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माैत के बाद तो सामने आए सच्चाई: IPS वाई पूरण कुमार के फाइनल नोट में छलका दर्द, लिखा-मेरे साथ सिर्फ भेदभाव हुआ
Thu, 09 Oct 2025 07:49 AM IST
चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरो
Updated Thu, 09 Oct 2025 07:49 AM IST
सार
हरियाणा के एडीजीपी वाई पूरण कुमार ने मंगलवार को अपने घर के बेसमेंट में गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में कई अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
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ADGP Y Puran suicide
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार का आठ पन्नों का फाइनल नोट (सुसाइड नोट) सार्वजनिक हो गया है, जिसमें उन्होंने साल 2020 से वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से जारी जातीय भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान का उल्लेख किया है।
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उन्होंने लिखा कि मैंने वर्षों तक समान व्यवहार की मांग की पर मेरे साथ सिर्फ भेदभाव हुआ। निरंतर मानसिक और जातीय उत्पीड़न अब असहनीय हो गया है। मैं उम्मीद करता हूं कि मेरी मौत के बाद कम से कम सच्चाई सामने आए।
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फाइनल नोट में पूर्व डीजीपी मनोज यादव, पूर्व आईएएस टीवीएसएन प्रसाद, डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर, एडीजीपी अमिताभ ढिल्लों, एडीजीपी संजय कुमार, आईजी पंकज नैन, आईपीएस कला रामचंद्रन, आईपीएस संदीप खिरवार, आईपीएस सिबाश कबीराज और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर सुनियोजित रूप से मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।
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2020 से शुरू हुआ जातीय भेदभाव
फाइनल नोट के मुताबिक यह उत्पीड़न साल 2020 में अंबाला के एक मंदिर में जातीय भेदभाव की घटना से शुरू हुआ और लगातार बढ़ता गया। उन्हें झूठे केसों में फंसाने की धमकी दी गई, उनके वाहन और आवास संबंधी अधिकारों से वंचित किया गया, और गोपनीय दस्तावेज मीडिया में लीक कर उनकी प्रतिष्ठा धूमिल की गई। डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने न सिर्फ अन्य अधिकारियों को मेरे खिलाफ उकसाया बल्कि मेरे एसपी रोहतक नरेंद्र बिजारणिया के जरिए भी मेरी प्रतिष्ठा धूमिल करने की कोशिश की। पूरण कुमार ने अपने नोट में यह भी लिखा कि वे अब अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और चाहते हैं कि उनके साथ जो हुआ, वैसा किसी ईमानदार अधिकारी के साथ न हो।यह भी पढ़ें: एडीजीपी की मौत पर पत्नी का बड़ा एक्शन: हरियाणा पुलिस के डीजीपी और एसपी के खिलाफ दी शिकायत, कार्रवाई की मांग
मंदिर के दाैरे से नाराज हुए थे पूर्व डीजीपी
फाइनल नोट के मुताबिक जाति आधारित भेदभाव, सार्वजनिक अपमान, लक्षित मानसिक उत्पीड़न और अत्याचार की शुरुआत पूर्व डीजीपी मनोज यादव ने की थी। साल 2020 में अंबाला में एक पुलिस स्टेशन में मैंने एक मंदिर का दौरा किया था।इससे वह इतने खफा हो गए कि उन्हें झूठे केसों में फंसाने की धमकी दी गई, उनके वाहन और आवास संबंधी अधिकारों से वंचित किया गया और गोपनीय दस्तावेज मीडिया में लीक कर उनकी प्रतिष्ठा धूमिल की गई।तत्कालीन गृह सचिव राजीव अरोड़ा पर आरोप लगाते हुए उन्होंने लिखा कि उन्होंने समय पर अर्जित अवकाश की मंजूरी नहीं दी, जिसके कारण मैं अपने पिता के निधन से पहले उनसे मिलने नहीं जा सका। इसकी अपार पीड़ा आज भी है। इसको लेकर भी सभी वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मनोज यादव के बैचमेट टीवीएसएन प्रसाद, आईएएस (सेवानिवृत्त) और तत्कालीन डीजीपी पीके अग्रवाल (सेवानिवृत्त) ने भी मेरे खिलाफ इसी तरह का व्यवहार जारी रखा, इस पर भी मेरी शिकायतें आधिकारिक रिकॉर्ड में हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। मेरी सभी शिकायतें और अपील सबूत हैं, जो मेरे खिलाफ जारी मानसिक उत्पीड़न और अत्याचार को दर्शाते हैं।
