फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Vehicles do not have GPS paddy lifting stalled

Chandigarh-Haryana News: वाहनों में नहीं लगे जीपीएस, धान उठान ठप

विज्ञापन
- वाहनों से धान ढुलाई के लिए मार्च में हो गए थे टेंडर लेकिन जीपीएस लगाने की प्रक्रिया ढीली
विज्ञापन

- मंडियों में लगातार पहुंच रहा धान और बाजरा, किसान और व्यापारी दोनों परेशान
अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। प्रदेश की मंडियों और क्रय केंद्रों में धान और बाजरा बड़ी मात्रा में पहुंच गया है लेकिन धान उठान बेहद धीमी है। सबसे बड़ी बात यह है कि मार्च माह में ही वाहनों से धान ढुलाई के लिए टेंडर हो गए थे मगर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ढिलाई के कारण वाहनों में जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) समय से नहीं लग सके।इस बार मिलर्स को भी उठान की जिम्मेदारी दी गई है लेकिन उनका पंजीकरण का कार्य भी अब शुरू हो सका है। इसके चलते मंडियां पहुंच रहे धान और बाजरे की उठान नहीं हो पा रही है। विभाग की इन्हीं खामियों के कारण पिछले कई दिनों से फसल लेकर मंडियों में पहुंचने वाले किसानों को अपनी फसल की रखवाली करनी पड़ रही है।
प्रदेश में करीब 1500 राइस मिल हैं। मिलों तक धान पहुंचाने के लिए खाद्य आपूर्ति विभाग वाहनों के लिए टेंडर करता है। इस बार नई एजेंसी को टेंडर दिया गया है। प्रदेश में करीब 5000 वाहनों में जीपीएस लगाने का कार्य होना था। वाहनों में जीपीएस लगाने की प्रक्रिया से पहले खाद्य आपूर्ति विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण और वाहनों को खरीद केंद्र या मंडियों से लिंक किया जाता है लेकिन यही कार्य समय से नहीं हुआ। ऐसे में मंडियों तक धान उठान के लिए वाहन नहीं पहुंच पा रहे। बगैर जीपीएस के वाहनों को माल ढुलाई की अनुमति नहीं।
विज्ञापन

खाद्य आपूर्ति विभाग के अनुसार धान उठान के कार्य में देरी के दो ही कारण हैं। पहला कारण यही है कि पंजीकरण के कार्य के लिए पोर्टल में पिछले कई दिनों से दिक्कत थी। दूसरा कारण यह भी है कि 1 अक्तूबर के बजाय 22 सितंबर से धान खरीद शुरू हो गई। हरियाणा राइस एंड डीलर्स एसोसिएशन के राज्य प्रधान हंसराज का कहना है कि उन्हें सरकार ने आश्वासन दिया है कि अगले 24 घंटे में वाहनों में जीपीएस लगाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और उसके बाद उठान शुरू होगी। वहीं खाद्य आपूर्ति के निदेशक अंसज सिंह ने अगले एक-दो दिनों के अंदर वाहनों में जीपीएस लगवाने का कार्य पूरा होने की बात कही है और धान उठान कार्य भी इसके बाद गति पकड़ लेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


मिलर्स एसोसिएशन भी उठवा सकती है धान
हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्स डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव राजेंद्र सिंह के अनुसार इस बार प्रदेश में पहली बार मिलर्स को धान उठाने की सशर्त अनुमति दी गई है। सबसे बड़ी शर्त यही है कि धान ढुलाई से जुड़ी एजेंसी यानी ठेकेदार को जाम लगने के कारण होने वाली कठिनाई की जानकारी देनी होगी लेकिन मिलर्स के पास भी अधिकतम 10 प्रतिशत ही वाहन हैं। मिलर्स को एक पोर्टल के माध्यम से पंजीकृत किया जाता है। फिलहाल जिलों के संबंधित जिला उपायुक्तों के माध्यम से मिलर्स को एजेंसी अलाॅट के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया जारी है। करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, यमुनानगर आदि में यह कार्य हो गया है।

सरकार ने 3100 रुपये में धान खरीद का किया था वादा, अब मुकरी : बजरंग गर्ग
हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग का आरोप है कि मंडियां धान से भर गई हैं। बाजरा भी मंडियों में आ गया है लेकिन धान उठान की कोई व्यवस्था नहीं। विधानसभा चुनाव के दौरान सरकार ने वादा किया था कि 3100 रुपये एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) के अनुसार धान खरीदा जाएगा लेकिन अब धान 2389 रुपये एमएसपी पर खरीदा जा रहा है। उसमें भी कट लगाए जा रहे हैं। मिलर्स को एफसीआई गोदामों तक चावल पहुंचाने का किराया तक बंद कर दिया गया है। सरसों व गेहूं की बिजाई का समय आ गया लेकिन नुकसान का मुआवजा भी नहीं मिल सका। नरमा और सरसों की खरीद आढ़ती के बजाय सरकार सीधे करेगी। ऐसे में आढ़तियों को भारी नुकसान होगा।

-------------
मंडियों में किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी निर्धारित की गई है। अगर किसी तरह की कुछ तकनीकी खामियां भी आ रही हैं, तो उसका निवारण भी किया जाएगा।

राजेश नागर, मंत्री, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed