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Chandigarh-Haryana News: महिला वकील ने की चिकित्सा खर्च, मकान किराया व यात्रा खर्च की मांग, खारिज
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-हाईकोर्ट ने कहा-इस प्रकार के राहत आदेश के लिए किसी वैध या विधिक अधिकार का होना आवश्यक
-बार काउंसिल से इस प्रकार की आर्थिक सहायता मांगने का वकील को कोई अधिकार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। महिला वकील रवनीत कौर की बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा से चिकित्सा खर्च, मकान किराया, व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी, यात्रा खर्च और अन्य आर्थिक सहायता दिलानेे की मांग को लेकर दाखिल याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। उसने यह याचिका अस्थापित अधिवक्ता होने के आधार पर दाखिल की थी।
याचिका में रवनीत कौर ने एडवोकेट एक्ट का हवाला देते हुए बार काउंसिल को यह सहायता प्रदान करने के लिए बाध्य करने की मांग की थी। जस्टिस अनिल खेत्रपाल और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि इस प्रकार के राहत आदेश के लिए किसी वैध या विधिक अधिकार का होना आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता कोई ऐसा कानूनी या प्रतिष्ठित अधिकार साबित नहीं कर सकी जिससे बार काउंसिल को बाध्य किया जा सके। एडवोकेट एक्ट की धारा 6 केवल बार काउंसिल को जरूरतमंद अधिवक्ताओं की सहायता करने का अधिकार देती है लेकिन यह कोई कानूनी अधिकार नहीं बनाता जिससे कोई अधिवक्ता सीधे कोर्ट से यह सहायता मांग सके। इस आधार पर कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इसमें हस्तक्षेप करने का कोई उचित कारण नहीं बनता। साथ ही सभी लंबित आवेदनों का भी निपटारा कर दिया गया।
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-बार काउंसिल से इस प्रकार की आर्थिक सहायता मांगने का वकील को कोई अधिकार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। महिला वकील रवनीत कौर की बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा से चिकित्सा खर्च, मकान किराया, व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी, यात्रा खर्च और अन्य आर्थिक सहायता दिलानेे की मांग को लेकर दाखिल याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। उसने यह याचिका अस्थापित अधिवक्ता होने के आधार पर दाखिल की थी।
याचिका में रवनीत कौर ने एडवोकेट एक्ट का हवाला देते हुए बार काउंसिल को यह सहायता प्रदान करने के लिए बाध्य करने की मांग की थी। जस्टिस अनिल खेत्रपाल और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि इस प्रकार के राहत आदेश के लिए किसी वैध या विधिक अधिकार का होना आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता कोई ऐसा कानूनी या प्रतिष्ठित अधिकार साबित नहीं कर सकी जिससे बार काउंसिल को बाध्य किया जा सके। एडवोकेट एक्ट की धारा 6 केवल बार काउंसिल को जरूरतमंद अधिवक्ताओं की सहायता करने का अधिकार देती है लेकिन यह कोई कानूनी अधिकार नहीं बनाता जिससे कोई अधिवक्ता सीधे कोर्ट से यह सहायता मांग सके। इस आधार पर कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इसमें हस्तक्षेप करने का कोई उचित कारण नहीं बनता। साथ ही सभी लंबित आवेदनों का भी निपटारा कर दिया गया।
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