डॉ. एमएफ किरण, आईपीएस (1996) ने एक एक्स-कैडर पोस्ट पर तैनात करने के लिए मुझे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। इस संबंध में गोपनीय पत्रों को गलत तरीके से पेश किया गया और पूरी प्रक्रिया में अनिवार्य समय सीमा का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया गलत हो रही है। इस संबंध में 13 मार्च 2025 को सूचना मिली कि यह मामला सरकार के विचाराधीन है, हालांकि आज तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वे लिखते हैं कि उन्होंने कुछ समानता के मुद्दे उठाए थे, जैसे कि अर्जित अवकाश की समय पर स्वीकृति, पात्रता के अनुसार सरकारी वाहन व सरकारी आवास का आवंटन, कैडर प्रबंधन के लिए गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों को नियमानुसार लागू करना और आईपीएस अधिकारियों के लिए पूजा स्थलों के लिए पीपीआर नियमों को सामान रूप से लागू करना। मगर इन मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय, मेरे ही खिलाफ दुर्व्यभावना से कार्रवाई की जाने लगी।
डीजीपी शत्रुजीत पर गंभीर आरोप
उन्होंने शत्रुजीत कपूर पर आरोप लगाते हुए कहा- उन्होंने अपनी सुविधाओं और वेतन भुगतान में 1.1.2015 से प्रभावी अपने पैसों का निपटान करवाया, लेकिन 2001 बैच के आईपीएस अधिकारियों को समान लाभ नहीं दिया गया, जिससे उन्हें वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। पंचकूला में आधिकारिक आवास देने के समय मेरे लिए अतिरिक्त नियम लागू किए गए। साथ ही, डीजीपी कार्यालय की ओर से गलत शपथ पत्र दायर किया गया, जिसमें पुलिस गेस्ट हाउस की मौजूदगी का झूठा दावा किया गया। नवंबर 2023 में आधिकारिक वाहन वापस लेना भी शत्रुजीत कपूर की देखरेख में हुआ। अप्रेजल रिपोर्ट में गलत, काल्पनिक और पक्षपाती टिप्पणियां की गईं। इसे एसीएस होम को लिखित रूप में बताया, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह भी आरोप है कि शत्रुजीत कपूर ने जातिगत टिप्पणियां भी कीं। डीजीपी कार्यालय और संबंधित अधिकारियों द्वारा नाममात्र की गुमनाम शिकायतें बढ़वा दी गईं, जिससे उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित और मानसिक उत्पीड़ित किया गया। कपूर ने एसपी रोहतक को प्रेरित किया, ताकि पूरण कुमार का नाम और प्रतिष्ठा नुकसान में रहे।आईपीएस संदीप खिरवार व आईपीएस सिबास कबीराज ने गुरुग्राम में पोस्टिंग के दौरान झूठे मामलों में उन्हें फंसाने की साजिश रची। दोनों के संदिग्ध लेन-देन और असंगत संपत्ति विवरण भी संबंधित अधिकारियों के ध्यान में लाया, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आईपीएस कला रामचंद्रन की ओर से फर्जी शपथपथ दायर किया गया। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व डीजीपी पीके अग्रवाल, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का भी नाम लिखा है। उन्होंने कहा ये सभी अधिकारी जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न के मुख्य साजिशकर्ता रहे। सभी मामलों और शिकायतों को विभिन्न अधिकारियों और गृह मंत्रालय तक लिखा, मगर आज तक कोई समाधान नहीं हुआ।
इस तरह अधिकारियों का नाम लिखा और उनके आरोप
मनोज यादव, तत्कालीन डीजीपी : जिन्होंने भेदभाव की शुरुआत की।सेवानिवृत्त आईएएस राजीव अरोड़ा, पूर्व गृह सचिव टीवीएसएन प्रसाद व पूर्व डीजीपी पीके अग्रवाल : भेदभाव को आगे बढ़ाने का आरोप
शत्रुजीत कपूर, डीजीपी : प्रतिशोधात्मक रवैया अपनाने के आरोप।
आईपीएस अमिताभ ढिल्लों, आईपीएस संजय कुमार, आईपीएस पंकज नैन, आईपीएस कलारामचंद्रन पक्षपातपूर्ण जांच करने व रिपोर्ट एकतरफा भेजने के आरोप।
अनुराग रस्तोगी, आईएएस, एसीएस (गृह) – शिकायतों को बिना सुने एकतरफा बंद करने का आरोप