गए हैं। इसके लिए किसान सहायक की मदद ली जा रही है। मिट्टी की जांच करवाने के लिए नमूने खेत के चारों कोने व बीच से लेना होता है। नमूना जमीन की 15 सेंटीमीटर की गहराई तक लिया जाता है।
- भूमि का पीएच मान आठ से साढ़े आठ के बीच
विदित रहे कि जिले की भूमि में पीएच मान आठ से साढ़े आठ के बीच है। इसकी सामान्य रेंज साढ़े आठ तक मानी जाती है। पीएच मान के पीछे जल प्रदूषण भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। भूमिगत जल लगातार क्षारीय होता जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में पानी का संकट पैदा हो जाएगा।
वर्सन
जिले में अब तक 11 हजार नमूने एकत्रित किए गए हैं। अब इनकी लैब में जांच करवाई जाएगी। जांच में आई रिपोर्ट से किसान को अवगत कराया जाएगा। किसान को मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों के आधार पर खाद का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाएगी। -दिनेश कुमार, भूमि परीक्षण अधिकारी
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दादरी क्षेत्र के खेत में लहलहाती ज्वार की फसल। संवाद
- जिले को खरीफ व रबी सीजन 2025-26 में 55 हजार मिट्टी-पानी के नमूनों की जांच का मिला है लक्ष्य, 1.22 लाख हेक्टेयर है कुल कृषि योग्य रकबा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। भूमि परीक्षण शाखा ने मौजूदा खरीफ सीजन में खेत की मिट्टी की जांच के लिए अब तक 11 हजार नमूने एकत्रित किए हैं। इनकी जांच शुरू कर दी गई है। वहीं, खरीफ व रबी सीजन 2025-26 में 55 हजार मिट्टी-पानी के नमूनाें की जांच करने का लक्ष्य है।
जिले का कुल कृषि योग्य रकबा एक लाख 22 हजार 378 हेक्टेयर क्षेत्र है। जिले में रबी व खरीफ सीजन में गेहूं, सरसों, जौ, ज्वार, बाजरा, चना, जौ व मेथी आदि की फसलें होती हैं। लगातार रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल करने और भूमि एवं जल प्रदूषण की वजह से जिले की कृषि योग्य मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की कमी पहले से ही बनी हुई है।
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मिट्टी का पीएच मान भी ज्यादा बना हुआ है, जो आने वाले समय में खेती के लिए संकट पैदा कर सकता है। यह क्रम इसी प्रकार जारी रहा तो उपजाऊ मिट्टी बंजर का रूप ले लेगी।
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पिछले डेढ़ दशक से किसान सभी प्रकार की फसलों में रासायनिक खाद का आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। देशी गोबर की खाद की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जैविक खाद का भी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। किसान फसल चक्र को भी नहीं अपना रहे हैं। ताकि, जमीन की उर्वरा शक्ति क्षीण न होने पाए। इतना ही नहीं, धान व अन्य फसलों के अवशेष भी खेत में जला दिए जाते हैं, जिससे जमीन के मित्र कीट मर जाते हैं। - किसानों को किया जा रहा जागरूक
वैसे ही जलवायु परिवर्तन से जल व भूमि प्रदूषण का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। जल का दोहन भी ज्यादा हो रहा है। मानसून सीजन में औसत से कम बारिश होने की वजह से भूमिगत जलस्तर भी लगातार नीचे जा रहा है, जो और भी चिंता का विषय है।
सरकार की ओर से अब किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। विभाग व सरकार ने मिट्टी की जांच की मुहिम तेज कर रखी है। किसान भी अब थोड़ा जागरूक हो गए हैं।
- नमूने लेने में किसान सहायकों की ली जा रही मदद
कृषि वर्ष 2025-26 के दौरान जिले में मिट्टी-पानी के 55 हजार नमूने की जांच करने का लक्ष्य है जबकि अब तक 11 हजार नमूने एकत्रित किए गए हैं। इसके लिए किसान सहायक की मदद ली जा रही है। मिट्टी की जांच करवाने के लिए नमूने खेत के चारों कोने व बीच से लेना होता है। नमूना जमीन की 15 सेंटीमीटर की गहराई तक लिया जाता है।
- भूमि का पीएच मान आठ से साढ़े आठ के बीच
विदित रहे कि जिले की भूमि में पीएच मान आठ से साढ़े आठ के बीच है। इसकी सामान्य रेंज साढ़े आठ तक मानी जाती है। पीएच मान के पीछे जल प्रदूषण भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। भूमिगत जल लगातार क्षारीय होता जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में पानी का संकट पैदा हो जाएगा।
वर्सन
जिले में अब तक 11 हजार नमूने एकत्रित किए गए हैं। अब इनकी लैब में जांच करवाई जाएगी। जांच में आई रिपोर्ट से किसान को अवगत कराया जाएगा। किसान को मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों के आधार पर खाद का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाएगी। -दिनेश कुमार, भूमि परीक्षण अधिकारी